नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही का एक और मामला सामने आया है। युवराज से करीब 10 महीने पहले भी इसी तरह की लापरवाही के चलते स्टेशन मास्टर भरत भाटी की जान चली गई थी। उनकी कार एक ब्लैक स्पॉट पर नाले में गिर गई थी। दिल्ली के मंडावली निवासी भरत भाटी रेलवे में स्टेशन मास्टर थे। वह 1 मार्च 2024 को दोपहर करीब 3 बजे फरुखनगर से ग्रेटर नोएडा के रामपुर स्थित अपने पैतृक गांव में एक शादी समारोह में शामिल होने जा रहे थे। रास्ते में जब वह सेक्टर पी-4 पहुंचे, तो वहां एक यू-टर्न था। आगे का रास्ता बंद था और ठीक सामने गहरा नाला मौजूद था। उस स्थान पर न तो कोई बैरिकेडिंग की गई थी और न ही रिफ्लेक्टर या दिशा-सूचक लगाए गए थे। इसी कारण भरत भाटी की कार सीधे नाले में जा गिरी और वह वाहन समेत डूब गए। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों की मदद से भरत भाटी को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। बाद में जांच में सामने आया कि यह हादसा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की गंभीर लापरवाही के कारण हुआ, क्योंकि खतरनाक स्थान पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए थे। हादसे के बाद बीटा-2 थाना पुलिस ने अस्थायी तौर पर वहां बैरिकेडिंग कराई थी, लेकिन प्राधिकरण ने स्थायी समाधान नहीं किया। कुछ समय बाद रास्ते को बंद तो कर दिया गया, लेकिन चेतावनी बोर्ड और अन्य सुरक्षा उपाय नहीं लगाए गए। अब सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद प्राधिकरण ने उसी क्षेत्र में दिशा-सूचक बोर्ड लगवाए हैं, जिन पर आगे रास्ता बंद होने की सूचना दी गई है। मृतक भरत भाटी के भाई दिलीप भाटी ने बताया कि उनके भाई की मौत भी प्राधिकरण की लापरवाही के कारण हुई थी। उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर कार नाले में गिरी, वहां कोई बैरिकेडिंग या चेतावनी संकेत नहीं था। इस हादसे का सीधा जिम्मेदार ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ही था।


