सीन-1 तारीख-8 मार्च 2026। दोपहर का वक्त। JDU दफ्तर में सारी तैयारियां पूरी कर ली गई थी। निशांत कुमार के नाम से पार्टी सदस्यता की रसीद काट दी गई थी। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने जैसे ही उन्हें पटका पहनाया, निशांत उनका पैर छूने के लिए झुक गए। सीन-2 तारीख-5 मार्च 2026। समय दोपहर 2.30 बजे। CM नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए अपना नॉमिनेशन करा चुके थे। इस नॉमिनेशन में शामिल होने आए देश के गृह मंत्री अमित शाह पटना से दिल्ली लौट रहे थे। इस बीच सूचना आई कि उनके स्पेशल चार्टर में बिहार के एक और सीनियर लीडर दिल्ली जाएंगे। उनका नाम था नीतीश के करीबी और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह। इस 2 सीन से जो चीज समझ आ रही है कि नीतीश कुमार को बिहार से दिल्ली ले जाने और उनके बेटे निशांत को सियासत में लांच करने की स्क्रिप्ट अमित शाह, ललन सिंह और संजय झा ने लिखी। हालांकि, पर्दे के पीछे कई और किरदार हैं, जिन्होंने बिहार की सियासत के इस उलटफेर में अपनी अहम भूमिका निभाई है। उन 5 किरदारों को जानिए, जिन्होंने राजनीति की इस पावर शिफ्टिंग में अहम भूमिका निभाई। 1. अमित शाह ने मोदी और नीतीश के साथ पूरी डील कराई 20 नवंबर 2025 से लेकर 5 मार्च यानी कुल 105 दिन के बीच नीतीश के CM बनने से लेकर राज्यसभा तक पहुंचाने के पीछे जिस शख्स की सबसे बड़ी भूमिका है, वो नाम है अमित शाह। इस पूरे ‘ऑपरेशन ट्रांजिशन’ के सबसे बड़े शिल्पकार भी इन्हें बताया जा रहा है। 2. ललन सिंह ने शाह के साथ हर जरूरी मुद्दे पर डील की नीतीश कुमार ने अब तक जितने भी बड़े रणनीतिक फैसले लिए हैं, उसमें ललन सिंह की सहमति जरूर रही है। यह वे नेता हैं, जो नीतीश कुमार के संघर्ष से शिखर तक पहुंचने में साथ रहे हैं। 3. संजय झा JDU और BJP के बीच ब्रिज बने संजय झा नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद सिपाही माने जाते हैं। वे फिलहाल JDU के वर्किंग प्रेसिडेंट हैं। इस डील का सबसे बड़ा ‘ब्रिज’ (Bridge) इन्हें माना जा रहा है। वे दिल्ली और पटना के बीच संवाद की कड़ी थे। 4. नीतीश कुमार को मनाने में विजय चौधरी ने निभाई भूमिका मौजूदा समय में विजय चौधरी सरकार में नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद चेहरा हैं। इन्हें पार्टी के रणनीतिकार के तौर पर माना जाता है। यही कारण है कि नीतीश कुमार जहां भी जाते हैं, ये उनके साथ साए की तरह रहते हैं। 5. आलाकमान के हर निर्णय पर अमल करते रहे सम्राट चौधरी बिहार में अमित शाह ने जिस एक चेहरे को पूरी मजबूती के साथ नीतीश कुमार के पीछे लगाए रखा वो हैं डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी। नीतीश कुमार जहां भी गए सम्राट उनके साथ बतौर डिप्टी लगे रहे। सीन-1 तारीख-8 मार्च 2026। दोपहर का वक्त। JDU दफ्तर में सारी तैयारियां पूरी कर ली गई थी। निशांत कुमार के नाम से पार्टी सदस्यता की रसीद काट दी गई थी। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने जैसे ही उन्हें पटका पहनाया, निशांत उनका पैर छूने के लिए झुक गए। सीन-2 तारीख-5 मार्च 2026। समय दोपहर 2.30 बजे। CM नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए अपना नॉमिनेशन करा चुके थे। इस नॉमिनेशन में शामिल होने आए देश के गृह मंत्री अमित शाह पटना से दिल्ली लौट रहे थे। इस बीच सूचना आई कि उनके स्पेशल चार्टर में बिहार के एक और सीनियर लीडर दिल्ली जाएंगे। उनका नाम था नीतीश के करीबी और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह। इस 2 सीन से जो चीज समझ आ रही है कि नीतीश कुमार को बिहार से दिल्ली ले जाने और उनके बेटे निशांत को सियासत में लांच करने की स्क्रिप्ट अमित शाह, ललन सिंह और संजय झा ने लिखी। हालांकि, पर्दे के पीछे कई और किरदार हैं, जिन्होंने बिहार की सियासत के इस उलटफेर में अपनी अहम भूमिका निभाई है। उन 5 किरदारों को जानिए, जिन्होंने राजनीति की इस पावर शिफ्टिंग में अहम भूमिका निभाई। 1. अमित शाह ने मोदी और नीतीश के साथ पूरी डील कराई 20 नवंबर 2025 से लेकर 5 मार्च यानी कुल 105 दिन के बीच नीतीश के CM बनने से लेकर राज्यसभा तक पहुंचाने के पीछे जिस शख्स की सबसे बड़ी भूमिका है, वो नाम है अमित शाह। इस पूरे ‘ऑपरेशन ट्रांजिशन’ के सबसे बड़े शिल्पकार भी इन्हें बताया जा रहा है। 2. ललन सिंह ने शाह के साथ हर जरूरी मुद्दे पर डील की नीतीश कुमार ने अब तक जितने भी बड़े रणनीतिक फैसले लिए हैं, उसमें ललन सिंह की सहमति जरूर रही है। यह वे नेता हैं, जो नीतीश कुमार के संघर्ष से शिखर तक पहुंचने में साथ रहे हैं। 3. संजय झा JDU और BJP के बीच ब्रिज बने संजय झा नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद सिपाही माने जाते हैं। वे फिलहाल JDU के वर्किंग प्रेसिडेंट हैं। इस डील का सबसे बड़ा ‘ब्रिज’ (Bridge) इन्हें माना जा रहा है। वे दिल्ली और पटना के बीच संवाद की कड़ी थे। 4. नीतीश कुमार को मनाने में विजय चौधरी ने निभाई भूमिका मौजूदा समय में विजय चौधरी सरकार में नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद चेहरा हैं। इन्हें पार्टी के रणनीतिकार के तौर पर माना जाता है। यही कारण है कि नीतीश कुमार जहां भी जाते हैं, ये उनके साथ साए की तरह रहते हैं। 5. आलाकमान के हर निर्णय पर अमल करते रहे सम्राट चौधरी बिहार में अमित शाह ने जिस एक चेहरे को पूरी मजबूती के साथ नीतीश कुमार के पीछे लगाए रखा वो हैं डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी। नीतीश कुमार जहां भी गए सम्राट उनके साथ बतौर डिप्टी लगे रहे।


