महाराष्ट्र के जलगांव जिले से केला फसल बीमा से जुड़ा एक बड़ा और चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है। जांच में पता चला है कि केला की खेती किए बिना ही हजारों किसानों के नाम पर बीमा कराया गया, जिसके जरिए करीब 250 करोड़ रुपये की फर्जी क्लेम राशि हासिल करने की कोशिश की गई।
कृषि विभाग की जांच में इस पूरे मामले का खुलासा होने के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 27 हजार किसानों को नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में किसानों से 7 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा गया है, उसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
44000 हेक्टेयर में बोगस खेती
कृषि विभाग की जांच के दौरान यह बड़ा घोटाला उजागर हुआ। जांच में सामने आया कि जलगांव जिले में करीब 44 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में केला की बोगस खेती दिखाकर बीमा पॉलिसी निकाली गई। जबकि असलियत में उन जमीनों पर केले का एक भी पौधा नहीं लगा था।
कृषि विभाग की सतर्कता से सरकार के लगभग 179 करोड़ रुपये डूबने से बच गए हैं, जबकि 37 करोड़ रुपये पहले ही जब्त किए जा चुके हैं। अधिकारियों के मुताबिक यदि समय रहते यह मामला पकड़ में नहीं आता तो सरकार को लगभग 250 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता था।
48 CSC केंद्रों पर संदेह
इस पूरे घोटाले की जड़ें डिजिटल सेवा केंद्रों (CSC) से जुड़ी नजर आ रही हैं। कृषि विभाग की शुरुआती जांच में पता चला है कि जिले के 48 सीएससी केंद्रों के माध्यम से बड़े पैमाने पर फर्जी फॉर्म भरे गए थे। लगभग 44 हजार हेक्टेयर क्षेत्र पर फर्जी तरीके से केले की खेती दिखाई गई थी।
जिलाधिकारी की उपस्थिति में हुई हालिया बैठक में इन संदिग्ध सीएससी केंद्रों की गहन जांच करने और उनके खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
27000 किसानों को नोटिस जारी
इस घोटाले की आंच अब उन 27,000 किसानों तक पहुंच गई है, जिनके नाम पर यह बीमा राशि क्लेम की गई थी। प्रशासन ने इन सभी संबंधित किसानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उन्हें अगले सात दिनों के भीतर अपना पक्ष रखना होगा। इस कार्रवाई से पूरे जिले के किसानों में हड़कंप मच गया है।
कैसे पकड़ी गई धांधली
जलगांव जिला केले के उत्पादन के लिए देशभर में प्रसिद्ध है, इसी का फायदा उठाते हुए जालसाजों ने करोड़ों की हेराफेरी का खाका बुना। दरअसल, कृषि विभाग को जब बीमा दावों के आंकड़ों और वास्तविक बुवाई के रकबे में भारी विसंगति नजर आई, तो उन्होंने जमीनी स्तर पर वेरिफिकेशन शुरू किया। जांच में पाया गया कि कई किसानों ने केवल कागजों पर ही केले उगाए थे। इस फर्जीवाड़े को समय रहते पकड़ लेने से सरकारी खजाने की लूट बच गई।


