‘आपनों के लिए मेहरबान, दूसरों को फ़रमान…’ शायरी में लिपटा अखिलेश का सियासी वार, इशारा किस ओर

‘आपनों के लिए मेहरबान, दूसरों को फ़रमान…’ शायरी में लिपटा अखिलेश का सियासी वार, इशारा किस ओर

UP Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीति गरमा गई है। बीजेपी के अंदर जातीय समीकरणों को लेकर हलचल तेज हो गई है। ब्राह्मण और ठाकुर विधायकों की अलग-अलग बैठकों ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है। पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं, साथ ही पार्टियों के अंदर भी कलह दिख रहा है।

ब्राह्मण विधायकों की बैठक और विवाद

23 दिसंबर 2025 को लखनऊ में कुशीनगर के बीजेपी विधायक पीएन पाठक के घर पर ब्राह्मण विधायकों की बड़ी बैठक हुई। इसमें बीजेपी के कई ब्राह्मण विधायक और एमएलसी शामिल हुए। इसे ‘सहभोज’ कहा गया, लेकिन चर्चा है कि इस बैठक में ब्राह्मण समाज के मुद्दों, एकजुटता और पार्टी में हिस्सेदारी पर हुई। कुछ विधायकों ने कहा कि यह समाज को मजबूत बनाने और विकास की बातों के लिए थी। हालांकि, इस बैठक ने विवाद पैदा कर दिया। यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सख्ती दिखाई और कहा कि जाति के आधार पर ऐसी बैठकें पार्टी के सिद्धांतों के खिलाफ हैं। उन्होंने विधायकों को चेतावनी दी कि आगे ऐसा न हो, वरना अनुशासनहीनता मानी जाएगी। पार्टी का कहना है कि बीजेपी सर्वस्पर्शी राजनीति करती है, जाति आधारित गतिविधियां गलत संदेश देती हैं।

विपक्ष का हमला

समाजवादी पार्टी के नेता इस मौके को भुना रहे हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 26 दिसंबर को एक ट्वीट किया: “अपनों की महफिल सजे तो जनाब मेहरबान और दूसरों को भेज रहे चेतावनी का फरमान।” हालांकि नाम नहीं लिया, लेकिन माना जा रहा है कि यह योगी आदित्यनाथ पर तंज था। मतलब साफ है कि अपनों (ठाकुरों) की बैठक पर कोई ऐतराज नहीं, लेकिन दूसरों (ब्राह्मणों) पर सख्ती।

ठाकुरों की बैठक से तुलना
इससे पहले, विधानसभा के मानसून सत्र में ठाकुर विधायकों की ‘कुटुंब परिवार’ नाम से बैठक हुई थी। इसमें भीठाकुर विधायक शामिल थे और इसे पारिवारिक मिलन बताया गया। उस समय कोई बड़ा विवाद नहीं हुआ। अब ब्राह्मण बैठक पर सख्ती को लेकर विपक्ष हमलावर है। वे इसे ठाकुर बनाम ब्राह्मण की राजनीति बता रहे हैं। कहा जा रहा है कि ठाकुरों (जिनसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आते हैं) की बैठक पर कोई एक्शन नहीं लिया गया, लेकिन ब्राह्मणों की बैठक पर चेतावनी जारी हो गई।

इससे पहले, अखिलेश के चाचा और सपा नेता शिवपाल यादव ने कहा कि अगर बीजेपी में ब्राह्मणों को सम्मान नहीं मिल रहा, तो वे सपा में आएं। यहां उन्हें पूरा सम्मान मिलेगा। विपक्ष का आरोप है कि योगी सरकार में ब्राह्मणों की अनदेखी हो रही है और ठाकुरों को तरजीह दी जा रही है।

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