हिंसा के साये में बंग्लादेश, मतदान से पहले, खेल करने कि कोशिश में युनूस, BNP ने मांगी माफी

हिंसा के साये में बंग्लादेश, मतदान से पहले, खेल करने कि कोशिश में युनूस, BNP ने मांगी माफी

बांग्लादेश में गुरुवार को 300 संसदीय सीटों के लिए होने वाले 13वें आम चुनाव के लिए सोमवार को चुनाव प्रचार थम गया। हिंसा, अराजकता और अल्पसंख्यकों में भारी डर के माहौल बीच हो रहा बांग्लादेश का यह चुनावों दो कारणों से ऐतिहासिक माना जा रहा है। बांग्लादेश के इतिहास में यह पहला मौका है जबकि पूर्व पीएम शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी गई है। देश की अंतरिम सरकार ने सत्ता से बेदखल अवामी लीग की राजनीतिक गतिविधियों पर पाबंदी लगा दी है। इसके साथ ही चुनाव आयोग ने पार्टी का पंजीकरण भी रद्द कर दिया है।

इसके पहले जब भी बांग्लादेश में अवामी लीग ने चुनावों का बहिष्कार किया है, नई सरकार अस्थिरता का शिकार रही है। फरवरी 1996 में तो अवामी लीग के बहिष्कार के बीच बनी बांग्लादेश नेशनेलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की भारी बहुमत से बनी सरकार 12 दिनों बाद ही गिर गई थी। ऐसे में चुनावी सर्वेक्षणों में सरकार बनाने की दौड़ में सबसे आगे चल रही बीएनपी की ओर से प्रधानमंत्री पद के दावेदार तारिक रहमान भी डिफेंसिव नजर आ रहे हैं।

रहमान ने टीवी और मीडिया पर एक बयान जारी किया है कि ‘अतीत में आपके समर्थन से बीएनपी ने बांग्लादेश में कई बार शासन किया है। उस दौरान हमसे अनजाने में कुछ गलतियां हुई होंगी। इसके लिए मैं लोगों से दिल से माफी मांगता हूं। साथ ही, मौजूदा चुनाव इसलिए भी ऐतिहासिक है कि इस बार आम चुनावों के साथ संवैधानिक सुधारों को लेकर जनमत संग्रह भी किया जा रहा है।

जेन-z और अवामी लीग के वोटर तय करेंगे चुनाव नतीजा

12 फरवरी को 12.8 करोड़ मतदाता 350 संसदीय सीटों वाली जातीय संसद के लिए मतदान करेंगे। इनमें 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, जिनका चयन 300 सीटों पर सीधे होने वाले चुनावों में जीतने वाली पार्टी को मिलने वाले प्रतिनिधत्व के आधार पर होता है। इसमें बीएनपी 292 सीटों पर और जमात ए इस्लामी 224 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। ये दोनों ही दल दक्षिणपंथी माने जाते हैं, जिसमें जमात को धुर कट्टपंथी पार्टी की तरह देखा जाता है।

वहीं, जमात के गठबंधन में चुनाव लड़ रहे छात्रों के नवगठित दल नेशनल सिटिजन पार्टी को 30 सीटें दी गई हैं। शेष सीटों पर जमात गठबंधन में शामिल अन्य 9 दल चुनाव लड़ रहे हैं। चुनावों में करीब 5.6 करोड़ मतदाता 18 से 37 वर्ग में आते हैं, 4.57 करोड़ ऐसे हैं जो पहली बार मतदान करेंगे। ऐसे में माना जा रहा है कि यही वर्ग चुनावों के परिणामों को तय करने वाला है।

साथ ही यह भी सच है कि अवामी लीग की अनुपस्थिति में उसके परंपरागत मतदाता के सामने विकल्पहीनता की स्थिति है। ऐसे में सर्वे बता रहे हैं कि यह मतदाता जिस भी दल के साथ जाएगा, उसी दल की सरकार बनेगी। माना जा रहा है कि तारिक रहमान ने चुनावों से ठीक पहले माफी मांग कर मतदाता के इस वर्ग में पैठ बनाने की कोशिश की है।

चुनावों से ठीक पहले हिंसाः हिंदू समेत दो की मौत, मतदान केंद्रों में आग

चूनावों से दो दिन पहले बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले के त्रिशाल उपजिला में अज्ञात हमलावरों ने एक 62 वर्षीय हिंदू व्यापारी की उसकी दुकान के अंदर ही धारदार हथियारों से काटकर हत्या कर दी। वहीं, पुलिस ने मंगलवार को राजधानी ढाका के नेशनल प्रेस क्लब में स्थित पुरुषों के वॉशरूम से वरिष्ठ पत्रकार अली महमूद का शव बरामद किया।

पत्रकार महमूद, बीएनपी के मीडिया सेल के सदस्य भी थे। उधर, नेत्रकोना में तीन मतदान केंद्रों को आग के हवाले कर दिया गया। गौरतलब है कि बांग्लादेश पुलिस ने 13वें संसदीय चुनाव के लिए लगभग 24000 मतदान केंद्रों को उच्च या मध्यम जोखिम वाले केंद्रों के रूप में चिह्नित किया है, जो कुल 42779 मतदान केंद्रों का लगभग आधा है।

चुनावी मुद्दा सर्वेक्षणः समावेशी नहीं यह चुनाव

हालिया किए गए सर्वेक्षणों के अनुसार, चुनावों में मुख्य मुद्दे भ्रष्टाचार, महंगाई, आर्थिक विकास, रोजगार और अवामी लीग पार्टी पर प्रतिबंध हैं। ढाका स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर पॉलिसी डायलॉग (सीपीडी) के अनुसंधान निदेशक खोंडाकर गुलाम मोअज़्ज़म ने कहा है कि एक अध्यादेश के जरिए अवामी लीग पर चुनावी प्रतिबंध को देखते हुए राष्ट्रीय चुनाव को सही मायने में समावेशी नहीं कहा जा सकता है। उन्होंने संरचनात्मक कमजोरियों का हवाला देते हुए जनमत संग्रह की विश्वसनीयता से जुड़ी संभावित समस्याओं के बारे में भी चेतावनी दी।

यूनुस ने किया चुनाव आयोग के निर्देशों का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन

उधर चुनाव की पूर्व संध्या पर अंतरिम सरकार के मुखिया मुहम्मद यूनुस ने लोगों से अपील की है कि वे नया बांग्लादेश बनाने के लिए जनमत संग्रह के समर्थन में मतदान करें। यूनुस की अपील चुनाव आयोग के निर्देशों का सीधा उल्लंघन है, जिसने कहा है कि सरकारी अधिकारी जनमत संग्रह में भाग लेने के लिए तो अपील कर सकते हैं, पर समर्थन में या विरोध में मतदान करने की अपील चुनाव संहिता का उल्लंघन माना जाएगा।

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