शिवहर में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम:बाल विवाह रोकने और महिला अधिकारों को लेकर ग्रामीणों को जागरूक किया गया

शिवहर में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम:बाल विवाह रोकने और महिला अधिकारों को लेकर ग्रामीणों को जागरूक किया गया

शिवहर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार, शिवहर द्वारा बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम रविवार, 8 मार्च 2026 को गाँव एराजी छतौनी तरियानी में ग्रामीणों के साथ संपन्न हुआ। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष एवं जिला व सत्र न्यायाधीश दीपक कुमार के निर्देश पर तथा सचिव सह न्यायाधीश ललन कुमार के मार्गदर्शन में यह आयोजन हुआ। अधिकार मित्र मोहन कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय विधि सेवा प्राधिकरण की आशा स्कीम (जागरूकता, समर्थन, सहायता और कार्रवाई) के तहत 100 दिवसीय ‘बाल विवाह मुक्त भारत अभियान’ 4 दिसंबर 2025 से 8 मार्च 2026 तक चलाया गया। इस अभियान के दौरान, जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने शिवहर के विभिन्न विद्यालयों, पंचायतों, प्रखंडों और जिला मुख्यालय में जागरूकता, प्रशिक्षण, संवेदीकरण और बैठकों का आयोजन किया। इस अवधि में एक बाल विवाह को भी सफलतापूर्वक रुकवाया गया। मोहन कुमार ने बताया कि यह कार्यक्रम आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने ग्रामीणों को जानकारी दी कि बाल विवाह एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है। माता-पिता को अपनी लड़कियों की शादी 18 वर्ष और लड़कों की शादी 21 वर्ष की आयु पूरी होने पर ही करनी चाहिए। पैनल अधिवक्ता अजय कुमार ने महिलाओं को पीसीपीएनडीटी (PCPNDT) अधिनियम और दहेज प्रतिषेध अधिनियम के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पीसीपीएनडीटी अधिनियम का उद्देश्य लिंग आधारित भ्रूण हत्या को रोकना है, जहां भ्रूण के लिंग की पहचान कर ‘अनचाहे’ (महिला) लिंग होने पर गर्भपात कराया जाता है। उन्होंने जोर दिया कि जीने का अधिकार मानव अधिकारों का अभिन्न अंग है और किसी लड़की को इससे वंचित करना गंभीर उल्लंघन है। शिवहर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार, शिवहर द्वारा बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम रविवार, 8 मार्च 2026 को गाँव एराजी छतौनी तरियानी में ग्रामीणों के साथ संपन्न हुआ। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष एवं जिला व सत्र न्यायाधीश दीपक कुमार के निर्देश पर तथा सचिव सह न्यायाधीश ललन कुमार के मार्गदर्शन में यह आयोजन हुआ। अधिकार मित्र मोहन कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय विधि सेवा प्राधिकरण की आशा स्कीम (जागरूकता, समर्थन, सहायता और कार्रवाई) के तहत 100 दिवसीय ‘बाल विवाह मुक्त भारत अभियान’ 4 दिसंबर 2025 से 8 मार्च 2026 तक चलाया गया। इस अभियान के दौरान, जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने शिवहर के विभिन्न विद्यालयों, पंचायतों, प्रखंडों और जिला मुख्यालय में जागरूकता, प्रशिक्षण, संवेदीकरण और बैठकों का आयोजन किया। इस अवधि में एक बाल विवाह को भी सफलतापूर्वक रुकवाया गया। मोहन कुमार ने बताया कि यह कार्यक्रम आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने ग्रामीणों को जानकारी दी कि बाल विवाह एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है। माता-पिता को अपनी लड़कियों की शादी 18 वर्ष और लड़कों की शादी 21 वर्ष की आयु पूरी होने पर ही करनी चाहिए। पैनल अधिवक्ता अजय कुमार ने महिलाओं को पीसीपीएनडीटी (PCPNDT) अधिनियम और दहेज प्रतिषेध अधिनियम के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पीसीपीएनडीटी अधिनियम का उद्देश्य लिंग आधारित भ्रूण हत्या को रोकना है, जहां भ्रूण के लिंग की पहचान कर ‘अनचाहे’ (महिला) लिंग होने पर गर्भपात कराया जाता है। उन्होंने जोर दिया कि जीने का अधिकार मानव अधिकारों का अभिन्न अंग है और किसी लड़की को इससे वंचित करना गंभीर उल्लंघन है।  

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