बिहार पुलिस ने साइबर अपराधियों के नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई शुरू की है। साइबर क्राइम एंड सिक्योरिटी यूनिट के निर्देश पर पूरे राज्य में अभियान चलाया गया। इसमें 1,216 म्यूल अकाउंट्स की पहचान की गई है। इन खातों के जरिए कम समय में 72 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ। मामले में अब तक 201 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार लोगों में साइबर ठग, खाताधारक, बैंक मैनेजर, बैंककर्मी और चार्टर्ड अकाउंटेंट शामिल हैं। जांच में सामने आया कि बैंकिंग सिस्टम में सेंध सफेदपोशों की मदद से लगाई गई। बैंक की गोपनीय जानकारी भी लीक की गई। कार्रवाई की शुरुआत एनसीआरपी पोर्टल पर मिली 1,272 शिकायतों से हुई। शिकायतों के विश्लेषण के बाद खातों को ट्रैक किया गया। अब तक 103 केस अलग-अलग साइबर थानों में दर्ज किए गए हैं। आंकड़ों के अनुसार गोपालगंज में 33, मोतिहारी में 30, भागलपुर में 14, पटना में 13 और सारण में 8 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। सीसीएसयू ने कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है। जांच में पता चला कि अपराधी लोगों को लालच देकर उनके बैंक खाते का इस्तेमाल करते थे। पासबुक, सिम कार्ड और एटीएम अपने पास रख लेते थे। इन खातों में ठगी की रकम मंगाई जाती थी। यह भी सामने आया कि म्यूल अकाउंट खोलने में इस्तेमाल मोबाइल नंबर कोलकाता और बिहार के बाहर के शहरों के थे। 15 हजार छोटे ट्रांजेक्शन वाले खाते भी जांच में सीसीएसयू के अनुसार 1,216 म्यूल अकाउंट में 10 लाख या उससे अधिक की ठगी हुई है। ज्यादातर खाते करंट या बिजनेस अकाउंट हैं। अगर एक लाख से कम ट्रांजेक्शन वाले खातों को जोड़ें तो संख्या और बढ़ जाती है। पूरे बिहार में ऐसे करीब 15 हजार खाते चिह्नित हैं। इनमें अधिकतर सेविंग अकाउंट हैं। सीसीएसयू की टीम इन खातों का सत्यापन कर रही है। साइबर पुलिस आगे और बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है। बिहार पुलिस ने साइबर अपराधियों के नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई शुरू की है। साइबर क्राइम एंड सिक्योरिटी यूनिट के निर्देश पर पूरे राज्य में अभियान चलाया गया। इसमें 1,216 म्यूल अकाउंट्स की पहचान की गई है। इन खातों के जरिए कम समय में 72 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ। मामले में अब तक 201 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार लोगों में साइबर ठग, खाताधारक, बैंक मैनेजर, बैंककर्मी और चार्टर्ड अकाउंटेंट शामिल हैं। जांच में सामने आया कि बैंकिंग सिस्टम में सेंध सफेदपोशों की मदद से लगाई गई। बैंक की गोपनीय जानकारी भी लीक की गई। कार्रवाई की शुरुआत एनसीआरपी पोर्टल पर मिली 1,272 शिकायतों से हुई। शिकायतों के विश्लेषण के बाद खातों को ट्रैक किया गया। अब तक 103 केस अलग-अलग साइबर थानों में दर्ज किए गए हैं। आंकड़ों के अनुसार गोपालगंज में 33, मोतिहारी में 30, भागलपुर में 14, पटना में 13 और सारण में 8 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। सीसीएसयू ने कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है। जांच में पता चला कि अपराधी लोगों को लालच देकर उनके बैंक खाते का इस्तेमाल करते थे। पासबुक, सिम कार्ड और एटीएम अपने पास रख लेते थे। इन खातों में ठगी की रकम मंगाई जाती थी। यह भी सामने आया कि म्यूल अकाउंट खोलने में इस्तेमाल मोबाइल नंबर कोलकाता और बिहार के बाहर के शहरों के थे। 15 हजार छोटे ट्रांजेक्शन वाले खाते भी जांच में सीसीएसयू के अनुसार 1,216 म्यूल अकाउंट में 10 लाख या उससे अधिक की ठगी हुई है। ज्यादातर खाते करंट या बिजनेस अकाउंट हैं। अगर एक लाख से कम ट्रांजेक्शन वाले खातों को जोड़ें तो संख्या और बढ़ जाती है। पूरे बिहार में ऐसे करीब 15 हजार खाते चिह्नित हैं। इनमें अधिकतर सेविंग अकाउंट हैं। सीसीएसयू की टीम इन खातों का सत्यापन कर रही है। साइबर पुलिस आगे और बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है।


