विजय हजारे ट्रॉफी में आयुष ने बनाए 116 रन:दरभंगा में पिता की है किराने की दुकान, बोले- 56 गेंदों की तूफानी पारी देख खुश हूं

विजय हजारे ट्रॉफी में आयुष ने बनाए 116 रन:दरभंगा में पिता की है किराने की दुकान, बोले- 56 गेंदों की तूफानी पारी देख खुश हूं

झारखंड की राजधानी रांची में खेले गए विजय हजारे ट्रॉफी के एक मैच में दरभंगा के आयुष ने ओडिशा के खिलाफ 56 गेंदों पर 116 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेली। आयुष लोहारुका के शानदार प्रदर्शन के बाद उनके परिवार और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल है। परिवार के सदस्यों और आसपास के लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी और आयुष के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। आयुष लोहारुका ने अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत बिहार के दरभंगा जिले से की थी। निरंतर मेहनत और बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर उन्होंने बिहार के लिए अंडर-19, अंडर-23, और रणजी ट्रॉफी में अपनी पहचान बनाई। विजय हजारे ट्रॉफी में यह उनका पहला मैच था, जिसमें उन्होंने शतकीय पारी खेलकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। रणजी ट्रॉफी में इसी साल अरुणाचल के ही खिलाफ ठोका था दोहरा शतक रणजी ट्रॉफी में भी आयुष का रिकॉर्ड प्रभावशाली रहा है। पिछले वर्ष उन्होंने उत्तर प्रदेश के विरुद्ध शतक जड़ा था। वहीं इस वर्ष अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ 236 रनों की ऐतिहासिक पारी खेलकर अपनी क्षमता का लोहा मनवाया था। परिवार के लोगों का कहना है कि आयुष बचपन से ही खेल के प्रति समर्पित रहे हैं। पढ़ाई से अधिक उनका झुकाव क्रिकेट की ओर था। आयुष के पिता आनंद लोहारुका इस सफलता से बेहद खुश हैं। वे दरभंगा के गुल्लोवारा में अपनी छोटी दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं और बेटे की मेहनत पर गर्व महसूस कर रहे हैं। आयुष के पिता बोले- इससे बड़ी खुशी का दिन नहीं आयुष के पिता आनंद लोहारुका बेटे की ताबड़तोड़ पारी देख भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि इससे ज्यादा खुशी का दिन मेरे लिए नहीं हो सकता है। बेटे ने आज मुझे बहुत बड़ा तोहफा दिया है। उन्होंने कहा कि आयुष ने बहुत संघर्ष किया है और आज उसका परिणाम सामने आ रहा है। उन्होंने बताया कि घर में मिठाइयां बांटी गईं और पूरे मोहल्ले में उत्सव जैसा माहौल है। चाचा महेश लोहारुका ने कहा, “56 गेंदों में 116 रन बनाना बहुत बड़ा अचीवमेंट है। आयुष ने कड़ी मेहनत और संघर्ष किया है। आने वाले दिनों में वह और भी बेहतर करेगा और हमें पूरा विश्वास है कि उसका चयन एक दिन भारतीय टीम में जरूर होगा। चाची बोली- क्रिकेट के प्रति प्यार देखकर कभी नहीं टोका चाची सीमा लोहारूका ने कहा कि आयुष का बचपन संघर्षों से भरा रहा।“बहुत छोटी उम्र से ही क्रिकेट के प्रति उसका झुकाव था। हम लोग पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए मना भी करते थे, लेकिन क्रिकेट के लिए उसका जुनून इतना था कि हम रोक नहीं पाए। आज उसका परिणाम सामने है, खुशी शब्दों में बयां नहीं कर सकती। छोटी भाभी मेघना लोहारूका ने आयुष के जज़्बे की सराहना करते हुए कहा, “आज उसका हार्डवर्क परिणाम बनकर सामने आया है। उसका डिटरमिनेशन लोगों के लिए सीख है कि मेहनत से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। हमें लगता है कि वह दिन दूर नहीं जब वह इंडिया के लिए खेलेगा।” वहीं, बड़ी भाभी निधि लोहारूका ने कहा “हमें आयुष के टैलेंट पर हमेशा भरोसा था। आज उसने बड़े मंच पर खुद को साबित कर दिया। हमें उस पर बेहद गर्व है। चाची पदमा बोलीं- आयुष की पारी युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है चाची पदमा लोहारुका ने भावुक स्वर में कहा, “जब क्रिकेट देखते थे तो सोचते थे कि हमारा आयुष भी कब बड़ा क्रिकेटर बनेगा। आज उसने यह सपना सच कर दिखाया है। खुशी शब्दों में बयां नहीं की जा सकती।”आयुष लोहारुका की यह पारी न सिर्फ उनके करियर का मील का पत्थर है, बल्कि हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा भी बन गई है। परिवार और क्षेत्र के लोगों को अब उस दिन का इंतजार है, जब आयुष भारतीय टीम की जर्सी में देश का नाम रोशन करेंगे। बहन निकिता लोहारुका ने बताया कि यह उपलब्धि उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए बेहद गर्व का क्षण है।उन्होंने कहा कि इससे पहले भी उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ मैच में डबल सेंचुरी बनाई थी और यूपी के खिलाफ सेंचुरी जड़ी थी। लगातार इस तरह का प्रदर्शन उनकी मेहनत और लगन को दर्शाता है, जो वाकई काबिले-तारीफ है। ‘आयुष ने अपना मोटिवेशन और कॉन्फिडेंस हमेशा मजबूत रखा’ निकिता ने बताया कि बचपन से ही उनका झुकाव पूरी तरह क्रिकेट की ओर था। कई बार लोगों ने समझाया कि इतनी धूप में मत जाओ, पढ़ाई पर ध्यान दो, क्योंकि वह पढ़ाई में भी काफी इंटेलिजेंट थे। उन्हें बार-बार कहा गया कि क्रिकेट छोड़कर किसी और करियर पर फोकस करो, लेकिन उन्होंने अपना मोटिवेशन और कॉन्फिडेंस हमेशा मजबूत रखा। उन्होंने कहा कि एक भी दिन ऐसा नहीं जाता था जब वह क्रिकेट के बारे में न सोचते हों या प्रैक्टिस के लिए न जाते हों। परिवार के भीतर भी कभी-कभी पढ़ाई और क्रिकेट को लेकर कन्फ्यूजन की स्थिति बनी, लेकिन अंततः उन्होंने अपने दिल की सुनी और क्रिकेट को चुना। आज उसी फैसले का नतीजा सबके सामने है, जिस पर पूरा परिवार गर्व महसूस कर रहा है। झारखंड की राजधानी रांची में खेले गए विजय हजारे ट्रॉफी के एक मैच में दरभंगा के आयुष ने ओडिशा के खिलाफ 56 गेंदों पर 116 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेली। आयुष लोहारुका के शानदार प्रदर्शन के बाद उनके परिवार और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल है। परिवार के सदस्यों और आसपास के लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी और आयुष के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। आयुष लोहारुका ने अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत बिहार के दरभंगा जिले से की थी। निरंतर मेहनत और बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर उन्होंने बिहार के लिए अंडर-19, अंडर-23, और रणजी ट्रॉफी में अपनी पहचान बनाई। विजय हजारे ट्रॉफी में यह उनका पहला मैच था, जिसमें उन्होंने शतकीय पारी खेलकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। रणजी ट्रॉफी में इसी साल अरुणाचल के ही खिलाफ ठोका था दोहरा शतक रणजी ट्रॉफी में भी आयुष का रिकॉर्ड प्रभावशाली रहा है। पिछले वर्ष उन्होंने उत्तर प्रदेश के विरुद्ध शतक जड़ा था। वहीं इस वर्ष अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ 236 रनों की ऐतिहासिक पारी खेलकर अपनी क्षमता का लोहा मनवाया था। परिवार के लोगों का कहना है कि आयुष बचपन से ही खेल के प्रति समर्पित रहे हैं। पढ़ाई से अधिक उनका झुकाव क्रिकेट की ओर था। आयुष के पिता आनंद लोहारुका इस सफलता से बेहद खुश हैं। वे दरभंगा के गुल्लोवारा में अपनी छोटी दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं और बेटे की मेहनत पर गर्व महसूस कर रहे हैं। आयुष के पिता बोले- इससे बड़ी खुशी का दिन नहीं आयुष के पिता आनंद लोहारुका बेटे की ताबड़तोड़ पारी देख भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि इससे ज्यादा खुशी का दिन मेरे लिए नहीं हो सकता है। बेटे ने आज मुझे बहुत बड़ा तोहफा दिया है। उन्होंने कहा कि आयुष ने बहुत संघर्ष किया है और आज उसका परिणाम सामने आ रहा है। उन्होंने बताया कि घर में मिठाइयां बांटी गईं और पूरे मोहल्ले में उत्सव जैसा माहौल है। चाचा महेश लोहारुका ने कहा, “56 गेंदों में 116 रन बनाना बहुत बड़ा अचीवमेंट है। आयुष ने कड़ी मेहनत और संघर्ष किया है। आने वाले दिनों में वह और भी बेहतर करेगा और हमें पूरा विश्वास है कि उसका चयन एक दिन भारतीय टीम में जरूर होगा। चाची बोली- क्रिकेट के प्रति प्यार देखकर कभी नहीं टोका चाची सीमा लोहारूका ने कहा कि आयुष का बचपन संघर्षों से भरा रहा।“बहुत छोटी उम्र से ही क्रिकेट के प्रति उसका झुकाव था। हम लोग पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए मना भी करते थे, लेकिन क्रिकेट के लिए उसका जुनून इतना था कि हम रोक नहीं पाए। आज उसका परिणाम सामने है, खुशी शब्दों में बयां नहीं कर सकती। छोटी भाभी मेघना लोहारूका ने आयुष के जज़्बे की सराहना करते हुए कहा, “आज उसका हार्डवर्क परिणाम बनकर सामने आया है। उसका डिटरमिनेशन लोगों के लिए सीख है कि मेहनत से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। हमें लगता है कि वह दिन दूर नहीं जब वह इंडिया के लिए खेलेगा।” वहीं, बड़ी भाभी निधि लोहारूका ने कहा “हमें आयुष के टैलेंट पर हमेशा भरोसा था। आज उसने बड़े मंच पर खुद को साबित कर दिया। हमें उस पर बेहद गर्व है। चाची पदमा बोलीं- आयुष की पारी युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है चाची पदमा लोहारुका ने भावुक स्वर में कहा, “जब क्रिकेट देखते थे तो सोचते थे कि हमारा आयुष भी कब बड़ा क्रिकेटर बनेगा। आज उसने यह सपना सच कर दिखाया है। खुशी शब्दों में बयां नहीं की जा सकती।”आयुष लोहारुका की यह पारी न सिर्फ उनके करियर का मील का पत्थर है, बल्कि हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा भी बन गई है। परिवार और क्षेत्र के लोगों को अब उस दिन का इंतजार है, जब आयुष भारतीय टीम की जर्सी में देश का नाम रोशन करेंगे। बहन निकिता लोहारुका ने बताया कि यह उपलब्धि उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए बेहद गर्व का क्षण है।उन्होंने कहा कि इससे पहले भी उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ मैच में डबल सेंचुरी बनाई थी और यूपी के खिलाफ सेंचुरी जड़ी थी। लगातार इस तरह का प्रदर्शन उनकी मेहनत और लगन को दर्शाता है, जो वाकई काबिले-तारीफ है। ‘आयुष ने अपना मोटिवेशन और कॉन्फिडेंस हमेशा मजबूत रखा’ निकिता ने बताया कि बचपन से ही उनका झुकाव पूरी तरह क्रिकेट की ओर था। कई बार लोगों ने समझाया कि इतनी धूप में मत जाओ, पढ़ाई पर ध्यान दो, क्योंकि वह पढ़ाई में भी काफी इंटेलिजेंट थे। उन्हें बार-बार कहा गया कि क्रिकेट छोड़कर किसी और करियर पर फोकस करो, लेकिन उन्होंने अपना मोटिवेशन और कॉन्फिडेंस हमेशा मजबूत रखा। उन्होंने कहा कि एक भी दिन ऐसा नहीं जाता था जब वह क्रिकेट के बारे में न सोचते हों या प्रैक्टिस के लिए न जाते हों। परिवार के भीतर भी कभी-कभी पढ़ाई और क्रिकेट को लेकर कन्फ्यूजन की स्थिति बनी, लेकिन अंततः उन्होंने अपने दिल की सुनी और क्रिकेट को चुना। आज उसी फैसले का नतीजा सबके सामने है, जिस पर पूरा परिवार गर्व महसूस कर रहा है।  

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