पटना के बेऊर जेल में बंद राजद के पूर्व विधायक रीतलाल यादव को फिर झटका लगा है। पटना हाई कोर्ट ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। जस्टिस सत्यव्रत वर्मा की पीठ ने खगौल थाना कांड संख्या 171/2025 में गुरुवार को यह आदेश पारित किया। मामला रंगदारी वसूली, आपराधिक बल के जरिए निजी व सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा और संगठित गिरोह संचालन से जुड़ा है। रीतलाल 13 जून 2025 से जेल में बंद हैं। बचाव पक्ष की ओर से वरीय अधिवक्ता राजेंद्र नारायण ने पैरवी की, जबकि राज्य की ओर से अधिवक्ता अजय मिश्रा ने विरोध किया। सरकार की ओर से बताया गया कि उनके खिलाफ करीब 40 आपराधिक मामले लंबित हैं। 50 लाख रंगदारी केस में सरेंडर और गिरफ्तारी पूर्व विधायक ने 17 अप्रैल 2025 को दानापुर कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था। बिल्डर कुमार गौरव से 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में खगौल थाने में 10 अप्रैल को प्राथमिकी दर्ज हुई थी। इसके बाद 11 अप्रैल को पटना पुलिस ने रीतलाल के 11 ठिकानों पर छापेमारी की। छापे में 10.5 लाख रुपये नकद, 77 लाख रुपये के ब्लैंक चेक, चार पेन ड्राइव और जमीन से जुड़े कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए गए। सरेंडर के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल भेज दिया गया, जहां वे अब तक बंद हैं। 90 के दशक से आपराधिक सफर की शुरुआत रीतलाल यादव का जन्म 16 जनवरी 1972 को दानापुर के कोथावां गांव में हुआ। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार 1990 के दशक में उन पर साइकिल-मोटरसाइकिल चोरी और राहगीरों से छिनतई जैसे आरोप लगे। समय के साथ दानापुर क्षेत्र में जमीन की खरीद-फरोख्त बढ़ी तो उन पर जमीन मालिकों और बिल्डरों से रंगदारी मांगने के आरोप सामने आने लगे। पुलिस के अनुसार, निर्माण कार्य शुरू करने से पहले कथित तौर पर उनसे रकम देने का दबाव बनाया जाता था। जमीन कब्जा और अवैध निर्माण के आरोप जांच में यह भी सामने आया कि मुस्तफापुर मौजा में 76 डिसमिल जमीन पर 16 दुकानों का निर्माण कर किराये पर दिया गया। बाद में प्रशासन ने 15 मई 2025 को उस जमीन को कब्जामुक्त कराया। पुलिस का दावा है कि कोथावां मौजा में लगभग तीन एकड़ गैर-मजरुआ सरकारी जमीन पर भी अवैध कब्जा कर चहारदीवारी कराई गई। जांच टीम ने अंचल कार्यालय से दस्तावेज जुटाकर कई संपत्तियों की पड़ताल की। संगठित सिंडिकेट और ईडी की एंट्री पटना पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि रीतलाल यादव दानापुर क्षेत्र में एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट संचालित करते थे, जो जमीन कब्जा, रंगदारी और धमकी के जरिए वसूली करता था। जांच रिपोर्ट प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सौंप दी गई है और आगे की कार्रवाई की तैयारी है। पुलिस ने उनके और सहयोगियों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल कर दी है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि अवैध रूप से अर्जित धन का इस्तेमाल कर युवाओं को गिरोह से जोड़ा गया। पटना के बेऊर जेल में बंद राजद के पूर्व विधायक रीतलाल यादव को फिर झटका लगा है। पटना हाई कोर्ट ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। जस्टिस सत्यव्रत वर्मा की पीठ ने खगौल थाना कांड संख्या 171/2025 में गुरुवार को यह आदेश पारित किया। मामला रंगदारी वसूली, आपराधिक बल के जरिए निजी व सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा और संगठित गिरोह संचालन से जुड़ा है। रीतलाल 13 जून 2025 से जेल में बंद हैं। बचाव पक्ष की ओर से वरीय अधिवक्ता राजेंद्र नारायण ने पैरवी की, जबकि राज्य की ओर से अधिवक्ता अजय मिश्रा ने विरोध किया। सरकार की ओर से बताया गया कि उनके खिलाफ करीब 40 आपराधिक मामले लंबित हैं। 50 लाख रंगदारी केस में सरेंडर और गिरफ्तारी पूर्व विधायक ने 17 अप्रैल 2025 को दानापुर कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था। बिल्डर कुमार गौरव से 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में खगौल थाने में 10 अप्रैल को प्राथमिकी दर्ज हुई थी। इसके बाद 11 अप्रैल को पटना पुलिस ने रीतलाल के 11 ठिकानों पर छापेमारी की। छापे में 10.5 लाख रुपये नकद, 77 लाख रुपये के ब्लैंक चेक, चार पेन ड्राइव और जमीन से जुड़े कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए गए। सरेंडर के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल भेज दिया गया, जहां वे अब तक बंद हैं। 90 के दशक से आपराधिक सफर की शुरुआत रीतलाल यादव का जन्म 16 जनवरी 1972 को दानापुर के कोथावां गांव में हुआ। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार 1990 के दशक में उन पर साइकिल-मोटरसाइकिल चोरी और राहगीरों से छिनतई जैसे आरोप लगे। समय के साथ दानापुर क्षेत्र में जमीन की खरीद-फरोख्त बढ़ी तो उन पर जमीन मालिकों और बिल्डरों से रंगदारी मांगने के आरोप सामने आने लगे। पुलिस के अनुसार, निर्माण कार्य शुरू करने से पहले कथित तौर पर उनसे रकम देने का दबाव बनाया जाता था। जमीन कब्जा और अवैध निर्माण के आरोप जांच में यह भी सामने आया कि मुस्तफापुर मौजा में 76 डिसमिल जमीन पर 16 दुकानों का निर्माण कर किराये पर दिया गया। बाद में प्रशासन ने 15 मई 2025 को उस जमीन को कब्जामुक्त कराया। पुलिस का दावा है कि कोथावां मौजा में लगभग तीन एकड़ गैर-मजरुआ सरकारी जमीन पर भी अवैध कब्जा कर चहारदीवारी कराई गई। जांच टीम ने अंचल कार्यालय से दस्तावेज जुटाकर कई संपत्तियों की पड़ताल की। संगठित सिंडिकेट और ईडी की एंट्री पटना पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि रीतलाल यादव दानापुर क्षेत्र में एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट संचालित करते थे, जो जमीन कब्जा, रंगदारी और धमकी के जरिए वसूली करता था। जांच रिपोर्ट प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सौंप दी गई है और आगे की कार्रवाई की तैयारी है। पुलिस ने उनके और सहयोगियों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल कर दी है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि अवैध रूप से अर्जित धन का इस्तेमाल कर युवाओं को गिरोह से जोड़ा गया।


