रसोई गैस को लेकर मची हायतौबा के बीच दो एजेंसी मालिकों पर एफआईआर कर सख्ती का संदेश देने वाले प्रशासन को तगड़ा झटका लगा है। खुलेआम ट्रक से ही ऊंचे दामों पर घरेलू उपयोग का रसोई गैस सिलेंडर बेचने वाले आशीष इंडेन गैस सर्विस के मालिक पवन कुमार वर्मा को 24 घंटे में जमानत मिल गई है। वह जेल से बाहर आ गया है और पुलिस-प्रशासन देखते रहे। एजेंसी मालिक को उसके कर्मचारी के साथ कालाबाजारी करते रंगेहाथ पकड़ा गया था। पुलिस व प्रशासन के तेवर इतने सख्त थे कि बिना एफआईआर दर्ज कराए ही पवन वर्मा को हिरासत में ले लिया गया था। जब एफआईआर दर्ज हुई तो अगले दिन उसे, उसके कर्मचारी शुभम जायसवाल व ट्रक ड्राइवर मोहम्मद अली को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, षडयंत्र एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3 व 7 के तहत हुई। लेकिन गुरुवार की शाम को एसडीएम ने उसे शांति भंग में जेल भेजा। शुक्रवार को दोपहर बाद उसी एसडीएम ने जमानत दे दी। पहले जानिए कहां से पकड़ा गया था पवन कुमार वर्मा के आशीष इंडेन गैस सर्विस को गीडा स्थित बाटलिंग प्लांट से 10 मार्च को 525 भरे हुए रसोई गैस सिलेंडर आवंटित हुए थे। ट्रक में लोड कर इसे पीपीगंज स्थित एजेंसी ले जाया गया। पूर्ति विभाग के अनुसार वहां पवन कुमार वर्मा ने 300 भरे हुए सिलेंडर अपने गोदाम में रखवा दिए और 200 भरा सिलेंडर ट्रक पर ही रहने दिया। साथ ही खाली जगह पर 300 खाली सिलेंडर रखवा दिए। उसके बाद अपने कर्मचारी शुभम के साथ ट्रक पर बैठकर नौसढ़ स्थित रोडवेज के पीछे खाली जमीन पर आया और सिलेंडरों की कालाबाजारी शुरू कर दी। कालाबाजारी करते पुलिस व पूर्ति निरीक्षकों ने पकड़ा क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी फणीश्वर त्रिपाठी, पूर्ति निरीक्षक अरुण कुमार सिंह, विवेक श्रीवास्तव एवं नौसढ़ पुलिस चौकी प्रभारी जब मौके पर पहुंचे तो ट्रक से पवन कुमार वर्मा और उसकी एजेंसी का कर्मचारी शुभम जायसवाल लोगों को 975 रुपये का गैस सिलेंडर 1400 रुपये में बेच रहे थे। उन्हें पकड़ लिया गया। पुलिस ने एजेंसी मालिक को हिरासत में ले लिया। 11 मार्च को पूरे दिन आपाधापी मची रही। यहां नौसढ़ की कन्हैया गैस सर्विस के वाहन से भी कालबाजारी पकड़ी गई थी। पीपीगंज पहुंचकर पूर्ति विभाग की टीम ने जांच की। वहां भी 176 सिलेंडरों का हिसाब नहीं मिला। गड़बड़ी मिलने पर जांच करने गई टीम गोदाम को सील करके ही लौटी। इधर प्रशासन की ओर से यह सार्वजनिक किया गया कि उन्होंने सतर्कता दिखाते हुए कालाबाजारी करने वाली दो एजेंसियों पर कार्रवाई की है। उनपर एफआईआर दर्ज कराई जा रही है। यह सूचना 11 मार्च को शाम लगभग 7 बजे सार्वजनिक की गई। रात लगभग 12 बजे पुलिस की ओर से सूचना आयी कि आशीष इंडेन गैस सर्विस के मालिक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। लेकिन इस वक्त तक पूर्ति विभाग की ओर से तहरीर नहीं दी गई थी। सारी कार्रवाई सार्वजनिक हो गई उसके साढ़े 3 घंटे बाद एफआईआर दर्ज हुई, वो भी केवल पीपीगंज स्थित एजेंसी पर। नौसढ़ वाली एजेंसी के बारे में केवल दावे किए गए। अब जानिए 12 मार्च को क्या हुआ 12 मार्च को दोपहर बाद पुलिस की ओर से सूचना दी गई कि एजेंसी मालिक सहित 3 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तारी उसी केस में हुई जिसका मुकदमा रात में दर्ज हुआ था। उसके बाद यह माना गया कि तीनों जेल चले गए होंगे। असल में जिस केस में मुकदमा हुआ, उसमें वे जेल नहीं गए। पुलिस का कहना था कि इसमें कोई ऐसी धारा नहीं थी, जिसमें सजा 7 साल से ऊपर हो। हालांकि कानूनी जानकार कहते हैं कि यह नियम पुलिस का रास्ता नहीं रोकता। तो जेल कैसे हुई आरोपियों को एसडीएम के समक्ष प्रस्तुत किया गया। वहां से 151 में जेल भेजा गया। प्रशासन भी मान रहा था कि कुछ दिन के लिए वह जेल में रहेगा और दूसरी गैस एजेंसी मालिकों को सख्त संदेश जाएगा। लेकिन 24 घंटे के भीतर ही वरिष्ठ अधिवक्ता कृष्ण दामोदर पाठक ने एसडीएम को जमानत देने पर मजबूर कर दिया। यानी 151 में एजेंसी मालिक जेल गया और जमानत लेकर बाहर आ गया। अब सवाल यह उठता है कि आखिर पुलिस ने क्या किया? जिस केस में गिरफ्तार किया, उसमें रिमांड लेने की कोशिश की भी या नहीं। हालांकि पुलिस इसकी विवेचना बारीकी से करने की तैयारी में है। खूब हुई किरकिरी कालाबाजारी करने वालों के साथ सख्ती से निपटने के संदेश रोज ही आते हैं लेकिन जिस मामले को नजीर बनाया गया। रसोई गेस सिलेंडरों के लिए मची हायतौबा के बीच जो प्रदेश का पहला और सबसे दुस्साहसिक मामला था, उसमें प्रशासन मजबूर नजर आया। 24 घंटे में जमानत मिली तो पुलिस और प्रशासन की खूब किरकिरी हुई। पीपीगंज क्षेत्र में तो अब यह भी चर्चा शुरू हो गई है कि जल्द ही एजेंसी भी रिलीज हो जाएगी। इससे पहले भी हुई थी कार्रवाई
2012-13 में इसी एजेंसी मालिक पर कालाबाजारी के मामले में एफआईआर हुई थी। उस वक्त ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रहे आईएएस अमित किशोर मौके पर पहुंचे थे। स्थानीय लोग बताते हैं कि उनकी स्थिति भी कालाबाजारियों ने असहज कर दी थी। अमित किशोर ने केस दर्ज कराया। एजेंसी मालिक जेल गया। एजेंसी सील हुई। कुछ दिनों में वह बाहर आ गया। एजेंसी बहाल हुई और फिर डंके की चोट पर अपने काम में जुट गया।


