BHU अस्पताल की व्यवस्था के खिलाफ जूनियर रेजिडेंस का विरोध:जेआर-1 ने शुरू किया हड़ताल, आत्महत्या की कोशिश करने‌ वाली साथी के लिए मांग रहे न्याय

BHU अस्पताल की व्यवस्था के खिलाफ जूनियर रेजिडेंस का विरोध:जेआर-1 ने शुरू किया हड़ताल, आत्महत्या की कोशिश करने‌ वाली साथी के लिए मांग रहे न्याय

आईएमएस बीएचयू में जूनियर रेजिडेंट द्वारा आत्महत्या के प्रयास की घटना के चौथे दिन माहौल और तनावपूर्ण हो गया। घटना के विरोध में जूनियर रेजिडेंट-1 (जेआर-1) सोमवार को हड़ताल पर चले गए, जिसके कारण वार्ड और ओपीडी की कई सेवाएं प्रभावित हो गई। जेआर-1 के हड़ताल पर जाने के बाद अस्पताल की व्यवस्था फिलहाल सीनियर रेजिडेंट और जेआर-2 व जेआर-3 संभाल रहे हैं। मरीजों के इलाज और जरूरी सेवाओं को जारी रखने के लिए वरिष्ठ रेजिडेंट अतिरिक्त जिम्मेदारी निभा रहे हैं। पहले जानिए क्या है स्थिति अस्पताल में सामान्य तौर पर जेआर-1 वार्ड में भर्ती मरीजों का फॉलोअप, नए मरीजों का एडमिशन बनाना, जांच के लिए सैंपल लेना और कई अन्य क्लिनिकल कार्यों की जिम्मेदारी निभाते हैं। हड़ताल के कारण अब ये सभी काम जेआर-2 और जेआर-3 को करने पड़ रहे हैं, जिससे उन पर कार्यभार बढ़ गया है। जूनियर रेजिडेंस ने मासिक दबाव का लगाया आरोप जूनियर रेजिडेंट का कहना है कि आत्महत्या के प्रयास की घटना ने रेजिडेंट डॉक्टरों की कार्य परिस्थितियों और मानसिक दबाव को उजागर कर दिया है। उनका आरोप है कि अत्यधिक कार्यभार और प्रशासनिक दबाव के कारण डॉक्टरों को काफी मानसिक तनाव झेलना पड़ता है। प्रदर्शन कर रहे जेआर-1 ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने कार्यभार कम करने, ड्यूटी व्यवस्था में सुधार और रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए बेहतर कार्य वातावरण सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई है। अब जानिए क्यों शुरू हुआ विरोध सर्जरी विभाग में जूनियर डॉक्टर ने किसी बात से नाराज होकर शुक्रवार को इंसुलिन की ओवरडोज़ ले ली थी। इसके बाद से उनका इलाज शताब्दी सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक (एसएसबी) की आईसीयू में चल रहा है। हालत चिंताजनक बनी हुई है। घटना के चार दिन हो गए हैं, लेकिन अब तक वह पूरी तरह से होश में नहीं आ पाई हैं। बताया जा रहा है कि इंसुलिन की ओवरडोज़ का असर उनके शरीर के कई अंगों पर पड़ा है। अब जानिए निदेशक ने क्या कहा आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन संखवार का कहना है कि मरीजों के इलाज पर ज्यादा असर न पड़े इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है और वरिष्ठ डॉक्टरों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं रेजिडेंट डॉक्टरों से बातचीत की जा रही है। उन्होंने बताया कि जांच कमेटी का गठन पहले ही किया गया है। इसके अलावा जूनियर रेजिडेंस डॉक्टर के इलाज के लिए डॉक्टरों का पैनल लगा है। जूनियर डाक्टरों की प्रमुख 5 मांग…

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