मुरादाबाद कोर्ट का बड़ा फैसला: कुशांक गुप्ता हत्याकांड में ललित कौशिक को 8 साल की सजा, गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई

मुरादाबाद कोर्ट का बड़ा फैसला: कुशांक गुप्ता हत्याकांड में ललित कौशिक को 8 साल की सजा, गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई

Lalit Kaushik gangster act conviction: मुरादाबाद की एडीजे-पांच अदालत ने चर्चित कुशांक गुप्ता हत्याकांड से जुड़े गैंगस्टर एक्ट मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने पूर्व ब्लॉक प्रमुख ललित कौशिक, खुशवंत उर्फ भीम और केशव को दोषी मानते हुए आठ-आठ साल की कैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही तीनों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है, जिससे यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।

कड़ी सुरक्षा के बीच पेशी

गुरुवार को सुनवाई के दौरान तीनों दोषियों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अदालत में पेश किया गया। अदालत परिसर में पहले से ही सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वाड की मदद से हर कोने की जांच की गई। पुलिस बल की भारी तैनाती के बीच सुनवाई प्रक्रिया को अंजाम दिया गया।

पहले ही ठहराए जा चुके थे दोषी

इस मामले में अदालत ने एक दिन पहले यानी बुधवार को ही तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा पर सुनवाई के लिए गुरुवार का दिन तय किया गया। कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने सख्त रुख अपनाते हुए सजा सुनाई, जिससे अपराधियों को कड़ा संदेश गया।

पहले से दर्ज हैं कई गंभीर मामले

ललित कौशिक के खिलाफ पहले से भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। इससे पहले उसे अपहरण के एक मामले में 23 फरवरी 2024 को दस साल की सजा मिल चुकी है। इसके अलावा अवैध रूप से मैगजीन रखने के मामले में भी उसे सात साल की सजा सुनाई जा चुकी है। इससे उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि और भी स्पष्ट हो जाती है।

2022 में हुई थी सनसनीखेज हत्या

यह पूरा मामला 12 जनवरी 2022 का है, जब सिविल लाइंस क्षेत्र के रामगंगा विहार में स्पोर्ट्स सामान के कारोबारी कुशांक गुप्ता की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी और पुलिस पर जल्द खुलासा करने का दबाव बढ़ गया था।

सुपारी देकर कराई गई हत्या

पुलिस जांच में सामने आया कि इस हत्याकांड के पीछे ललित कौशिक का हाथ था। उसने कथित तौर पर खुशवंत उर्फ भीम और केशव को सुपारी देकर कुशांक गुप्ता की हत्या करवाई थी। इस खुलासे के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था और बाद में गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई।

गैंगस्टर एक्ट में दर्ज हुआ मामला

इस पूरे प्रकरण में पुलिस ने साल 2023 में सिविल लाइंस थाने में गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। इसके बाद मामले की सुनवाई एडीजे-पांच (स्पेशल गैंगस्टर एक्ट) अदालत में लगातार चल रही थी। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद आखिरकार अदालत ने दोषियों को सजा सुनाकर मामले का पटाक्षेप किया।

सुनवाई के दौरान अदालत में हाई अलर्ट

सुनवाई के दिन सुबह से ही अदालत परिसर में हाई अलर्ट की स्थिति रही। सुरक्षा एजेंसियों ने हर आने-जाने वाले व्यक्ति की सघन जांच की। सीओ कुलदीप कुमार गुप्ता और इंस्पेक्टर मनीष सक्सेना के नेतृत्व में भारी पुलिस बल तैनात किया गया, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

बचाव पक्ष की दलीलें भी नहीं आईं काम

सुनवाई के दौरान दोषियों के वकीलों ने अदालत से कम से कम सजा देने की अपील की। हालांकि, कोर्ट ने मामले की गंभीरता और अपराध की प्रकृति को देखते हुए इन दलीलों को खारिज कर दिया और सख्त फैसला सुनाया। दोपहर 2:30 बजे अदालत ने अंतिम निर्णय सुनाते हुए तीनों को आठ-आठ साल की सजा और जुर्माना लगाया।

सजा से गया कड़ा संदेश

इस फैसले को कानून-व्यवस्था के लिहाज से एक बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। सुपारी किलिंग जैसे गंभीर अपराधों पर अदालत के इस कड़े रुख से साफ संकेत मिलता है कि अपराधियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा और कानून अपना काम पूरी सख्ती से करेगा।

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