मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की 22 जनवरी को प्रस्तावित समृद्धि यात्रा को लेकर सीवान जिला मुख्यालय में तैयारियां अपने चरम पर हैं। प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज है और कार्यक्रम स्थलों के साथ-साथ आसपास के इलाकों को दुरुस्त करने का काम युद्धस्तर पर किया जा रहा है। साफ-सफाई, रंग-रोगन, सड़क मरम्मत और सौंदर्यीकरण के नाम पर पूरा क्षेत्र अचानक बदलता नजर आ रहा है। इसी क्रम में राजेन्द्र स्टेडियम में प्रस्तावित जनसंवाद कार्यक्रम से पहले डीएवी कॉलेज ग्राउंड में हेलीपैड निर्माण के लिए स्थल चिह्नित किया गया है। मुख्यमंत्री के आगमन और VIP मूवमेंट को देखते हुए डीएवी कॉलेज से राजेन्द्र स्टेडियम तक की सड़क को दुरुस्त करने का कार्य भी तेजी से किया गया। प्रशासन का तर्क है कि किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने के लिए यह कदम जरूरी है। पहले से पूरी तरह ठीक सड़क को दोबारा पिच किया लेकिन इन तैयारियों के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने आम लोगों के बीच नाराजगी और सवाल खड़े कर दिए हैं। डीएवी मोड़ से राजेन्द्र स्टेडियम जाने वाली सड़क, जो स्थानीय लोगों के मुताबिक पहले से ही पूरी तरह ठीक थी, उसे रातों-रात दोबारा पिच कर दिया गया। लोगों का कहना है कि जब सड़क पहले ही दुरुस्त थी, तब केवल मुख्यमंत्री की गाड़ी गुजरने के लिए दोबारा पिचिंग कराना क्या सरकारी धन का दुरुपयोग नहीं है? स्थानीय नागरिक इसे “दिखावटी विकास” करार दे रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि सिर्फ जहां तक मुख्यमंत्री का काफिला जाना है मात्र उतनी ही दूरी तक सड़कें नई तरीके से पिच की गई है। सरकारी इमारतों और खुद स्टेडियम का भी नए सिरे से रंग-रोगन कराया गया इतना ही नहीं, डीएवी कॉलेज से लेकर राजेन्द्र स्टेडियम तक रास्ते में पड़ने वाली लगभग सभी सरकारी इमारतों और खुद स्टेडियम का भी नए सिरे से रंग-रोगन कराया गया है। इससे पूरा इलाका अचानक चमकता हुआ नजर आने लगा है, मानो सालों से लंबित विकास कार्य एक ही रात में पूरे कर दिए गए हों। बाहर से हरी घास की चादर मंगाकर खाली जमीन पर बिछाई सबसे बड़ा सवाल पंचमंदिरा पोखरा को लेकर उठ रहा है। पिछले वर्ष जल-जीवन-हरियाली योजना के तहत इसके सौंदर्यीकरण के बाद उद्घाटन तो हुआ, लेकिन फिर यह उपेक्षा का शिकार हो गया। पोखरा सूख गया और पार्क वीरान पड़ा रहा। अब मुख्यमंत्री के आगमन से पहले न केवल पोखरे में पानी भरा गया है, बल्कि बाहर से हरी घास की चादर मंगाकर खाली जमीन पर ऐसे बिछाई जा रही है, जैसे वहां प्राकृतिक घास उगी हो। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की 22 जनवरी को प्रस्तावित समृद्धि यात्रा को लेकर सीवान जिला मुख्यालय में तैयारियां अपने चरम पर हैं। प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज है और कार्यक्रम स्थलों के साथ-साथ आसपास के इलाकों को दुरुस्त करने का काम युद्धस्तर पर किया जा रहा है। साफ-सफाई, रंग-रोगन, सड़क मरम्मत और सौंदर्यीकरण के नाम पर पूरा क्षेत्र अचानक बदलता नजर आ रहा है। इसी क्रम में राजेन्द्र स्टेडियम में प्रस्तावित जनसंवाद कार्यक्रम से पहले डीएवी कॉलेज ग्राउंड में हेलीपैड निर्माण के लिए स्थल चिह्नित किया गया है। मुख्यमंत्री के आगमन और VIP मूवमेंट को देखते हुए डीएवी कॉलेज से राजेन्द्र स्टेडियम तक की सड़क को दुरुस्त करने का कार्य भी तेजी से किया गया। प्रशासन का तर्क है कि किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने के लिए यह कदम जरूरी है। पहले से पूरी तरह ठीक सड़क को दोबारा पिच किया लेकिन इन तैयारियों के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने आम लोगों के बीच नाराजगी और सवाल खड़े कर दिए हैं। डीएवी मोड़ से राजेन्द्र स्टेडियम जाने वाली सड़क, जो स्थानीय लोगों के मुताबिक पहले से ही पूरी तरह ठीक थी, उसे रातों-रात दोबारा पिच कर दिया गया। लोगों का कहना है कि जब सड़क पहले ही दुरुस्त थी, तब केवल मुख्यमंत्री की गाड़ी गुजरने के लिए दोबारा पिचिंग कराना क्या सरकारी धन का दुरुपयोग नहीं है? स्थानीय नागरिक इसे “दिखावटी विकास” करार दे रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि सिर्फ जहां तक मुख्यमंत्री का काफिला जाना है मात्र उतनी ही दूरी तक सड़कें नई तरीके से पिच की गई है। सरकारी इमारतों और खुद स्टेडियम का भी नए सिरे से रंग-रोगन कराया गया इतना ही नहीं, डीएवी कॉलेज से लेकर राजेन्द्र स्टेडियम तक रास्ते में पड़ने वाली लगभग सभी सरकारी इमारतों और खुद स्टेडियम का भी नए सिरे से रंग-रोगन कराया गया है। इससे पूरा इलाका अचानक चमकता हुआ नजर आने लगा है, मानो सालों से लंबित विकास कार्य एक ही रात में पूरे कर दिए गए हों। बाहर से हरी घास की चादर मंगाकर खाली जमीन पर बिछाई सबसे बड़ा सवाल पंचमंदिरा पोखरा को लेकर उठ रहा है। पिछले वर्ष जल-जीवन-हरियाली योजना के तहत इसके सौंदर्यीकरण के बाद उद्घाटन तो हुआ, लेकिन फिर यह उपेक्षा का शिकार हो गया। पोखरा सूख गया और पार्क वीरान पड़ा रहा। अब मुख्यमंत्री के आगमन से पहले न केवल पोखरे में पानी भरा गया है, बल्कि बाहर से हरी घास की चादर मंगाकर खाली जमीन पर ऐसे बिछाई जा रही है, जैसे वहां प्राकृतिक घास उगी हो।


