आरा में ऑनलाइन चालान काटने से नाराज ऑटो ड्राइवर ने आत्मदाह की कोशिश की है। अपनी ही गाड़ी का पेट्रोल निकालकर खुद पर छिड़ककर आग लगा लिया। आसपास मौजूद साथियों ने तुरंत उसके कपड़े को फाड़ा। काफी मशक्कत के बाद आग बुझाया। इलाज के लिए सदर अस्पताल में पहुंचाया। 65 फीसदी तक जल गया है। बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर किया गया है। काफी देर तक मौके पर अफरा-तफरी मची रही। पीड़ित की पहचान नाला मोड़ निवासी राजा कुमार के तौर पर हुई है। सिंडिकेट से स्टेशन तक गाड़ी चलाता था। घटना टाउन थाना क्षेत्र के पुरानी पुरानी लाइन मोड़ के पास की है।
खुदकुशी के अलावा कोई विकल्प नहीं अस्पताल पहुंचे परिजनों ने बताया कि कुछ माह पूर्व 9 हजार रुपए का ऑनलाइन चालान कट गया था। इसके बाद उसने पेमेंट कर दिया था, लेकिन शनिवार को फिर से 7 हजार का चालान कट गया। गुस्से में आकर पुलिस लाइन मोड़ के पास अपने ही गाड़ी से पेट्रोल निकालकर खुद पर छिड़ककर आग लगा ली। हालांकि मौके पर मौजूद ने उसके साथियों ने बचा लिया। हम लोग गरीब आदमी हैं। कई बार प्रशासन से बोला गया कि चालान मत काटिइए। समझा-बुझाकर छोड़ दीजिए। कर्ज लेकर गाड़ी लिया था, हर महीने किश्त जमा करना होता है। कर्जदार को भी पैसा देना है। ऐसे में अगर बार-बार चालान कटेगा तो हम लोगों के पास आत्महत्या करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। गंभीर हालत में पटना रेफर किया गया है वहीं, सदर अस्पताल में ऑन ड्यूटी डॉक्टर सरोज कुमार ने बताया कि कमर से ऊपर पूरी तरह जल गया है। लगभग 65 प्रतिशत से ज्यादा जलने से हालत नाजुक बनी हुई है। इमरजेंसी वार्ड में प्राथमिक उपचार कर दिया गया है। बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर किया गया है।
200 रुपए कमाना भी मुश्किल हो रहा है बिहार राज्य ऑटो संघ के सचिव किरण राज ने बताया जिला प्रशासन ने हम लोगों को सरकारी बस स्टैंड में स्थानांतरित किया है, उसके लिए दिल से धन्यवाद देते हैं, लेकिन सरकारी बस स्टैंड सुरक्षित नहीं है। आने वाले समय में हम लोग काफी तंग होंगे। यहां लगने से कोई भी दिन भर में 100 से 200 रुपए से ज्यादा नहीं कमा पा रहा है। आरा रेलवे स्टेशन परिसर में जिला प्रशासन की ओर से टेंडर कर दिया गया है। वहां से भी ऑटो चलाया जा रहा है, लेकिन सैकड़ों गाड़ी को सरकारी बस स्टैंड में लगवाकर उनके साथ दोहरी नीति अपनाई जा रही है। स्टेशन परिसर से यात्री गाड़ी पकड़कर चले जा रहे हैं। जो सरकारी बस स्टैंड में लगा है, वहां तक पैसेंजर नहीं आ पा रहे हैं। इस दोहरी नीति के कारण आक्रोश पैदा हो रहा है। रूट निर्धारण के साथ पुलिस कोड देने की मांग किरण राज ने आगे कहा कि स्टेशन परिसर से ऑटो फूल होकर जा रहा है, जबकि हम लोग लाइन में खड़े रह जा रहे हैं। जब सड़क किनारे पैसेंजर को उतारते हैं तो वहां पर 5000 फाइन काट दी जा रही है। हमारी मांग है कि पर फाइन काटना बंद करें। तत्कालीन एसपी विनय तिवारी के रीजन में ऑटो के लिए जो रूट तय किया गया था, उसे दोबारा लागू किया जाए। रूट के साथ पुलिस कोड दिया जाए। साथ ही जहां ऑटो लगाया जाता है, वहां से अतिक्रमण हटाया जाए। आरा में ऑनलाइन चालान काटने से नाराज ऑटो ड्राइवर ने आत्मदाह की कोशिश की है। अपनी ही गाड़ी का पेट्रोल निकालकर खुद पर छिड़ककर आग लगा लिया। आसपास मौजूद साथियों ने तुरंत उसके कपड़े को फाड़ा। काफी मशक्कत के बाद आग बुझाया। इलाज के लिए सदर अस्पताल में पहुंचाया। 65 फीसदी तक जल गया है। बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर किया गया है। काफी देर तक मौके पर अफरा-तफरी मची रही। पीड़ित की पहचान नाला मोड़ निवासी राजा कुमार के तौर पर हुई है। सिंडिकेट से स्टेशन तक गाड़ी चलाता था। घटना टाउन थाना क्षेत्र के पुरानी पुरानी लाइन मोड़ के पास की है।
खुदकुशी के अलावा कोई विकल्प नहीं अस्पताल पहुंचे परिजनों ने बताया कि कुछ माह पूर्व 9 हजार रुपए का ऑनलाइन चालान कट गया था। इसके बाद उसने पेमेंट कर दिया था, लेकिन शनिवार को फिर से 7 हजार का चालान कट गया। गुस्से में आकर पुलिस लाइन मोड़ के पास अपने ही गाड़ी से पेट्रोल निकालकर खुद पर छिड़ककर आग लगा ली। हालांकि मौके पर मौजूद ने उसके साथियों ने बचा लिया। हम लोग गरीब आदमी हैं। कई बार प्रशासन से बोला गया कि चालान मत काटिइए। समझा-बुझाकर छोड़ दीजिए। कर्ज लेकर गाड़ी लिया था, हर महीने किश्त जमा करना होता है। कर्जदार को भी पैसा देना है। ऐसे में अगर बार-बार चालान कटेगा तो हम लोगों के पास आत्महत्या करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। गंभीर हालत में पटना रेफर किया गया है वहीं, सदर अस्पताल में ऑन ड्यूटी डॉक्टर सरोज कुमार ने बताया कि कमर से ऊपर पूरी तरह जल गया है। लगभग 65 प्रतिशत से ज्यादा जलने से हालत नाजुक बनी हुई है। इमरजेंसी वार्ड में प्राथमिक उपचार कर दिया गया है। बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर किया गया है।
200 रुपए कमाना भी मुश्किल हो रहा है बिहार राज्य ऑटो संघ के सचिव किरण राज ने बताया जिला प्रशासन ने हम लोगों को सरकारी बस स्टैंड में स्थानांतरित किया है, उसके लिए दिल से धन्यवाद देते हैं, लेकिन सरकारी बस स्टैंड सुरक्षित नहीं है। आने वाले समय में हम लोग काफी तंग होंगे। यहां लगने से कोई भी दिन भर में 100 से 200 रुपए से ज्यादा नहीं कमा पा रहा है। आरा रेलवे स्टेशन परिसर में जिला प्रशासन की ओर से टेंडर कर दिया गया है। वहां से भी ऑटो चलाया जा रहा है, लेकिन सैकड़ों गाड़ी को सरकारी बस स्टैंड में लगवाकर उनके साथ दोहरी नीति अपनाई जा रही है। स्टेशन परिसर से यात्री गाड़ी पकड़कर चले जा रहे हैं। जो सरकारी बस स्टैंड में लगा है, वहां तक पैसेंजर नहीं आ पा रहे हैं। इस दोहरी नीति के कारण आक्रोश पैदा हो रहा है। रूट निर्धारण के साथ पुलिस कोड देने की मांग किरण राज ने आगे कहा कि स्टेशन परिसर से ऑटो फूल होकर जा रहा है, जबकि हम लोग लाइन में खड़े रह जा रहे हैं। जब सड़क किनारे पैसेंजर को उतारते हैं तो वहां पर 5000 फाइन काट दी जा रही है। हमारी मांग है कि पर फाइन काटना बंद करें। तत्कालीन एसपी विनय तिवारी के रीजन में ऑटो के लिए जो रूट तय किया गया था, उसे दोबारा लागू किया जाए। रूट के साथ पुलिस कोड दिया जाए। साथ ही जहां ऑटो लगाया जाता है, वहां से अतिक्रमण हटाया जाए।


