Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश की राजनीति में एक नया और दिलचस्प मोड़ आ गया है। देश के आगामी आम चुनावों (Bangladesh Election 2026 ) की आहट के बीच मुख्य विपक्षी दल ‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी’ (BNP) ने एक ऐसा दांव चला है, जिसे कूटनीतिक भाषा में “सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे” वाली रणनीति कहा जा रहा है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने साफ कर दिया है कि वह पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को वापस बांग्लादेश लाना चाहती है, लेकिन साथ ही भारत के साथ अपने रिश्तों में कोई खटास भी नहीं चाहती।
हसीना की वापसी क्यों चाहती है BNP? (Mirza Fakhrul Islam Alamgir)
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने हाल ही में अपने बयानों में यह स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी शेख हसीना (Sheikh Hasina Return)की भारत से वापसी चाहती है। उनका तर्क है कि हसीना के शासनकाल में हुए मानवाधिकार हनन और अन्य कथित अपराधों के लिए उन पर बांग्लादेश की अदालत में मुकदमा चलाना चाहिए। पार्टी का मानना है कि जब तक हसीना को कानून के कठघरे में खड़ा नहीं किया जाता, तब तक ‘इंसाफ’ पूरा नहीं होगा। यह मुद्दा घरेलू वोट बैंक को साधने के लिए बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) का सबसे बड़ा हथियार है।
भारत से दोस्ती क्यों है मजबूरी ? (BNP Strategy India)
आमतौर पर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को भारत विरोधी राजनीति के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन 2026 के चुनाव से पहले उनके सुर बदले हुए हैं। मिर्जा फखरुल ने कहा है कि हसीना के प्रत्यर्पण (Extradition) की मांग का भारत और बांग्लादेश के द्विपक्षीय संबंधों पर असर नहीं पड़ना चाहिए।
बीएनपी की कूटनीतिक चाल (India Bangladesh Relations)
बीएनपी अब एक परिपक्व कूटनीतिक चाल चल रही है। वे जानते हैं कि भारत उनका सबसे बड़ा और प्रभावशाली पड़ोसी है। भारत के साथ दुश्मनी मोल लेकर ढाका में स्थिर सरकार चलाना मुश्किल है। इसलिए, पार्टी ने “व्यक्ति और देश” को अलग करने की नीति अपनाई है। उनका संदेश साफ़ है-“हमारा झगड़ा शेख हसीना से है, भारत से नहीं।”
पिछली गलतियों से सबक सीखना है ?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीएनपी अपनी पुरानी गलतियों से सबक सीख रही है। अतीत में भारत विरोधी रुख अपनाने के कारण उन्हें कूटनीतिक अलगाव झेलना पड़ा था। इसलिए अब वे चाहते हैं कि अगर 2026 में उनकी सरकार बनती है, तो नई दिल्ली के साथ उनके रिश्ते वैसे ही सामान्य रहें, जैसे किसी भी पड़ोसी मुल्क के साथ होते हैं। वे भारत को यह भरोसा दिलाना चाहते हैं कि बीएनपी की सरकार आने पर भारत की सुरक्षा चिंताओं का भी ध्यान रखा जाएगा।
बीएनपी का डबल गेम
बहरहाल, BNP “बेस्ट ऑफ बोथ वर्ल्ड्स” (दोनों हाथों में लड्डू) वाली स्थिति चाहती है। एक तरफ शेख हसीना के खिलाफ माहौल बनाकर चुनाव जीतना, और दूसरी तरफ भारत के साथ अच्छे रिश्ते रख कर अपनी अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता बढ़ाना। अब देखना यह है कि भारत इस “डबल गेम” पर क्या रुख अपनाता है।
भारत की सतर्कता बहुत महत्वपूर्ण
भारतीय विदेश मंत्रालय इस मामले पर बेहद नपी-तुली प्रतिक्रिया दे रहा है। भारत का हमेशा से यह स्टैंड रहा है कि वह बांग्लादेश की जनता के साथ है, न कि किसी एक पार्टी के साथ। हालांकि, शेख हसीना की सुरक्षा और प्रत्यर्पण का मुद्दा भारत के लिए कूटनीतिक सिरदर्द बन सकता है। भारत कभी भी अपने पुराने मित्र को संकट में अकेला नहीं छोड़ना चाहेगा, वहीं नए समीकरणों को भी पूरी तरह नकारना मुश्किल होगा।
भारत के साथ प्रत्यर्पण संधि (Extradition Treaty)
क्या बांग्लादेश की अंतरिम सरकार या भविष्य की BNP सरकार आधिकारिक तौर पर भारत से प्रत्यर्पण संधि के तहत हसीना की मांग करेगी?
वीजा और व्यापार: क्या BNP के इस रुख के बाद भारत-बांग्लादेश के बीच रुक चुके वीजा ऑपरेशन्स और व्यापारिक समझौतों में तेजी आएगी?
आवामी लीग का पलटवार: शेख हसीना और उनकी पार्टी इस रणनीति का जवाब कैसे देती है?
चीन की नजर और आर्थिक समीकरण
बीएनपी के भारत प्रेम के पीछे एक आर्थिक मजबूरी भी है। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था इस वक्त नाजुक दौर में है। वह आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के लिए भारत पर निर्भर है। अगर भारत से रिश्ते बिगड़ते हैं, तो महंगाई बेकाबू हो सकती है, जो किसी भी नई सरकार के लिए बुरा संकेत होगा। वहीं, चीन भी इस मौके की ताक में है कि अगर भारत और बीएनपी के बीच बात न बने, तो वह ढाका में अपना प्रभाव बढ़ा सके। इसलिए बीएनपी चीन और भारत दोनों को साध कर चलना (Balancing Act) चाहती है।


