नीता सिसौदिया/ प्रियंका रामचंदानी की रिपोर्ट 200 से ज्यादा संकरी गलियों वाला भागीरथपुरा अब भी सदमे में है। दूषित पानी से हर दिन मौत हो रही। हर घर में कोई न कोई बीमार है। लोग पानी उबालकर पी रहे हैं। कुछ परिवार आरओ की कैन मंगवा रहे हैं। उधर, इंजीनियरों की टीम को अब तक वह लीकेज नहीं मिला है, जहां से ड्रेनेज की गंदगी पानी की लाइन में मिली। 2 हजार चैंबर की जांच, सैकड़ों जगह खुदाई के बाद भी नतीजा शून्य है। इतनी बड़ी तबाही के बाद अब पूरे भागीरथपुरा में टैंकरों से पानी की सप्लाय की जा रही है। बोतलें बांटी जा रही है। क्षेत्र से वाकिफ रिटायर इंजीनियरों को बुलवाया लीकेज खोजने ड्रेनेज विभाग के सेवानिवृत्त इंजीनियरों को दोबारा बुलवाया गया है। शुक्रवार दोपहर पूर्व कार्यपालन यंत्री सुनील गुप्ता, विवेश जैन सहित अन्य इंजीनियर पहुंचे। ये वे लोग हैं, जिन्होंने सालों तक यहां जल वितरण और ड्रेनेज लाइन का काम देखा। पानी की लाइन पर बने तीन चैंबर्स को हटाया गया। जहां-जहां से गंदे पानी की शिकायत मिल रही, वहां खुदाई कर जांच की जा रही है। रिंग सर्वे : आसपास के 50-50 घरों को जांच रहे भागीरथपुरा में अब रिंग सर्वे शुरू किया गया है। जो भी हॉट स्पॉट मिले हैं, वहां घरों के आसपास 50 घरों का सर्वे किया गया। कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि 6 एम्बुलेंस लगाई हैं। सीएमएचओ डॉ. माधव हासानी ने बताया शुक्रवार को 3679 घरों का सर्वे किया। लगभग 141 मरीज मिले। विभिन्न अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या 310 है। 107 मरीजों को डिस्चार्ज किया है। 208 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं। आईसीयू में 27 मरीज भर्ती हैं। घोर लापरवाही… 5 साल से शिकायत, पर सुनवाई नहीं रहवासी चंदा बाई ने बताया 5 साल से परेशान हैं। नर्मदा का पानी गंदा ही आता है। शिकायत करो, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं।
राधेश्याम परिहार बताते हैं सैंपल देते रहे कि इनकी जांच कर लीजिए। शिकायतें होती रही लेकिन हालात नहीं बदले।
भावना रूपानी की तबीयत भी गंदा पानी पीने से ऐसी बिगड़ी कि आईसीयू में रहना पड़ा। वे बोलीं नल खोलते ही डर लगता है कि… ये पानी नहीं, बीमारी है।


