लखनऊ के पारा इलाके में स्थित (बीओबी) की शाखा में हुए 13 करोड़ रुपए के फर्जीवाड़े मामले में पुलिस ने तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले मुख्य आरोपी बैंक मित्र शिवा और साजिशकर्ता पूर्व सिक्योरिटी गार्ड दीपक को जेल भेजा जा चुका है। इंस्पेक्टर सुरेश सिंह के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों में काकोरी के नरौना निवासी विकास कुमार, तालकटोरा के सरीपुरा की भाग्यवती राव और कारा निर्मला शामिल हैं। भाग्यवती शिवा की पत्नी, कारा निर्मला उसकी मां और विकास उसका नौकर बताया जा रहा है। शकुंतला मिश्रा यूनिवर्सिटी परिसर की शाखा से खुला खेल पारा के मोहन रोड स्थित परिसर में संचालित बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा में शिवा बैंक मित्र के तौर पर तैनात था। आरोप है कि उसने करीब सौ ग्राहकों से एफडी कराने के नाम पर रकम ऐंठ ली। पूरे घोटाले की रकम लगभग 13 करोड़ रुपए बताई जा रही है। तीनों खातों में 12 करोड़ का लेनदेन जांच में सामने आया कि गिरफ्तार तीनों आरोपियों के खातों में करीब 12 करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन हुआ। शिवा ने ठगी की रकम में से करीब डेढ़ करोड़ रुपए अपने नौकर विकास के खाते में ट्रांसफर किए। इतना ही नहीं, ठगी के पैसों से नौकर के लिए कार भी खरीदी गई। बैंक अधिकारियों की भूमिका पर शक पुलिस का कहना है कि इतनी बड़ी रकम का फर्जीवाड़ा अकेले संभव नहीं है। ऐसे में कुछ बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है। जांच के दायरे में अन्य खाताधारकों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। गहने, कार और फर्जी रसीदों का सामान बरामद पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब ढाई लाख रुपए के जेवर, एक कार, चांदी के सिक्के, तीन मोबाइल, एक लैपटॉप, प्रिंटर और 47 हजार रुपए नकद बरामद किए हैं। इसी प्रिंटर से एफडी की फर्जी रसीदें तैयार कर ग्राहकों को दी जाती थीं। ठगी की रकम गहनों, बिजली उपकरणों और संपत्तियों में भी खपाई गई। साक्ष्य मिटाने को बैंक में लगी थी आग? इसी शाखा में 25 नवंबर 2025 को संदिग्ध परिस्थितियों में भीषण आग लग गई थी, जिसमें कई दस्तावेज जलकर राख हो गए थे। पीड़ित ग्राहकों ने आरोप लगाया था कि फर्जीवाड़े को छिपाने और सबूत मिटाने के लिए आग लगाई गई। आग के कारण बैंक के महत्वपूर्ण रिकॉर्ड नष्ट हो गए थे। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है। आने वाले दिनों में बैंक के अंदरूनी लोगों पर भी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।


