लखनऊ के गोमती नगर स्थित संगीत नाटक अकादमी के मुक्ताकाशी मंच पर रविवार को लोकनिर्मला सम्मान समारोह – सप्तम पुष्प 2026 का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राजस्थान की प्रसिद्ध मांड, भजन और लोक गायिका बतूल बेगम को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में संस्था की सचिव और लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने कहा कि लोकसंगीत हमारी संस्कृति की आत्मा है। इसे सहेजकर रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि लोक कलाकारों को सम्मान और प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से इस सम्मान की शुरुआत की गई है। मनमोहक प्रस्तुति दी इस अवसर पर मालिनी अवस्थी और उनकी टीम ने भजन और होली गीतों की मनमोहक प्रस्तुति दी। उन्होंने अपने लोकप्रिय गीत ‘रंग डारूंगी आज तोरे अंगना’, ‘होली खेलें रघुवीरा अवध में’, ‘नदिया बहती जाए रे’ और ‘चलो मन गंगा जमुना तीरे’ गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। समारोह में विद्या बिंदु सिंह (अध्यक्ष, सोन चिरैया संस्था), भातखंडे संस्कृत विश्वविद्यालय की कुलपति मांडवी सिंह और मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। 1 लाख रुपये नकद देकर सम्मानित किया गया सोनचिरैया संस्थान द्वारा दिया जाने वाला यह सम्मान हर वर्ष लोककला और लोकसंस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिला कलाकारों को प्रदान किया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2020 में मालिनी अवस्थी ने अपनी माता निर्मला अवस्थी की स्मृति में की थी।सम्मान के तहत कलाकार को 1 लाख रुपये नकद, शॉल और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है। वर्ष 2026 का सातवां लोकनिर्मला सम्मान राजस्थान की मशहूर लोकगायिका बतूल बेगम को लोकसंगीत में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया।


