स्वर्णनगरी में होली को लेकर उत्साह अपने चरम पर पहुंच चुका है। मरुस्थल की सुनहरी रेत पर रंगों की छटा बिखेरने के लिए देश-विदेश से सैलानी पहुंचने लगे हैं। इस बार मार्च माह में होली पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन गई है। पर्यटन विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2 और 3 मार्च को आयोजित होने वाले होली पर्व पर चार हजार से अधिक देशी-विदेशी पर्यटक भाग लेंगे। इन दिनों जैसलमेर दुर्ग की प्राचीरों के बीच रंग और गुलाल की आहट साफ महसूस की जा सकती है।
सोनार दुर्ग क्षेत्र, गोपा चौक और आसपास की गलियों में फाग गीतों की स्वर लहरियां गूंज रही हैं। बाजारों में रंग, पिचकारियों और पारंपरिक परिधानों की खरीदारी तेज हो गई है। पर्यटक यहां की शालीन और सांस्कृतिक होली को देखने और उसमें सहभागी बनने के लिए उत्साहित हैं।
विदेशी मेहमानों का होली प्रेम
विदेशी सैलानियों में जैसलमेर की होली को लेकर विशेष प्रेम देखा जा रहा है। यूरोप और अन्य देशों से आने वाले पर्यटक इसको भारतीय संस्कृति के जीवंत उत्सव के रूप में अनुभव करना चाहते हैं। रंगों में डूबकर स्थानीय लोगों के साथ नृत्य करना, चंग और ढोल की थाप पर झूमना और रेगिस्तान की पृष्ठभूमि में उत्सव मनाना उनके लिए अनूठा अनुभव बन जाता है। कई विदेशी पर्यटक पारंपरिक राजस्थानी साफा और परिधान पहनकर रंगोत्सव में शामिल होते हैं। पटवों की हवेली और गड़ीसर झील पर भी होली के अवसर पर पर्यटकों की अच्छी खासी भीड़ देखी जा रही है। कई होटलों में होली पर विशेष आयोजन की तैयारी की जा रही हैं, जहां लोक कलाकार रंगों के बीच पारंपरिक प्रस्तुतियां देंगे।
होली आकर्षण के प्रमुख कारण
- रेगिस्तान की पृष्ठभूमि में अनूठा रंगोत्सव अनुभव
- दुर्ग क्षेत्र में पारंपरिक फाग गीत और चंग की थाप
- विदेशी पर्यटकों की उत्साहपूर्वक भागीदारी
-सांस्कृतिक गरिमा के साथ उत्सव मनाने का प्रचलन
पर्यटक बोले – ख़ास है जैसलमेर की होली
कनाडा से आए पर्यटक एलेक्स मार्टिन ने बताया कि जैसलमेर की होली आत्मीयता से भरपूर है और यहां का वातावरण बेहद सौहार्दपूर्ण है। जयपुर की अनुष्का अग्रवाल ने कहा कि दुर्ग की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में होली खेलना उनके लिए यादगार क्षण है। इटली से आए लोरेंजो बियांकी ने बताया कि यहां रंगों के साथ लोगों का अपनापन भी दिल को छू जाता है।
होली पर्व पर पर्यटन उद्योग को संजीवनी
होली के कारण होटल, रेस्तरां, गाइड और लोक कलाकारों को आर्थिक मजबूती मिल रही है। सीजन समाप्ति के बाद भी यह उत्सव पर्यटन उद्योग को संजीवनी प्रदान कर रहा है। स्वर्णनगरी की होली अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकी है और हर वर्ष सैलानियों की संख्या में वृद्धि इसका प्रमाण है। रेगिस्तान में उड़ता गुलाल, दुर्ग की दीवारों से गूंजते फाग गीत और सैलानियों का उत्साह इस बार जैसलमेर की होली को और भी भव्य और अविस्मरणीय बनाने जा रहा है।
- सुमेरसिंह राजपुरोहित, पर्यटन विशेषज्ञ, जैसलमेर


