बाबा जयगुरुदेव महाराज के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी परम संत बाबा उमाकान्त महाराज ने अजमेर रोड स्थित ठिकरिया आश्रम में आयोजित सत्संग कार्यक्रम में कहा कि लोगों के भीतर से दया समाप्त होती जा रही है और इसका कारण दूषित भोजन तथा मांसाहार है। उन्होंने कहा कि जब दया खत्म होती है तो धर्म का मूल कमजोर हो जाता है और धर्म कमजोर होने पर कर्म बिगड़ते हैं, जिसका दुष्परिणाम मनुष्य को भुगतना पड़ता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवों पर दया करने और धर्म के मूल तत्वों को अपनाने की अपील की। उमाकान्त महाराज बोले- “प्रकृति नाराज़ है” बाबा उमाकान्त महाराज ने कहा कि हथियारों की गोलाबारी से हवा दूषित हो रही है, जिससे पवन देवता नाराज़ हैं। धरती में अत्यधिक खुदाई और असलाह रखने से पृथ्वी नाराज़ है, जबकि आग से पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं के जलने से अग्नि देवता भी अप्रसन्न हैं। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि प्रकृति तरह-तरह की आपदाओं के रूप में प्रतिक्रिया दे रही है। युद्ध पर शांति का संदेश पश्चिम एशिया के युद्ध हालातों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है।
उन्होंने विश्व के बड़े देशों से हथियार निर्माण कम कर छोटे देशों के विकास में सहयोग देने की अपील की, ताकि दुनिया में शांति का माहौल बन सके। आने वाला समय ऐसा होगा जब एक मिनट में नास्तिक को भी भगवान याद आ जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रकृति और पंच देवता मनुष्य के कर्मों से नाराज़ हैं, जिसके चलते तरह-तरह की आपदाएं सामने आ सकती हैं। ठिकरिया आश्रम में आयोजित इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में गुलाबी वस्त्र पहने श्रद्धालु शामिल हुए। सत्संग में बाबा उमाकान्त महाराज ने कहा कि वर्तमान समय कठिन है, लेकिन गुरु भक्तों की साधना और दया धर्म के कारण कई बड़ी आफतें टल रही हैं। उन्होंने कहा कि गुरु महाराज द्वारा जागृत किया गया ‘जय गुरु देव’ नाम इस समय रक्षा का उपाय है। संकट के समय इस नाम का स्मरण करने से मुसीबत कम हो सकती है।


