सहरसा में बाणेश्वर महोत्सव का शुभारंभ:इंडियन आइडल के कलाकारों ने दी प्रस्तुति, नेपाल के कलाकारो ने शिव झांकी से बांधा समां

सहरसा के कहरा प्रखंड स्थित देवना गांव के ऐतिहासिक बाबा बाणेश्वर मंदिर परिसर में बुधवार को बाणेश्वर महोत्सव का शुभारंभ धूमधाम के साथ किया गया। कला, संस्कृति एवं युवा विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव का उद्घाटन दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन जिलाधिकारी दीपेश कुमार, उप विकास आयुक्त गौरव कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी सदर श्रेयांश तिवारी, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी स्नेहा कुमारी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से किया। महोत्सव की शुरुआत होते ही मंदिर परिसर श्रद्धालुओं और दर्शकों से पूरी तरह भर गया। ग्रामीणों से लेकर आस-पास के जिलों से आए लोगों की भारी भीड़ ने इस आयोजन को और भी जीवंत बना दिया। प्रशासन द्वारा की गई तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था के कारण कार्यक्रम बिना किसी व्यवधान के सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। नेपाल के कलाकारों ने शिव झांकी से बांधा समां सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत नेपाल से आए कलाकारों की प्रस्तुति से हुई। कलाकारों ने भगवान शिव की भव्य झांकी नृत्य के माध्यम से ऐसी अद्भुत छटा बिखेरी कि दर्शक मंत्रमुग्ध होकर देर तक तालियां बजाते रहे। पारंपरिक वेशभूषा और विशेष रूप से तैयार किए गए मंच-सज्जा ने प्रस्तुति को और प्रभावशाली बना दिया। इंडियन आइडल फेम की प्रस्तुति ने मोहा दर्शकों का मन इसके बाद कार्यक्रम में इंडियन आइडल फेम गायिका सौम्या मिश्रा ने अपने सुरों से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। धार्मिक भजन से लेकर आधुनिक फ्यूजन गीतों तक, उनकी बहुमुखी प्रस्तुति ने हर वर्ग के दर्शकों को प्रभावित किया। हर गीत पर तालियों की गड़गड़ाहट गूंजती रही। लोकगायक सुरेश पंकज और वेदप्रकाश सिंह ने मिथिला और कोसी-अंचल की लोक विरासत को मंच पर जीवंत कर दिया। ‘विदापत’ पर आधारित कई गीतों और स्थानीय पारंपरिक धुनों ने क्षेत्रीय संस्कृति की अनूठी पहचान को सामने रखा। बाल कलाकार मिष्ठी की प्रस्तुति भी दर्शकों के बीच आकर्षण का केंद्र रही। उनकी आत्मविश्वास भरी प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों को चकित कर दिया। महोत्सव हमारी सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीएम दीपेश कुमार ने कहा कि बाणेश्वर महोत्सव सिर्फ एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की गौरवशाली परंपरा का प्रतिबिंब है। उन्होंने कहा, ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत रखने का माध्यम हैं। साथ ही यह स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान कर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देते हैं। प्रशासन की प्राथमिकता है कि युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति और परंपराओं से मजबूत रूप से जुड़ी रहे। उप विकास आयुक्त गौरव कुमार ने भी महोत्सव की प्रशंसा की और कहा कि इस तरह के आयोजन सामाजिक सदभाव, सांस्कृतिक एकता और क्षेत्रीय पहचान को सुदृढ़ करते हैं। आस्था और संस्कृति का संगम महोत्सव के दौरान पूरे परिसर में मेले जैसा माहौल रहा। श्रद्धालु दिनभर पूजा-अर्चना करते रहे और शाम होते ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में जुट गए। महिलाओं, युवाओं और बच्चों की सहभागिता ने आयोजन को और भी रंगीन बना दिया। बाणेश्वर महोत्सव क्षेत्र की आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। वर्षों से आयोजित यह महोत्सव अब न सिर्फ सहरसा बल्कि आस-पास के जिलों में भी अपनी खास पहचान बना चुका है। इस वर्ष भी कार्यक्रम ने स्थानीय संस्कृति को नई ऊर्जा और नई दिशा देने का कार्य किया है। सफल आयोजन के लिए प्रशासन की सराहना पूरे आयोजन में भीड़ नियंत्रण, पार्किंग, मंचन, प्रकाश व ध्वनि व्यवस्था आदि की प्रशासनिक तैयारी की लोगों ने जमकर सराहना की। स्थानीय लोगों का कहना था कि इस बार महोत्सव का स्तर पिछले वर्षों की तुलना में और भव्य दिखा। सहरसा के कहरा प्रखंड स्थित देवना गांव के ऐतिहासिक बाबा बाणेश्वर मंदिर परिसर में बुधवार को बाणेश्वर महोत्सव का शुभारंभ धूमधाम के साथ किया गया। कला, संस्कृति एवं युवा विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव का उद्घाटन दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन जिलाधिकारी दीपेश कुमार, उप विकास आयुक्त गौरव कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी सदर श्रेयांश तिवारी, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी स्नेहा कुमारी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से किया। महोत्सव की शुरुआत होते ही मंदिर परिसर श्रद्धालुओं और दर्शकों से पूरी तरह भर गया। ग्रामीणों से लेकर आस-पास के जिलों से आए लोगों की भारी भीड़ ने इस आयोजन को और भी जीवंत बना दिया। प्रशासन द्वारा की गई तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था के कारण कार्यक्रम बिना किसी व्यवधान के सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। नेपाल के कलाकारों ने शिव झांकी से बांधा समां सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत नेपाल से आए कलाकारों की प्रस्तुति से हुई। कलाकारों ने भगवान शिव की भव्य झांकी नृत्य के माध्यम से ऐसी अद्भुत छटा बिखेरी कि दर्शक मंत्रमुग्ध होकर देर तक तालियां बजाते रहे। पारंपरिक वेशभूषा और विशेष रूप से तैयार किए गए मंच-सज्जा ने प्रस्तुति को और प्रभावशाली बना दिया। इंडियन आइडल फेम की प्रस्तुति ने मोहा दर्शकों का मन इसके बाद कार्यक्रम में इंडियन आइडल फेम गायिका सौम्या मिश्रा ने अपने सुरों से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। धार्मिक भजन से लेकर आधुनिक फ्यूजन गीतों तक, उनकी बहुमुखी प्रस्तुति ने हर वर्ग के दर्शकों को प्रभावित किया। हर गीत पर तालियों की गड़गड़ाहट गूंजती रही। लोकगायक सुरेश पंकज और वेदप्रकाश सिंह ने मिथिला और कोसी-अंचल की लोक विरासत को मंच पर जीवंत कर दिया। ‘विदापत’ पर आधारित कई गीतों और स्थानीय पारंपरिक धुनों ने क्षेत्रीय संस्कृति की अनूठी पहचान को सामने रखा। बाल कलाकार मिष्ठी की प्रस्तुति भी दर्शकों के बीच आकर्षण का केंद्र रही। उनकी आत्मविश्वास भरी प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों को चकित कर दिया। महोत्सव हमारी सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीएम दीपेश कुमार ने कहा कि बाणेश्वर महोत्सव सिर्फ एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की गौरवशाली परंपरा का प्रतिबिंब है। उन्होंने कहा, ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत रखने का माध्यम हैं। साथ ही यह स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान कर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देते हैं। प्रशासन की प्राथमिकता है कि युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति और परंपराओं से मजबूत रूप से जुड़ी रहे। उप विकास आयुक्त गौरव कुमार ने भी महोत्सव की प्रशंसा की और कहा कि इस तरह के आयोजन सामाजिक सदभाव, सांस्कृतिक एकता और क्षेत्रीय पहचान को सुदृढ़ करते हैं। आस्था और संस्कृति का संगम महोत्सव के दौरान पूरे परिसर में मेले जैसा माहौल रहा। श्रद्धालु दिनभर पूजा-अर्चना करते रहे और शाम होते ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में जुट गए। महिलाओं, युवाओं और बच्चों की सहभागिता ने आयोजन को और भी रंगीन बना दिया। बाणेश्वर महोत्सव क्षेत्र की आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। वर्षों से आयोजित यह महोत्सव अब न सिर्फ सहरसा बल्कि आस-पास के जिलों में भी अपनी खास पहचान बना चुका है। इस वर्ष भी कार्यक्रम ने स्थानीय संस्कृति को नई ऊर्जा और नई दिशा देने का कार्य किया है। सफल आयोजन के लिए प्रशासन की सराहना पूरे आयोजन में भीड़ नियंत्रण, पार्किंग, मंचन, प्रकाश व ध्वनि व्यवस्था आदि की प्रशासनिक तैयारी की लोगों ने जमकर सराहना की। स्थानीय लोगों का कहना था कि इस बार महोत्सव का स्तर पिछले वर्षों की तुलना में और भव्य दिखा।  

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