Barmer Student Suicide Case: राजस्थान में एक बार फिर परीक्षा परिणाम का दबाव एक परिवार के लिए असहनीय त्रासदी बन गया। बाड़मेर जिले में रहने वाली 12वीं कक्षा की एक छात्रा ने अपेक्षा से कम अंक आने के बाद ऐसा कदम उठा लिया, जिससे पूरे परिवार की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई। घटना उस समय सामने आई जब छात्रा की मां घर पहुंची और काफी देर तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर कमरे का दरवाजा खोला। अंदर का दृश्य देखकर वह सन्न रह गई,बेटी फंदे पर लटकी हुई थी। मां के शोर मचाने पर परिवार के अन्य सदस्य भी मौके पर पहुंचे और तुरंत उसे नीचे उतारकर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मामला बाड़मेर जिले के कोतवाली इलाके का है।
पुलिस के अनुसार छात्रा भावना के पिता ने इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज करवाई है। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पिता जो पेशे से टैंपो चालक हैं, ने बताया कि उनकी बेटी पढ़ाई में अच्छी थी और हमेशा बेहतर करने की कोशिश करती थी।
उन्होंने बताया कि 10वीं कक्षा में अच्छे अंक आने के बाद बेटी का आत्मविश्वास काफी बढ़ गया था। 12वीं के लिए उसने खुद ही 95 प्रतिशत से अधिक अंक लाने का लक्ष्य तय किया था। लेकिन जब परिणाम आया, तो उसे 88 प्रतिशत अंक मिले। हालांकि यह प्रदर्शन भी अच्छा माना जाता है, लेकिन छात्रा इसे अपनी उम्मीदों से कम मानकर मानसिक रूप से टूट गई।
परिवार के अनुसार रिजल्ट आने के बाद से ही वह चुप रहने लगी थी और तनाव में नजर आ रही थी। पिता ने उसे समझाने की कोशिश की कि आगे और बेहतर अवसर मिलेंगे, लेकिन वह इस सदमे से उबर नहीं पाई।
यह घटना न केवल एक परिवार का दर्द है, बल्कि समाज के लिए भी एक बड़ा संदेश है। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा परिणाम को लेकर बढ़ता दबाव बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहा है। ऐसे में अभिभावकों और शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को नंबरों से ज्यादा उनके प्रयासों और मानसिक संतुलन को महत्व दें। यह हादसा याद दिलाता है कि सफलता केवल अंकों से नहीं मापी जाती, बल्कि जीवन की अहमियत उससे कहीं ज्यादा है।


