एसटीएफ और यूपी पुलिस ने कटिहार से मोबाइल दुकानदार इस्तार आलम को गिरफ्तार कर लिया। वह कटिहार के रौतारा के हथिया दियारा का रहने वाला है। उसका गैंग गली-मोहल्ले में घूम-घूमकर नया बर्तन देकर पुराना और खराब हो चुका मोबाइल खरीदता है। जब इनके पास 10-20 हजार मोबाइल जमा हो जाते हैं तो ट्रक से लेकर कटिहार पहुंचते हैं। यहां इस्तार मोबाइल को तोड़कर उनका मदर बोर्ड निकाल लेता है और चीन-बांग्लादेश के साइबर अपराधियों को बेच देता है। साइबर अपराधी इन मोबाइल से डाटा निकालते हैं और उनके यूजर से ठगी करते हैं। इस्तार कटिहार में पुराने मोबाइल का दुकान चलाता है। वह एक साल से विदेशी साइबर अपराधियों के संपर्क में है। वह बिहार-झारखंड के साइबर अपराधियों को भी मोबाइल का मदर बोर्ड उपलब्ध कराता है। चीन, बांग्लादेश के वैसे साइबर अपराधी जो कंबोडिया, मलेशिया, म्यांमार के साइबर स्कैम कंपाउंड में एक्टिव हैं, वे इस्तार और उसके गैंग के संपर्क में रहते हैं। इस्तार ने हैदराबाद, तमिलनाडु, दिल्ली जैसे कई राज्यों में अपने गिरोह को सक्रिय कर रखा है। जांच में यह बात आई है कि इस्तार ने बिहार और जामताड़ा के साइबर अपराधियों को कई बार मदर बोर्ड बेचा है। ऐसे खुला भेद : यूपी पुलिस ने 11605 मोबाइल के साथ 8 लोगों को पकड़ा उत्तरप्रदेश के मिर्जापुर जिले के लालगंज थाने की पुलिस ने 16 मार्च की रात तेंदुई टोल प्लाजा के पास एक ट्रक के साथ आठ लोगों को पकड़ा। ट्रक में 1 करोड़ के 11605 मोबाइल, आठ बाइक जब्त की गई थी। सभी गिरफ्तार अपराधी पूर्णिया और कटिहार के थे। इन शातिरों ने ही यूपी पुलिस को अपराध का तरीका बताया और कहा कि इसके गिरोह का सरगना इस्तार है। जांच आगे बढ़ी तब पता चला कि गिरोह का सरगना चीन और बांग्लादेश के साइबर अपराधियों के भी संपर्क में है। बिहार और जामताड़ा के साइबर अपराधियों को बेचा है मदर बोर्ड अपना फोन बेचने से पहले हमेशा खरीदार का पता और आधार विवरण प्राप्त करें। नए बर्तन या किसी अन्य वस्तु के लालच में मोबाइल नहीं बेचें। बिक्री की तारीख और आईएमईआई नंबर का उल्लेख करते हुए रसीद मांगें। करोड़ों की संपत्ति अर्जित की इस गिरोह के शातिरों ने करोड़ों रुपए की संपत्ति अर्जित की है। लालगंज थाने की पुलिस ने बताया कि एक आरोपी ने कहा कि वह दिहाड़ी मजदूर है और इस्तार के लिए काम करता है। लेकिन जब पुलिस ने उसका खाता चेक किया तो पता चला कि दो साल में 45 लाख का ट्रांजेक्शन हुआ है। उत्तर प्रदेश पुलिस शातिरों की संपत्ति का आकलन करेगी। एसटीएफ और यूपी पुलिस ने कटिहार से मोबाइल दुकानदार इस्तार आलम को गिरफ्तार कर लिया। वह कटिहार के रौतारा के हथिया दियारा का रहने वाला है। उसका गैंग गली-मोहल्ले में घूम-घूमकर नया बर्तन देकर पुराना और खराब हो चुका मोबाइल खरीदता है। जब इनके पास 10-20 हजार मोबाइल जमा हो जाते हैं तो ट्रक से लेकर कटिहार पहुंचते हैं। यहां इस्तार मोबाइल को तोड़कर उनका मदर बोर्ड निकाल लेता है और चीन-बांग्लादेश के साइबर अपराधियों को बेच देता है। साइबर अपराधी इन मोबाइल से डाटा निकालते हैं और उनके यूजर से ठगी करते हैं। इस्तार कटिहार में पुराने मोबाइल का दुकान चलाता है। वह एक साल से विदेशी साइबर अपराधियों के संपर्क में है। वह बिहार-झारखंड के साइबर अपराधियों को भी मोबाइल का मदर बोर्ड उपलब्ध कराता है। चीन, बांग्लादेश के वैसे साइबर अपराधी जो कंबोडिया, मलेशिया, म्यांमार के साइबर स्कैम कंपाउंड में एक्टिव हैं, वे इस्तार और उसके गैंग के संपर्क में रहते हैं। इस्तार ने हैदराबाद, तमिलनाडु, दिल्ली जैसे कई राज्यों में अपने गिरोह को सक्रिय कर रखा है। जांच में यह बात आई है कि इस्तार ने बिहार और जामताड़ा के साइबर अपराधियों को कई बार मदर बोर्ड बेचा है। ऐसे खुला भेद : यूपी पुलिस ने 11605 मोबाइल के साथ 8 लोगों को पकड़ा उत्तरप्रदेश के मिर्जापुर जिले के लालगंज थाने की पुलिस ने 16 मार्च की रात तेंदुई टोल प्लाजा के पास एक ट्रक के साथ आठ लोगों को पकड़ा। ट्रक में 1 करोड़ के 11605 मोबाइल, आठ बाइक जब्त की गई थी। सभी गिरफ्तार अपराधी पूर्णिया और कटिहार के थे। इन शातिरों ने ही यूपी पुलिस को अपराध का तरीका बताया और कहा कि इसके गिरोह का सरगना इस्तार है। जांच आगे बढ़ी तब पता चला कि गिरोह का सरगना चीन और बांग्लादेश के साइबर अपराधियों के भी संपर्क में है। बिहार और जामताड़ा के साइबर अपराधियों को बेचा है मदर बोर्ड अपना फोन बेचने से पहले हमेशा खरीदार का पता और आधार विवरण प्राप्त करें। नए बर्तन या किसी अन्य वस्तु के लालच में मोबाइल नहीं बेचें। बिक्री की तारीख और आईएमईआई नंबर का उल्लेख करते हुए रसीद मांगें। करोड़ों की संपत्ति अर्जित की इस गिरोह के शातिरों ने करोड़ों रुपए की संपत्ति अर्जित की है। लालगंज थाने की पुलिस ने बताया कि एक आरोपी ने कहा कि वह दिहाड़ी मजदूर है और इस्तार के लिए काम करता है। लेकिन जब पुलिस ने उसका खाता चेक किया तो पता चला कि दो साल में 45 लाख का ट्रांजेक्शन हुआ है। उत्तर प्रदेश पुलिस शातिरों की संपत्ति का आकलन करेगी।


