Bharatpur Gift : भरतपुर शहर के सर्कुलर रोड को सुगम और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। सरकार की ओर से आरबीएम चिकित्सालय से लेकर चांदपोल गेट तक 6-लेन सड़क का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए भरतपुर विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने वर्क ऑर्डर जारी कर दिया है। फ्लाइओवर निर्माण कार्य पूर्ण होते ही 6-लेन सड़क का काम शुरू किया जाएगा, जिससे शहरवासियों को यातायात में बड़ी राहत मिलेगी।
सर्कुलर रोड पर काली की बगीची से आरवीएम चिकित्सालय तथा हीरादास चौराहे से चांदपोल गेट तक फोरलेन फ्लाइओवर का निर्माण किया जा रहा है। फ्लाइओवर पूरा होते ही आरबीएम से चांदपोल गेट तक लगभग 3 किमी लंबी सिक्सलेन सड़क का निर्माण कराया जाएगा। इस परियोजना पर करीब 28 करोड़ रुपए की लागत आएगी। इस सड़क निर्माण में डिवाइडर बनाए जाएंगे तथा बिजली की लाइनें अंडरग्राउंड की जाएंगी। साथ ही आधुनिक रोड लाइट्स भी लगाई जाएंगी।
मास्टर प्लान के तहत 36 मीटर चौड़ी सड़क प्रस्तावित
भरतपुर विकास प्राधिकरण (बीडीए) की ओर से सार्वजनिक निर्माण विभाग और नगर निगम के साथ समन्वय कर सर्वे और अन्य औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। बीडीए कमिश्नर कनिष्क कटारिया ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार सड़क चौड़ीकरण किया जा रहा है। मास्टर प्लान के तहत यहां 36 मीटर चौड़ी सड़क प्रस्तावित है। लेकिन एक ओर सीएफसीडी और दूसरी ओर आरएनएफसीडी होने के कारण मौके पर उपलब्ध भूमि के अनुसार सिक्सलेन सड़क का निर्माण किया जाएगा।
सर्कुलर रोड को चार हिस्सों में विभाजित किया है, जिनमें 2 हिस्सों में फ्लाइओवर और दो हिस्सों में सिक्सलेन सड़क का निर्माण होगा। सिक्सलेन सडक के लिए वर्क ऑर्डर जारी कर दिया है। दोनों ओर तीन-तीन लेन बनाई जाएंगी और किनारों पर इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाई जाएंगी। जिससे सड़क की चौड़ाई और बढ़ जाएगी।
थिन व्हाइट टॉपिंग तकनीक से बनेगी सड़क
बीडीए के अधीक्षण अभियंता योगेश माथुर ने बताया कि सिक्सलेन सड़क का निर्माण थिन व्हाइट टॉपिंग तकनीक से किया आएगा। यह एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें मौजूदा सड़क के ऊपर पतली सीमेंट कंक्रीट की परत बिछाई जाती है। यह तकनीक शहरी क्षेत्रों और जलभराव वाले क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त मानी जाती है। इससे सड़क अधिक मजबूत, टिकाऊ और लंबे समय तक चलने वाली बनती है।
योजना से होने वाले प्रमुख लाभ
1- सड़क अधिक टिकाऊ और छीर्घकालीन होगी।
2- जलभराव से होने वाली क्षति में कमी आएगी।
3- रखरखाव पर खर्च कम होगा।
4- भारी यातायात के लिए उपयुक्त सड़क बनेगी।
5- बेहतर राइड क्वालिटी और सड़क सुरक्षा मिलेगी।
6- पर्यावरण के अनुकूल तकनीक का उपयोग होगा।


