बादशाहपुर दरोगा पर जमीन हथियाने का आरोप:इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एसपी जौनपुर से दो हफ्ते में मांगी जानकारी

बादशाहपुर दरोगा पर जमीन हथियाने का आरोप:इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एसपी जौनपुर से दो हफ्ते में मांगी जानकारी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस अधीक्षक जौनपुर से स्पष्टीकरण के साथ दो हफ्ते में व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने या कोर्ट में हाजिर होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने एस पी से पूछा है कि प्रश्नगत प्लाट जिसकी 3 फरवरी 18 को याची के पक्ष में बैनामा हुआ है, उस पर किसका कब्जा है। क्या बादशाहपुर थाना के पुलिस उपनिरीक्षक वीरेंद्र यादव का निर्माण ढहाकर किसी दूसरे को कब्जा सौंपने में कोई भूमिका रही है और क्या याचिका में जिस निर्माण का फोटो दाखिल किया गया है वह याची की जमीन पर या बगल की जमीन पर है। याची ने पुलिस उपनिरीक्षक पर आरोप लगाया है कि उसने याची का निर्माण ढहाकर विपक्षियों का निर्माण करा रहा है। शिकायत के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है। पुलिस के खिलाफ गंभीर आरोप को देखते हुए सत्यापन के लिए कोर्ट ने एस पी से सफाई हलफनामा मांगा है। याचिका की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने नागेंद्र प्रसाद विश्वकर्मा व अन्य की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। याची का कहना है कि उप निरीक्षक वीरेंद्र यादव उसकी जमीन हथियाना चाहता है। लाखों की जमीन मात्र दो लाख में बेचने का दबाव डाल रहा है। कहा कि 15 से 20 लोग इकट्ठा होकर याची की जमीन पर जबरन निर्माण करा रहे हैं और ताला सहित गेट लगा दिया है। पुलिस प्रशासन को कई शिकायते की गई। किंतु कोई कार्रवाई नहीं की गई तो हाईकोर्ट की शरण ली है। इसके विरोध में कहा गया कि मुंगरा बादशाहपुर के उप निरीक्षक सुरेंद्र प्रताप तिवारी की रिपोर्ट में कहा गया है कि दो पक्षों में जमीन को लेकर विवाद है। धारा 170 की कार्यवाही की गई है। चालान किया गया है। किंतु कोर्ट ने कहा कि उप निरीक्षक पर गंभीर आरोप है। इसलिए इसका सत्यापन किया जाना जरूरी है और एस पी से हलफनामा दाखिल कर जानकारी मांगी है।

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