अररिया जिले में पोषण अभियान को मजबूत करने तथा कुपोषण व एनीमिया की रोकथाम के उद्देश्य से सभी आंगनवाड़ी केंद्रों पर विशेष गोदभराई कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (आईसीडीएस), अररिया के निर्देश पर जिले की सभी परियोजनाओं के अंतर्गत एक साथ चलाया गया। इस आयोजन का मुख्य लक्ष्य 3 से 4 महीने की गर्भवती महिलाओं को लाभ पहुंचाना था। यह कार्यक्रम हर महीने की 7 तारीख को नियमित रूप से आयोजित होता है, जिसका उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। कार्यक्रम के दौरान गर्भवती महिलाओं को संतुलित पोषण, उचित स्वास्थ्य देखभाल, स्वच्छता और एनीमिया से बचाव के प्रति जागरूक किया गया। सभी केंद्रों पर पौष्टिक आहार, ताजे फल और थाली पोषण किट जैसी सामग्री वितरित की गई। महिलाओं को संतुलित खान-पान, नियमित एएनसी जांच, आयरन-फोलिक एसिड के महत्व और सुरक्षित प्रसव के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम का संचालन बाल विकास परियोजना पदाधिकारी के मार्गदर्शन में महिला पर्यवेक्षिकाओं, आंगनवाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं द्वारा किया गया। आंगनवाड़ी केंद्रों के आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाओं के साथ-साथ उनके परिवार के अन्य सदस्य भी इसमें शामिल हुए। स्थानीय पुरुषों और महिलाओं ने भी इस पहल में सक्रिय भागीदारी की और इसकी सराहना की। एक महिला ने कहा, “ऐसे कार्यक्रम से हमें पता चलता है कि गर्भावस्था में क्या खाना चाहिए और डॉक्टर के पास कब-कब जाना चाहिए। बच्चा और मां दोनों स्वस्थ रहेंगे तो परिवार का भविष्य भी सुरक्षित होगा।” जिला प्रशासन ने बताया कि गोदभराई जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से कुपोषण और एनीमिया को जड़ से खत्म करने का संकल्प लिया गया है। यह प्रयास माताओं को सशक्त बनाने और आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आईसीडीएस विभाग ने सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे सामुदायिक कार्यक्रम समाज में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। जिला प्रशासन ने अधिक से अधिक गर्भवती महिलाओं से आंगनवाड़ी केंद्रों से जुड़ने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया है। अररिया जिले में पोषण अभियान को मजबूत करने तथा कुपोषण व एनीमिया की रोकथाम के उद्देश्य से सभी आंगनवाड़ी केंद्रों पर विशेष गोदभराई कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (आईसीडीएस), अररिया के निर्देश पर जिले की सभी परियोजनाओं के अंतर्गत एक साथ चलाया गया। इस आयोजन का मुख्य लक्ष्य 3 से 4 महीने की गर्भवती महिलाओं को लाभ पहुंचाना था। यह कार्यक्रम हर महीने की 7 तारीख को नियमित रूप से आयोजित होता है, जिसका उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। कार्यक्रम के दौरान गर्भवती महिलाओं को संतुलित पोषण, उचित स्वास्थ्य देखभाल, स्वच्छता और एनीमिया से बचाव के प्रति जागरूक किया गया। सभी केंद्रों पर पौष्टिक आहार, ताजे फल और थाली पोषण किट जैसी सामग्री वितरित की गई। महिलाओं को संतुलित खान-पान, नियमित एएनसी जांच, आयरन-फोलिक एसिड के महत्व और सुरक्षित प्रसव के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम का संचालन बाल विकास परियोजना पदाधिकारी के मार्गदर्शन में महिला पर्यवेक्षिकाओं, आंगनवाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं द्वारा किया गया। आंगनवाड़ी केंद्रों के आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाओं के साथ-साथ उनके परिवार के अन्य सदस्य भी इसमें शामिल हुए। स्थानीय पुरुषों और महिलाओं ने भी इस पहल में सक्रिय भागीदारी की और इसकी सराहना की। एक महिला ने कहा, “ऐसे कार्यक्रम से हमें पता चलता है कि गर्भावस्था में क्या खाना चाहिए और डॉक्टर के पास कब-कब जाना चाहिए। बच्चा और मां दोनों स्वस्थ रहेंगे तो परिवार का भविष्य भी सुरक्षित होगा।” जिला प्रशासन ने बताया कि गोदभराई जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से कुपोषण और एनीमिया को जड़ से खत्म करने का संकल्प लिया गया है। यह प्रयास माताओं को सशक्त बनाने और आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आईसीडीएस विभाग ने सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे सामुदायिक कार्यक्रम समाज में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। जिला प्रशासन ने अधिक से अधिक गर्भवती महिलाओं से आंगनवाड़ी केंद्रों से जुड़ने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया है।


