आरबीआई ने इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग धोखाधड़ी के मामले में राहत के लिए नया ड्राफ्ट जारी किया है। ये नियम ऑनलाइन और कार्ड-आधारित पेमेंट, दोनों पर 1 जुलाई, 2026 से लागू होंगे करने का प्रस्ताव है। आरबीआई ने ₹50 हजार तक की ऑनलाइन ठगी के लिए नया मुआवजा तंत्र का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत नुकसान का 85% या अधिकतम ₹25 हजार (जो भी कम हो) वापस मिलेगा। यह सुविधा जीवन में सिर्फ एक बार मिलेगी। शर्त यह है कि नुकसान वास्तविक साबित हो और घटना के 5 दिन के भीतर बैंक व साइबर क्राइम हेल्पलाइन (1930) पर शिकायत दर्ज कराई गई हो। 65% बोझ रिजर्व बैंक, 10% ग्राहक का बैंक और 10% लाभार्थी बैंक उठाएगा। बैंक की चूक से हुई ठगी पर ग्राहक की जीरो लायबिलिटी होगी और पूरा ट्रांजैक्शन रिवर्स किया जाएगा। चाहे ग्राहक ने शिकायत की हो या नहीं। 500 से अधिक के हर इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन पर बैंक के लिए तुरंत एसएमएस अलर्ट भेजना अनिवार्य होगा। जहां ग्राहक ने ईमेल पता दिया हो, वहां ईमेल अलर्ट भी भेजना होगा। ये अलर्ट इन-एप नोटिफिकेशन के अतिरिक्त होंगे। ड्राफ्ट नियमों में ग्राहक की लापरवाही को स्पष्ट परिभाषित किया गया है। मसलन ओटीपी, पासवर्ड या पिन किसी को बताना, बैंक की स्पष्ट चेतावनी नजरअंदाज करना, पिन को कार्ड के साथ लिखकर रखना या मैलिशियस एप डाउनलोड करना।
भास्कर अपडेट्स:₹50 हजार तक डिजिटल ठगी में 85% तक मुआवजा मिलेगा, आरबीआई ने नया ड्राफ्ट जारी किया


