मेरठ के सेंट्रल मार्केट सीलिंग मामले में सोमवार का दिन बेहद अहम साबित होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के नियोजन विभाग की टीम लखनऊ से मेरठ पहुंचकर छोटे भवनों पर लागू सेटबैक (खुला स्थान) नियमों को लेकर मंथन करेगी। इसी के साथ विभाग की ओर से नोटिस जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। नई भवन निर्माण एवं विकास उपविधि के तहत आवासीय और व्यावसायिक दोनों प्रकार के भवनों में सेटबैक अनिवार्य किया गया है। शास्त्रीनगर सेक्टर-2 में 25 से 38 वर्ग मीटर के छोटे भूखंडों पर बने मकानों में भूतल पर दुकानें और ऊपर आवास हैं। ऐसे में यदि सख्ती से सेटबैक लागू किया गया तो बड़ी संख्या में दुकानें और मकान प्रभावित हो सकते हैं। व्यापारियों की चिंता केवल जगह कम होने तक सीमित नहीं है। अधिकांश इमारतें 35-40 साल पुरानी हैं और इनमें बड़े बदलाव की बजाय केवल मरम्मत होती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सेटबैक के लिए तोड़फोड़ की गई तो पूरी इमारत के गिरने का खतरा भी पैदा हो सकता है। इस बीच, इंजीनियर हेमंत सिंह ने धरनास्थल पर पहुंचकर व्यापारियों को तकनीकी और कानूनी पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने आवास एवं शहरी नियोजन नियमावली 1982 का हवाला देते हुए कहा कि उस समय वेंटिलेशन पर जोर था, जबकि अब एग्जॉस्ट फैन और अन्य आधुनिक साधनों से यह जरूरत पूरी की जा सकती है। उन्होंने दावा किया कि 60 वर्ग मीटर तक के मकानों में सेटबैक अनिवार्य नहीं है, जिससे छोटे दुकानदारों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद प्रशासन की कार्रवाई भी तेज हो गई है। 9 अप्रैल को सुनवाई के दौरान अदालत ने आवास एवं विकास परिषद को अवैध निर्माण हटाने के लिए 10 से 15 दिन का नोटिस देने के निर्देश दिए थे। तय समय में निर्माण न हटाने पर प्रशासन खुद कार्रवाई करेगा और खर्च संबंधित व्यक्ति से वसूला जाएगा। एडवोकेट अंजनेव शर्मा ने बताया कि ये प्लॉट एलआईजी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी में आवंटित किए गए थे, जहां छोटे व्यापारियों का रोजगार करना नियमों के अनुरूप है। इन तर्कों से उत्साहित व्यापारियों ने एकजुट होकर अपने हक और रोजी-रोटी की लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया है।


