Javed Akhtar: अपनी कलम से जादू बिखेरने वाले फेमस गीतकार और लेखक जावेद अख्तर अपने बेबाक बयानों से अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। वह समाज की सोच हो या खुद को नास्तिक कहना हमेशा खुलकर अपनी बात कहते हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ। जावेद अख्तर ने धर्म, राजनीति, परिवार और सिनेमा जैसे हर मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी। हमेशा की तरह उनकी बातों में वही बेबाकी और तंज नजर आया, जिसके लिए वह जाने जाते हैं।
जावेद अख्तर ने सुनाया अपने बचपन का किस्सा (Javed Akhtar On her Childhood Story)
जावेद अख्तर हाल ही में नवाबों के शहर लखनऊ पहुंचे थे। जहां उन्होंने अकादमी के सभागार में कॉमरेड शंकर दयाल तिवारी की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने अपने बचपन का एक बेहद दिलचस्प किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा, “जब मेरा जन्म ग्वालियर में हुआ, तो रस्म के मुताबिक बच्चे के कान में अजान सुनाई जानी थी।
मेरे पिता और उनके दोस्त कट्टर कम्युनिस्ट थे। उन्होंने अजान की जगह मेरे कान में ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ फूंक दिया।” उन्होंने हंसते हुए बताया कि घर में स्टालिन की फोटो लगी थी और बचपन में वह उन्हें ही अपना दादा समझते थे। करीब 5 साल की उम्र में उन्हें पता चला कि वो उनके दादा नहीं हैं।

जावेद अख्तर ने नास्तिक और आस्तिक पर दिया उदाहरण (Javed Akhtar Comment On Nastik)
जावेद अख्तर ने धर्म को इन दिनों राष्ट्रवाद का पर्याय मान लिए जाने और फिर नास्तिक विचार रखने के सवाल पर भी बात रखी। उन्होंने कहा कि आस्तिक के पास तो दो विकल्प हैं। धर्म और राष्ट्रवाद। नास्तिक के पास धर्म का विकल्प नहीं है, वह तो राष्ट्र को ही प्राथमिकता देता है।
पहली पत्नी को जावेद अख्तर ने बताया पक्का दोस्त
जावेद अख्तर ने आगे अपनी निजी जिंदगी और पहली पत्नी हनी ईरानी के साथ रिश्तों पर उन्होंने बहुत ही खूबसूरती से बात की। उन्होंने कहा, “अगर आज मुझसे कोई मेरे तीन सबसे अच्छे दोस्तों के नाम पूछे, तो पहला नाम हनी का ही आएगा। बाकी दो के लिए मुझे सोचना पड़ेगा और इस दोस्ती से न अब मेरी पत्नी शबाना आजमी को कोई दिक्कत है और न ही मेरे बच्चों को कोई एतराज है, क्योंकि रिश्तों में गरिमा बनी रहनी चाहिए।”

धर्म और लालच में जावेद अख्तर
वहीं, जावेद अख्तर ने आगे नास्तिकता और धर्म के मुद्दे पर कहा कि धर्म अक्सर लालच और डर पर टिका होता है। उन्होंने बताया, “धर्म सिखाता है कि अच्छा करोगे तो जन्नत मिलेगी और बुरा करोगे तो दोजख यानी नरक मिलेगा। जो डर या लालच की वजह से अच्छा काम कर रहा है, वह वास्तव में नैतिक (Moral) नहीं हो सकता।” उन्होंने आगे कहा कि धर्म में ‘कोटा’ सिस्टम चलता है- नमाज पढ़ ली या पूजा कर ली तो कोटा पूरा। लेकिन इंसानियत का कोटा कभी पूरा नहीं होता, आपको हर वक्त मदद के लिए तैयार रहना पड़ता है।
मल्टीप्लेक्स से गायब हो रहे गरीब लोग
आज की फिल्मों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि अब सिनेमा अमीरों की जागीर बन गया है। “मल्टीप्लेक्स में एक हजार की टिकट और 150 का समोसा मिलता है। एक परिवार के 5000 रुपये खर्च हो जाते हैं। जो लोग वहां सिर्फ पार्टी करने जा रहे हैं, उन्हें सामाजिक मुद्दों या गरीबों की समस्याओं से कोई मतलब नहीं है। यही वजह है कि आज की फिल्मों से मिडिल क्लास और गरीब गायब हो चुके हैं।” जावेद साहब ने शिक्षा व्यवस्था पर भी चिंता जताई और कहा कि हम बच्चों को खुद से सोचना नहीं सिखा रहे, बस जो बताया जा रहा है उसे दोहराना सिखा रहे हैं। उनके इस सत्र ने वहां मौजूद लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया।


