गयाजी में शराबबंदी को लेकर राष्ट्रीय जनता दल के औरंगाबाद से सांसद अभय कुशवाहा ने सवाल उठाए है। इन्होंने इसकी समीक्षा की मांग का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी का सिद्धांत सही है। लेकिन जिस तरीके से इसे लागू किया गया है, उससे आम लोगों खासकर गरीबों को परेशानी झेलनी पड़ रही है, जबकि अवैध धंधा करने वाले शराब धंधेबाज व शराब माफिया बेखौफ हैं। आम लोगों को परेशान करना ठीक नहीं है। शहर के कटारी रोड स्थित एक शोरूम के उद्घाटन कार्यक्रम में पत्रकारों से बातचीत के दौरान सांसद ने केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बयान से अपनी सहमति जताई। उन्होंने कहा कि मांझी लंबे समय से शराबबंदी की समीक्षा की बात कहते रहे हैं और उनकी बातों का अपना महत्व होता है। शराबबंदी के नाम पर आम लोगों को परेशान करना ठीक नहीं अभय कुशवाहा ने कहा कि शराबबंदी के नाम पर गरीब और आम लोगों को परेशान करना ठीक नहीं है। कई मामलों में छोटे-छोटे आरोपों में लोगों को जेल भेज दिया जाता है, जबकि बड़े नेटवर्क चलाने वाले लोग कानून की पकड़ से दूर रहते हैं। उन्होंने कहा कि अगर शराबबंदी लागू है, तो इसे और प्रभावी और न्यायपूर्ण बनाने की जरूरत है। समीक्षा का मकसद व्यवस्था को मजबूत करना होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य है। ऐसे में शरबाबन्दी के कुछ व्यावहारिक पहलुओं पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। ताकि कानून का उद्देश्य भी पूरा हो और जनता को अनावश्यक परेशानी भी न हो। राजस्व के नुकसान और सरकार की आर्थिक नीति पर भी सांसद ने एनडीए और खासकर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार योजनाओं के जरिए सरकारी पैसे का इस्तेमाल चुनावी फायदे के लिए कर रही है। उनके मुताबिक, अब सरकारी संसाधनों के सहारे चुनावी तैयारी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। गयाजी में शराबबंदी को लेकर राष्ट्रीय जनता दल के औरंगाबाद से सांसद अभय कुशवाहा ने सवाल उठाए है। इन्होंने इसकी समीक्षा की मांग का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी का सिद्धांत सही है। लेकिन जिस तरीके से इसे लागू किया गया है, उससे आम लोगों खासकर गरीबों को परेशानी झेलनी पड़ रही है, जबकि अवैध धंधा करने वाले शराब धंधेबाज व शराब माफिया बेखौफ हैं। आम लोगों को परेशान करना ठीक नहीं है। शहर के कटारी रोड स्थित एक शोरूम के उद्घाटन कार्यक्रम में पत्रकारों से बातचीत के दौरान सांसद ने केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बयान से अपनी सहमति जताई। उन्होंने कहा कि मांझी लंबे समय से शराबबंदी की समीक्षा की बात कहते रहे हैं और उनकी बातों का अपना महत्व होता है। शराबबंदी के नाम पर आम लोगों को परेशान करना ठीक नहीं अभय कुशवाहा ने कहा कि शराबबंदी के नाम पर गरीब और आम लोगों को परेशान करना ठीक नहीं है। कई मामलों में छोटे-छोटे आरोपों में लोगों को जेल भेज दिया जाता है, जबकि बड़े नेटवर्क चलाने वाले लोग कानून की पकड़ से दूर रहते हैं। उन्होंने कहा कि अगर शराबबंदी लागू है, तो इसे और प्रभावी और न्यायपूर्ण बनाने की जरूरत है। समीक्षा का मकसद व्यवस्था को मजबूत करना होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य है। ऐसे में शरबाबन्दी के कुछ व्यावहारिक पहलुओं पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। ताकि कानून का उद्देश्य भी पूरा हो और जनता को अनावश्यक परेशानी भी न हो। राजस्व के नुकसान और सरकार की आर्थिक नीति पर भी सांसद ने एनडीए और खासकर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार योजनाओं के जरिए सरकारी पैसे का इस्तेमाल चुनावी फायदे के लिए कर रही है। उनके मुताबिक, अब सरकारी संसाधनों के सहारे चुनावी तैयारी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।


