बीसीसीआई द्वारा आईपीएल फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) से बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्ताफिजुर रहमान को रिलीज करने के निर्देश के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने बेतिया में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे कथित अन्याय को मानवता के खिलाफ बताया। मंत्री दुबे ने कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों पर हो रहे अत्याचार और भेदभाव की खबरें पूरे विश्व के लिए चिंता का विषय हैं। उन्होंने इन घटनाओं को मानवता पर “काला धब्बा” करार दिया और कहा कि किसी भी सभ्य समाज में ऐसी घटनाएं स्वीकार्य नहीं हो सकतीं। मानवाधिकारों-लोकतांत्रिक मूल्यों का समर्थक रहा है भारत उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत हमेशा मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों का समर्थक रहा है, और पड़ोसी देशों में ऐसे घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रख रहा है। मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि खेल और राजनीति अलग-अलग क्षेत्र हो सकते हैं, लेकिन जब मानवता और मौलिक अधिकारों का प्रश्न उठता है, तो उस पर चुप्पी साधना संभव नहीं है। बीसीसीआई के इस निर्णय को लेकर खेल जगत में भी व्यापक चर्चाएं हो रही हैं। माना जा रहा है कि यह कदम मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और हालात को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। केंद्रीय मंत्री के बयान से स्पष्ट होता है कि भारत सरकार बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर गंभीर है और इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उठाया जा सकता है। बीसीसीआई द्वारा आईपीएल फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) से बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्ताफिजुर रहमान को रिलीज करने के निर्देश के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने बेतिया में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे कथित अन्याय को मानवता के खिलाफ बताया। मंत्री दुबे ने कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों पर हो रहे अत्याचार और भेदभाव की खबरें पूरे विश्व के लिए चिंता का विषय हैं। उन्होंने इन घटनाओं को मानवता पर “काला धब्बा” करार दिया और कहा कि किसी भी सभ्य समाज में ऐसी घटनाएं स्वीकार्य नहीं हो सकतीं। मानवाधिकारों-लोकतांत्रिक मूल्यों का समर्थक रहा है भारत उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत हमेशा मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों का समर्थक रहा है, और पड़ोसी देशों में ऐसे घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रख रहा है। मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि खेल और राजनीति अलग-अलग क्षेत्र हो सकते हैं, लेकिन जब मानवता और मौलिक अधिकारों का प्रश्न उठता है, तो उस पर चुप्पी साधना संभव नहीं है। बीसीसीआई के इस निर्णय को लेकर खेल जगत में भी व्यापक चर्चाएं हो रही हैं। माना जा रहा है कि यह कदम मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और हालात को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। केंद्रीय मंत्री के बयान से स्पष्ट होता है कि भारत सरकार बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर गंभीर है और इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उठाया जा सकता है।


