खान एवं भूविज्ञान विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में राजस्व अर्जन के आंकड़े जारी किए हैं। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 10,269.53 करोड़ रुपए का कुल राजस्व अर्जित किया गया है। विभाग को इस वर्ष 11,780 करोड़ रुपए का लक्ष्य दिया था। प्रदेश के खजाने को भरने में एक बार फिर भीलवाड़ा ने अपना दबदबा कायम रखते हुए कुल खनन राजस्व का अकेले 25 प्रतिशत का योगदान दिया है। धरती के गर्भ में छिपा खनिज सरकार के लिए सोना साबित हो रहा है। प्रदेश के खजाने को भरने में भीलवाड़ा जिला सिरमौर बन गया है।
भीलवाड़ा जोन ने पहली बार छुआ 2546 करोड़ का आंकड़ा
भीलवाड़ा जोन के अधीक्षण खनिज अभियंता ओपी काबरा ने बताया कि भीलवाड़ा वृत्त (सर्कल) के अधिकारियों व कर्मचारियों की कड़ी मेहनत से पहली बार 2546 करोड़ रुपए का ऐतिहासिक राजस्व प्राप्त हुआ है। इसमें भीलवाड़ा ने सर्वाधिक 2122 करोड़ रुपए जुटाए हैं, जबकि चित्तौड़गढ़ और निम्बाहेड़ा खनिज विभाग से 424 करोड़ रुपए का राजस्व मिला है। भीलवाड़ा खनिज अभियंता कार्यालय ने पहली बार 2 हजार करोड़ के राजस्व का आंकड़ा पार कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। बीकानेर एकमात्र ऐसा जोन रहा जिसने अपने निर्धारित वार्षिक लक्ष्य को पार कर लिया है। बीकानेर को 643.19 करोड़ रुपए का लक्ष्य मिला था, जबकि वहां से 736.11 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित किया है।
हिंदुस्तान जिंक से मिले 1771 करोड़
भीलवाड़ा के खनिज अभियंता महेश शर्मा ने 2122 करोड़ रुपए के राजस्व का ब्यौरा देते हुए बताया कि इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी हिंदुस्तान जिंक की रही, जिससे 1771 करोड़ रुपए मिले। इसके अलावा आयरन से 75 करोड़, बजरी से 80 करोड़, क्वाटर्सफेल्सपार से 36 करोड़, मेसनरी स्टोन से 5 करोड़ तथा अवैध परिवहन पेनल्टी व अन्य से 60 करोड़ रुपए का राजस्व मिला है। शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और जिला कलक्टर जसमीत सिंह संधू के निर्देशन में पिछले एक साल से अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का भी इस राजस्व वृद्धि में बड़ा योगदान रहा है।
बजरी पर चर्चा ज्यादा, राजस्व में काफी पीछे
प्रदेश में बजरी खनन हमेशा से राजनीतिक बहस और विवादों का केंद्र रहा है, लेकिन राजस्व के नजरिए से इसका योगदान कम है। भीलवाड़ा में राजस्थान उच्च न्यायालय की ओर से बजरी दोहन पर रोक है। इसके चलते बजरी से भीलवाड़ा को 80 करोड़ की ही रॉयल्टी मिली। यह आंकड़ा इस बात की ओर इशारा करता है कि बजरी के अवैध कारोबार से असली मलाई माफिया खा रहे हैं, जबकि आम जनता को निर्माण के लिए महंगे दाम चुकाने पड़ रहे हैं।
जोन के आधार पर राजस्व आंकड़े(करोड़ों )
- जोन लक्ष्य प्राप्ति
- भीलवाड़ा 2899.06 2506.87
- राजसमंद 1772.89 1613.53
- जोधपुर 1713.99 1368.19
- उदयपुर 1407.71 1187.42
- जयपुर 1471.33 1168.24
- अजमेर 964.78 942.42
- बीकानेर 643.19 736.11
- भरतपुर 538.35 407.86
- कोटा 368.71 315.69
- अन्य 23.22
- कुल 11780.00 10269.53


