खाने में तड़का देने वाले सावधान! अब सौंफ पर सीमेंट पोतकर बन रहा ‘जीरा’, ऐसे करें असली की पहचान

खाने में तड़का देने वाले सावधान! अब सौंफ पर सीमेंट पोतकर बन रहा ‘जीरा’, ऐसे करें असली की पहचान

MP News: ग्वालियर के बहोड़ापुर थाना क्षेत्र में खाद्य पदार्थों में मिलावट का गंभीर मामला सामने आया है। सौंफ पर सीमेंट व रसायन का लेप लगाकर नकली जीरा (Fake Cumin) तैयार किया। इसे बाजार में बेचने की तैयारी थी। पुलिस ने जीरे में सीमेंट और रसायन मिलाकर नकली पैकेजिंग के जरिए बाजार में सप्लाई करने के आरोप में तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। नकली जीरे का खुलासा होने के बाद शनिवार को दाल बाजार व्यापार समिति ने व्यापारियों की बैठक बुलाई। बैठक में व्यापारियों को बताया गया कि इस तरह का जीरा न खरीदें और न बेचें। इसमें सावधानी बरती जाए।

शिकायतकर्ता हिमांशु कुमार पटेल ने पुलिस को बताया कि उनकी कंपनी के नाम और लेबल की नकल कर नकली पैकेट तैयार किए जा रहे थे। इन पैकेटों में जीरे के साथ सीमेंट और अन्य रासायनिक पदार्थ मिलाकर उसे असली बताकर बाजार में बेचा जा रहा था। इससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता था। यह अवैध गतिविधियां 18 दिसंबर 2025 से 26 दिसंबर 2025 के बीच की गईं।

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मिलावटखोर ऐसे झोंक रहें आंखों में धूल

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी नकली लेबल, पैकेजिंग मशीन और मिलावटी सामग्री का उपयोग कर बड़े पैमाने पर जीरे की पैकिंग कर रहे थे। नकली पैकेट देखने में असली जैसे लगते थे, जिससे आम उपभोक्ता आसानी से धोखे का शिकार हो रहा था। पुलिस ने इस मामले में हरीश सिंघल, मनोज मैनेजर और टीटू अग्रवाल को आरोपी बनाया है। तीनों के खिलाफ कॉपीराइट अधिनियम (संशोधित) 1957 की धारा 63 व 65 और भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 351(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है।

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ट्रांसपोर्ट नगर में कार्रवाई, 46 बोरी नकली जीरा जब्त

बहोड़ापुर स्थित यूपी-एमपी ट्रांसपोर्ट पर शुक्रवार को पुलिस ने दाल बाजार के कारोबारियों और एक ब्रांड अधिकारी के साथ मिलकर 46 बोरी नकली जीरा जब्त किया। करीब 3.25 लाख रुपये कीमत का यह माल झांसी भेजा जा रहा था।

कैसे बन रहा है नकली जीरा

मिलावटखोर जीरे जैसे दिखने वाले नकली दानों में रंग और खुशबू मिलाकर उन्हें असली बताकर बेच रहे हैं। कहीं पुराने या खराब जीरे को केमिकल से चमकाकर ताजा दिखाया जा रहा है। नतीजा ग्राहक आसानी से धोखा खा जाते हैं। ब्रांडेड जीरा जहां 260-280 रुपये प्रति किलो बिक रहा है, वहीं 150-180 रुपये में मिलावटी जीरा धड़ल्ले से उपलब्ध है। चौंकाने वाली बात यह कि इस सस्ते जीरे को नामचीन ब्रांडों के कट्टों में भरकर पैकिंग कर दी जाती है, जिससे पहचान और मुश्किल हो जाती है।

ऐसे पहचानें नकली जीरा

हथेली पर थोड़ा जीरा लेकर मसलें यदि काला रंग छोड़ दे, तो मिलावट समझें, असली जीरा रंग नहीं छोड़ता। हल्की क्वालिटी का मिलावटी जीरा अक्सर बिना पॉलिश और ग्रीडिंग का होता है, खुशबू नहीं होती, और कई बार घास के फूलों से तैयार किया जाता है। (MP News)

इनका कहना है

नकली जीरे को लेकर व्यापारियों की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में व्यापारियों को जानकारी दी है कि मिथ्या छाप व नकली जीरा न खरीदें। इसे कौन बनाकर बाजार में भेज रहा है। इसकी जानकारी नहीं मिल पाती है। – दिलीप पंजवानी, अध्यक्ष दाल बाजार व्यापार समिति

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