हवा में झूलते बांस के पुल और सीधी खड़ी चट्टानें! क्या आपमें है दम मेघालय के इस ट्रेक के आखिरी छोर तक पहुंचने का?

हवा में झूलते बांस के पुल और सीधी खड़ी चट्टानें! क्या आपमें है दम मेघालय के इस ट्रेक के आखिरी छोर तक पहुंचने का?

Mawryngkhang Bamboo Trek Meghalaya: मेघालय का नाम सुनते ही दिमाग में सुंदर झरने, बादलों के बीच बसे खूबसूरत घर और ताजी हवाओं का ख्याल आता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यहां एक ऐसी जगह भी है जिसे इंडिया का सबसे डेंजरस ट्रेक माना जाता है। यह ट्रेक उन लोगों के लिए है जिन्हें खतरों से खेलने का शौक है। पहाड़ की सीधी खड़ी चट्टानों पर सिर्फ बांस और रस्सियों के सहारे चलना किसी एडवेंचर फिल्म जैसा महसूस होता है। अगर आपको ट्रैवलिंग के साथ एडवेंचर पसंद है, तो हमारा आज का यह लेख आपके काम आ सकता है। आज के इस लेख में हम मेघालय के एक ऐसे हिडन ट्रेक के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं, जिसे एक्सप्लोर करने के बाद आपको एक अलग ही सुकून मिलेगा।

सफर की शुरुआत

आज के इस लेख में हम जिस जगह की बात कर रहे हैं, उसका नाम है यू मावरिंगखांग बांस ट्रेक (U Mawryngkhang Bamboo Trek)। यह रोमांचक सफर मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग से लगभग 50 किलोमीटर दूर वाहखेन (Wahkhen) गांव से शुरू होता है। ट्रेक की कुल लंबाई करीब 4 किलोमीटर है। रास्ते में आपको छोटी-छोटी दुकानें, बैठने के लिए बेंच और बांस के बने डस्टबिन मिलेंगे। इस ट्रेक की शुरुआत करने के बाद जैसे ही आप थोड़ा आगे बढ़ते हैं, आपको एक छोटी सी नदी पार करनी पड़ती है और यहीं से असली चुनौती शुरू होती है। चूंकि यह एक ट्रॉपिकल जंगल वाला इलाका है, इसलिए यहां उमस (Humidity) बहुत ज्यादा होती है।

खतरनाक बैंबू ब्रिज

इस ट्रेक का सबसे डरावना और यादगार हिस्सा इसके बैंबू ब्रिजेस यानी बांस के पुल हैं। पहाड़ की विशाल चट्टानों के किनारे-किनारे सिर्फ बांस और रस्सियों से बने ये पुल किसी अजूबे से कम नहीं हैं। इन्हें यहां के स्थानीय लोगों ने बिना किसी आधुनिक मशीनरी के तैयार किया है। जब आप इन पुलों पर चलते हैं और नीचे गहरी खाई देखते हैं, तो यह अनुभव काफी रोमांचक हो जाता है।

दिल्ली से यहां कैसे पहुंचें?

अगर आप दिल्ली से यह ट्रेक करने आना चाहते हैं, तो इसके लिए सबसे पहले दिल्ली एयरपोर्ट से गुवाहाटी के लिए फ्लाइट लें, जिसमें लगभग 2.5 घंटे लगते हैं। इसके बाद गुवाहाटी एयरपोर्ट से आप टैक्सी या बस लेकर 3-4 घंटे में शिलॉन्ग पहुंच सकते हैं। शिलॉन्ग में एक रात रुकने के बाद अगले दिन सुबह जल्दी टैक्सी से वाहखेन गांव पहुंच सकते हैं, जहां से ट्रेक शुरू होता है। फ्लाइट के अलावा अगर आप ट्रेन से जाने का सोच रहे हैं, तो आप दिल्ली से गुवाहाटी की टिकट ले सकते हैं और फिर वहां से सड़क मार्ग से आगे बढ़ सकते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान

मेघालय में बारिश का कोई भरोसा नहीं होता, इसलिए यहां पैर फिसलने का डर हमेशा बना रहता है। इसीलिए रास्ते में जगह-जगह वार्निंग बोर्ड लगे हैं, जिनका पालन करना जरूरी होता है। यहां का ट्रिप प्लान करते समय हमेशा अच्छी ग्रिप वाले जूते पहनें और अपने पास एक रेनकोट जरूर रखें। चूंकि इस ट्रेक में काफी मेहनत लगती है, इसलिए अपने साथ पानी और एनर्जी देने वाली चीजें भी रखें। इसके अलावा अगर आप पहली बार ऐसी जगह जा रहे हैं, तो एक लोकल गाइड साथ रखना सबसे सुरक्षित रहेगा।

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