अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर खगड़िया में केला रेशा (बनाना फाइबर) उत्पादन से जुड़ी महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य ग्रामीण उद्योग को बढ़ावा देना था। जिला पदाधिकारी नवीन कुमार, उप विकास आयुक्त श्वेता भारती, जिला कृषि पदाधिकारी अविनाश कुमार और नाबार्ड की जिला विकास प्रबंधक पूजा भारती ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। एक महीने तक चलेगा प्रशिक्षण कार्यक्रम इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। इस अवसर पर महिलाओं के लिए एक महीने के प्रशिक्षण कार्यक्रम का भी शुभारंभ किया गया। इसमें केला रेशा से बैग, चटाई, फाइल कवर, रस्सी, टोकरी और सजावटी वस्तुओं सहित विभिन्न हस्तशिल्प उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए ऐसी पहलें अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने जोर दिया कि केला रेशा उत्पादन पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ किसानों और महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय का एक मजबूत स्रोत बन सकता है। उत्पादों को बाजार से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास जारी डीएम ने बताया कि खगड़िया जिले में बड़े पैमाने पर केले की खेती होती है, और इसके तनों से निकलने वाले रेशे का उपयोग कर महिलाएं कई प्रकार के उपयोगी उत्पाद तैयार कर सकती हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि जिला प्रशासन महिलाओं को प्रशिक्षण, मशीनों की उपलब्धता और उनके उत्पादों को बाजार से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। जिलाधिकारी ने सुझाव दिया कि यदि महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संगठित होकर काम करें, तो उनके उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने में और अधिक सुविधा होगी। उप विकास आयुक्त श्वेता भारती ने कहा कि महिलाएं आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और क्षमता का प्रदर्शन कर रही हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। केला रेशा उत्पादन जैसे कार्य महिलाओं को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार उपलब्ध कराते हैं, जिससे वे परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भी बनती हैं। रेशा से बनाई जाएगी वस्तुएं वहीं जिला कृषि पदाधिकारी अविनाश कुमार ने कहा कि केला रेशा उत्पादन कृषि आधारित उद्योग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। पहले केले के तने को खेतों में बेकार समझकर छोड़ दिया जाता था, लेकिन अब उसी से मूल्यवान रेशा निकालकर कई उपयोगी वस्तुएं तैयार की जा रही हैं, जिससे किसानों और महिलाओं दोनों को लाभ मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम महिला सम्मान के साथ-साथ आत्मनिर्भरता का भी संदेश देता है। केला रेशा उत्पादन के माध्यम से खगड़िया की महिलाएं रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसरों की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही हैं, जो जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा। कार्यक्रम का संचालन जिला विकास प्रबंधक पूजा भारती (नाबार्ड) ने किया, जबकि संयोजन जे.जे.बी.एफ. द्वारा किया गया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर खगड़िया में केला रेशा (बनाना फाइबर) उत्पादन से जुड़ी महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य ग्रामीण उद्योग को बढ़ावा देना था। जिला पदाधिकारी नवीन कुमार, उप विकास आयुक्त श्वेता भारती, जिला कृषि पदाधिकारी अविनाश कुमार और नाबार्ड की जिला विकास प्रबंधक पूजा भारती ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। एक महीने तक चलेगा प्रशिक्षण कार्यक्रम इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। इस अवसर पर महिलाओं के लिए एक महीने के प्रशिक्षण कार्यक्रम का भी शुभारंभ किया गया। इसमें केला रेशा से बैग, चटाई, फाइल कवर, रस्सी, टोकरी और सजावटी वस्तुओं सहित विभिन्न हस्तशिल्प उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए ऐसी पहलें अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने जोर दिया कि केला रेशा उत्पादन पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ किसानों और महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय का एक मजबूत स्रोत बन सकता है। उत्पादों को बाजार से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास जारी डीएम ने बताया कि खगड़िया जिले में बड़े पैमाने पर केले की खेती होती है, और इसके तनों से निकलने वाले रेशे का उपयोग कर महिलाएं कई प्रकार के उपयोगी उत्पाद तैयार कर सकती हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि जिला प्रशासन महिलाओं को प्रशिक्षण, मशीनों की उपलब्धता और उनके उत्पादों को बाजार से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। जिलाधिकारी ने सुझाव दिया कि यदि महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संगठित होकर काम करें, तो उनके उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने में और अधिक सुविधा होगी। उप विकास आयुक्त श्वेता भारती ने कहा कि महिलाएं आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और क्षमता का प्रदर्शन कर रही हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। केला रेशा उत्पादन जैसे कार्य महिलाओं को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार उपलब्ध कराते हैं, जिससे वे परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भी बनती हैं। रेशा से बनाई जाएगी वस्तुएं वहीं जिला कृषि पदाधिकारी अविनाश कुमार ने कहा कि केला रेशा उत्पादन कृषि आधारित उद्योग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। पहले केले के तने को खेतों में बेकार समझकर छोड़ दिया जाता था, लेकिन अब उसी से मूल्यवान रेशा निकालकर कई उपयोगी वस्तुएं तैयार की जा रही हैं, जिससे किसानों और महिलाओं दोनों को लाभ मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम महिला सम्मान के साथ-साथ आत्मनिर्भरता का भी संदेश देता है। केला रेशा उत्पादन के माध्यम से खगड़िया की महिलाएं रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसरों की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही हैं, जो जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा। कार्यक्रम का संचालन जिला विकास प्रबंधक पूजा भारती (नाबार्ड) ने किया, जबकि संयोजन जे.जे.बी.एफ. द्वारा किया गया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।


