Exam Negligence Case: भीलवाड़ा जिले के शिक्षा महकमे में एक बड़ी और गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। पंडेर स्थित राउमावि में 23 फरवरी को आयोजित 8वीं बोर्ड परीक्षा के दौरान केन्द्राधीक्षक और कर्मचारियों की भारी चूक से विज्ञान विषय के बजाय सामाजिक विज्ञान के प्रश्न-पत्र का लिफाफा खोल दिया गया। गनीमत यह रही कि एक शिक्षक की वजह से यह पेपर किसी भी परीक्षार्थी के हाथ में नहीं गया। इससे पेपर आउट होने का बड़ा कलंक लगने से बच गया। 5 लापरवाह कार्मिकों को चार्जशीट के प्रस्ताव तैयार किए हैं।
मामला दबाने की कोशिश
हैरानी की बात यह रही कि गलत पेपर का लिफाफा खोलने की घटना 23 फरवरी को हुई थी, लेकिन इसकी जानकारी डीईओ को 24 फरवरी को दी गई। यानी जहाजपुर के सीबीईओ और प्रधानाचार्य इस मामले पर पर्दा डालना चाहते थे। लेकिन भनक लगने के बाद एडीपीसी समसा कल्पना शर्मा ने जांच दल का गठन किया।
संस्कृत शिक्षक की सतर्कता से मचा हड़कंप
पंडेर थाने से पेपर लाते समय अधिकारियों ने लिफाफा देखा ही नहीं। थाने के रजिस्टर पर प्रधानाचार्य समेत दोनों अधिकारियों ने बिना देखे हस्ताक्षर कर दिए। स्कूल में लिफाफे लाने के बाद दो अन्य वीक्षकों ने भी बिना देखे रजिस्टर में साइन कर दिए। दोपहर 1:25 बजे जब संस्कृत के वरिष्ठ अध्यापक दिनेश कुमार रेगर ने पेपर के लिफाफे को ध्यान से देखा, तो उन्होंने तुरंत कहा कि यह दूसरे विषय का पेपर है।
यह सुनते ही स्कूल प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में स्टाफ दोबारा पंडेर थाने दौड़ा और विज्ञान का पेपर लेकर आया। इसमें 20 मिनट का अतिरिक्त समय लगा। परीक्षा दे रहे 186 छात्रों तक गलत पेपर नहीं पहुंचा, इसलिए इसे पेपर आउट की श्रेणी में नहीं माना गया।
इन 5 दोषियों को थमाई जाएगी चार्जशीट
गंभीर लापरवाही बरतने और अनुशासनहीनता के आरोप में 5 अधिकारियों और कार्मिकों को चार्जशीट (आरोप पत्र) थमाई जाएगी। इसमें बिना देखे गलत लिफाफा लाने और खोलने का मुख्य आरोप स्कूल के केन्द्राधीक्षक व प्रधानाचार्य रामेश्वर लाल मीणा, वरिष्ठ अध्यापक हिन्दी दुर्गेश सेन, पेपर की सही पहचान न करने पर परीक्षा प्रभारी व व्याख्याता अंकुर शर्मा, सुपरवाइजर व व्याख्याता रूपाली मिश्रा तथा लापरवाही बरतने के आरोप में राउप्रावि ढगारिया की माया जाट शामिल है। जहाजपुर सीबीईओ शिखा राणा यह नहीं बताया कि उन्होंने उच्च अधिकारी को सूचना कब दी थी।


