सरकारी सिस्टम में बड़ा बदलाव: अब ई-ग्रास विदा, 11 से आरएमएस के जरिए जमा होगा राजस्व

सरकारी सिस्टम में बड़ा बदलाव: अब ई-ग्रास विदा, 11 से आरएमएस के जरिए जमा होगा राजस्व

राजस्थान सरकार ने प्रदेश की वित्तीय व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा तकनीकी बदलाव करने का निर्णय लिया है। प्रदेश में लंबे समय से चल रहा राजस्व संग्रहण का पोर्टल ई-ग्रास अब इतिहास बन जाएगा। आगामी 11 अप्रेल से राज्य के सभी विभागों के लिए आईएफएमएस 3.0 के तहत विकसित राजस्व प्रबंधन प्रणाली (आरएमएस) को अनिवार्य रूप से लागू कर दियाहै। वित्त विभाग ने इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए। नए सिस्टम के तहत अब आमजन (जमाकर्ताओं) से लेकर सरकारी विभागों तक को अपनी एसएसओ आईडी के जरिए ही लेनदेन करना होगा।

आदेश के अनुसार 10 अप्रेल की रात 11 बजे ई-ग्रास पोर्टल बंद हो जाएगा। इसके ठीक एक घंटे बाद यानी 11 अप्रेल की आधी रात से सभी प्रकार के राजस्व संग्रहण की सेवाएं आरएमएस के माध्यम से शुरू होगी। ई-ग्रास पर उपलब्ध पुरानी सभी सुविधाओं को अब नए पोर्टल पर शिफ्ट कर दिया गया है। राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पारदर्शिता और शुद्धता के उद्देश्य से आईएफएमएस 3.0 के दायरे को बढ़ाया है। 11 अप्रेल से सभी विभागों के लिए आरएमएस प्रभावी हो जाएगा। इससे सरकारी राजस्व का प्रबंधन और भी सुगम होगा।

आमजन के लिए यह होगा बदलाव

  • एसएसओ आईडी अनिवार्य: अब चालान बनाने के लिए जमाकर्ताओं को अपनी एसएसओ आईडी से लॉगिन करना होगा।
  • पुराना डेटा सुरक्षित: पुराने रजिस्टर्ड यूजर्स जैसे ही एसएसओ से लॉगिन करेंगे, उनका ई-ग्रास का पिछला डेटा अपने आप दिखने लगेगा।
  • ऑनलाइन व मैनुअल विकल्प: नए पोर्टल पर भी ऑनलाइन पेमेंट के साथ-साथ मैनुअल चालान बनाने की सुविधा बरकरार रहेगी।

बैंकों और विभागों को डेडलाइन

सरकार ने बैंकों को निर्देश दिए हैं कि वे 11 अप्रेल से पूर्व ही आरएमएस के साथ अपना इंटीग्रेशन (जुड़ाव) पूरा कर लें। जिन विभागों के पास अपनी विभागीय एप्लीकेशन हैं, उन्हें 31 मार्च तक आरएमएस के साथ तालमेल बिठाने की समय सीमा दी गई है। यदि कोई विभाग इसमें देरी करता है, तो उसके राजस्व संग्रहण में होने वाली बाधा के लिए वह स्वयं जिम्मेदार होगा।

आरएमएस की 5 बड़ी खासियते

  • सिंगल विंडो सिस्टम: बजट, पेंशन, वेतन के बाद अब राजस्व संग्रहण भी एक ही छत आईएफएमएस 3.0 के नीचे।
  • जीआरएन जनरेशन: चालान के लिए जीआरएन अब निरंतर रूप से आरएमएस पर ही जनरेट होंगे।
  • क्विक चालान: चिन्हित सेवाओं के लिए पुराने ‘पे चालान’ की तरह ही ‘क्विक चालान’ की सुविधा।
  • ऑटोमेटेड मिलान: डेली स्क्रॉल और लेखा प्रेषण की प्रक्रिया अब पूरी तरह डिजिटल और तेज होगी।
  • पारदर्शिता: डेटा का सीधा हस्तांतरण होने से राजस्व में होने वाली गड़बड़ियों पर लगाम लगेगी।

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