कानपुर में होटल कारोबारी से रंगदारी, डकैती मामले में आरोपी कर्मचारी नेता भूपेश अवस्थी की कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर ली है। पीड़िता कारोबारी ने दिसंबर 2010 को मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। पिछले साल मामले में दोबारा जांच शुरू हुई, जिसमें आरोपी भूपेश का नाम सामने आया था। 15 साल पहले जूही में दर्ज हुई थी FIR होटल कारोबारी प्रज्ञा त्रिवेदी ने कोर्ट के आदेश से 15 साल पहले जूही थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि वह ओम जायसवाल के साथ साझेदारी में होटल संचालन कर रही थीं। ओम जायसवाल का अजय निगम से आए दिन विवाद होता था, जिसके कारण वह उनसे भी रंजिश रखता था। आरोप था कि अजय, एडवोकेट अखिलेश दुबे व उसके गुर्गों ने होटल संचालन के नाम पर दो लाख रंगदारी मांगी, मना करने पर अजय ने अश्लील भाषा का किताब छपवा कर बंटवा दी। विरोध पर 6 दिसंबर 2010 को उनके होटल में घुसकर मारपीट की और जंजीर तोड़ ली। 20 दिसंबर 2010 को मुकदमा लिखा गया कोर्ट के आदेश पर 20 दिसंबर 2010 को मुकदमा लिखा गया, लेकिन अखिलेश दुबे के रसूख में पांच घंटे के भीतर पुलिस ने मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। अखिलेश दुबे पर शिकंजा कसने के बाद प्रज्ञा त्रिवेदी ने एक बार फिर शिकायत की, जिस पर दोबारा जांच शुरू हुई। अग्रिम विवेचना में भूपेश अवस्थी का नाम सामने आया था, जिसके बाद से वह फरार थे। भूपेश ने अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम की कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान भूपेश की ओर से कहा गया कि कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। मुकदमे में भी उनका नाम नहीं है। उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया है। घटना के समय वह अपने कर्मचारी यूनियन के सदस्यों के साथ लखनपुर स्थित कार्यालय में थे। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम ने मामले की सुनवाई करते हुए अग्रिम जमानत अर्जी स्वीकार कर ली।


