पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) बेड के अभाव में 3 दिन के नवजात बच्चे की मौत हो गई। आरोप है कि बच्चे को समय पर इलाज नहीं मिला। बच्चे की मौसी लखीसराय की रेखा कुमारी ने कहा कि नवजात का जन्म 30 मार्च को लखीसराय सदर अस्पताल में हुआ था। 24 घंटे के बाद बच्चे की हालत बिगड़ने लगी। डॉक्टर ने रेफर कर दिया। बच्चे को वेंटिलेटर सपोर्ट सिस्टम वाली एम्बुलेंस से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पटना लेकर आए। वहां भी बेड नहीं था। बच्चे को भर्ती नहीं लिया गया। AIIMS से 1 अप्रैल की अहले सुबह करीब 5 बजे पीएमसीएच पहुंचे। यहां भी हालात अलग नहीं थे। नवजात को शिशु रोग विभाग में भर्ती नहीं किया गया। कारण बेड का अभाव था। बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। घंटों गुहार लगाते रहे, लेकिन किसी ने बात नहीं सुनी। हम लोग हाथ जोड़ते रहे, लेकिन डॉक्टरों का दिल नहीं पसीजा। थक हार कर प्राइवेट अस्पताल गए। वहां 2 घंटे में 51 हजार का बिल बन गया, पर बच्चे की जान नहीं बची। गांव पहुंचते ही बच्चे ने दम तोड़ दिया रेखा कहती हैं कि 51 हजार रुपए निजी अस्पताल में देना हमारे बस की बात नहीं थी। परिवार की आर्थित स्थिति कमजोर है। हमारे लिए बिल देना मुश्किल था। जिसके बाद डायल-112 की पुसिस को खबर दी, तब किसी तरह 15 हजार रुपए में मामला सुलझा। दूसरी तरफ बच्चे की हालत खराब होती जा रही थी। निराश होकर बच्चे मां काजल कुमारी अपने बच्चे को लेकर लखीसराय लौटने लगी। इलाज के लिए दर-दर भटकती के बाद भी राहत नहीं मिली। परिवार ने बच्चे को भगवान भरोसे छोड़ दिया। गांव पहुंचते ही बच्चे ने दम तोड़ दिया।
पहले भी उठते रहे हैं सवाल
यह कोई पहली घटना नहीं है जब पटना के बड़े अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हों। इससे पहले भी कई बार मरीजों को बेड नहीं मिलने, इलाज में देरी और रेफरल के नाम पर इधर-उधर भटकाने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। पीएमसीएच में नवजात बच्चे के लिए बेहतर व्यवस्था है- अधीक्षक पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल अधीक्षक राजीव कुमार सिंह ने कहा कि NICU और PICU मिलाकर 58 बेड उपलब्ध है, चुकी फर्स्ट फेज में इतनी ही व्यवस्था उपलब्ध है। अन्य सरकारी अस्पतालों के मुकाबले पीएमसीएच में नवजात बच्चे के लिए बेहतर व्यवस्था है। आने वाले समय में इसे और भी प्रभावी बनाने की दिशा में कारगर कदम उठाए जा रहे हैं, 2 फेज में जल्द ही बेड की संख्या को और भी बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) बेड के अभाव में 3 दिन के नवजात बच्चे की मौत हो गई। आरोप है कि बच्चे को समय पर इलाज नहीं मिला। बच्चे की मौसी लखीसराय की रेखा कुमारी ने कहा कि नवजात का जन्म 30 मार्च को लखीसराय सदर अस्पताल में हुआ था। 24 घंटे के बाद बच्चे की हालत बिगड़ने लगी। डॉक्टर ने रेफर कर दिया। बच्चे को वेंटिलेटर सपोर्ट सिस्टम वाली एम्बुलेंस से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पटना लेकर आए। वहां भी बेड नहीं था। बच्चे को भर्ती नहीं लिया गया। AIIMS से 1 अप्रैल की अहले सुबह करीब 5 बजे पीएमसीएच पहुंचे। यहां भी हालात अलग नहीं थे। नवजात को शिशु रोग विभाग में भर्ती नहीं किया गया। कारण बेड का अभाव था। बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। घंटों गुहार लगाते रहे, लेकिन किसी ने बात नहीं सुनी। हम लोग हाथ जोड़ते रहे, लेकिन डॉक्टरों का दिल नहीं पसीजा। थक हार कर प्राइवेट अस्पताल गए। वहां 2 घंटे में 51 हजार का बिल बन गया, पर बच्चे की जान नहीं बची। गांव पहुंचते ही बच्चे ने दम तोड़ दिया रेखा कहती हैं कि 51 हजार रुपए निजी अस्पताल में देना हमारे बस की बात नहीं थी। परिवार की आर्थित स्थिति कमजोर है। हमारे लिए बिल देना मुश्किल था। जिसके बाद डायल-112 की पुसिस को खबर दी, तब किसी तरह 15 हजार रुपए में मामला सुलझा। दूसरी तरफ बच्चे की हालत खराब होती जा रही थी। निराश होकर बच्चे मां काजल कुमारी अपने बच्चे को लेकर लखीसराय लौटने लगी। इलाज के लिए दर-दर भटकती के बाद भी राहत नहीं मिली। परिवार ने बच्चे को भगवान भरोसे छोड़ दिया। गांव पहुंचते ही बच्चे ने दम तोड़ दिया।
पहले भी उठते रहे हैं सवाल
यह कोई पहली घटना नहीं है जब पटना के बड़े अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हों। इससे पहले भी कई बार मरीजों को बेड नहीं मिलने, इलाज में देरी और रेफरल के नाम पर इधर-उधर भटकाने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। पीएमसीएच में नवजात बच्चे के लिए बेहतर व्यवस्था है- अधीक्षक पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल अधीक्षक राजीव कुमार सिंह ने कहा कि NICU और PICU मिलाकर 58 बेड उपलब्ध है, चुकी फर्स्ट फेज में इतनी ही व्यवस्था उपलब्ध है। अन्य सरकारी अस्पतालों के मुकाबले पीएमसीएच में नवजात बच्चे के लिए बेहतर व्यवस्था है। आने वाले समय में इसे और भी प्रभावी बनाने की दिशा में कारगर कदम उठाए जा रहे हैं, 2 फेज में जल्द ही बेड की संख्या को और भी बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।


