शादी में 2000 लोगों का खाना लकड़ी पर बन रहा:भोजपुर में LPG किल्लत; दुल्हन के दादा बोले- 5 की जगह अब 10 कारीगर, पॉकेट पर असर पड़ा

शादी में 2000 लोगों का खाना लकड़ी पर बन रहा:भोजपुर में LPG किल्लत; दुल्हन के दादा बोले- 5 की जगह अब 10 कारीगर, पॉकेट पर असर पड़ा

“पोती की शादी धूमधाम से हो रही है। लेकिन गैस सिलेंडर नहीं मिलने से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रसोई गैस नहीं मिलने की वजह से 2000 लोगों का खाना अब लकड़ी पर बनवाना पड़ रहा है। 5 की जगह 10 कारीगर लग रहे हैं और पॉकेट पर भी असर पड़ रहा है।” ये कहना है दुल्लहन के दादा ईश्वर दयाल सिंह का। दरअसल, भोजपुर में इन दिनों गैस की किल्लत ने आम लोगों की जिंदगी को मुश्किलों से भर दिया है। हालात ऐसे हो गए हैं कि रसोई से उठने वाली आंच अब लोगों की चिंता का कारण बन गई है। घर की रोटी से लेकर बड़े-बड़े शादी समारोह तक हर जगह गैस की कमी का असर साफ दिखने लगा है। लोग सुबह की पहली किरण के साथ गैस एजेंसियों के बाहर लाइन में लग जा रहे हैं और तेज धूप में घंटों अपने नंबर का इंतजार कर रहे हैं। फिर भी कई बार उम्मीद टूट जाती है और लोगों को खाली हाथ घर लौटना पड़ता है। किसी के घर की रसोई ठंडी पड़ रही है तो कहीं बेटियों की शादी के मौके पर भी चूल्हा जलाना बड़ी चुनौती बन गया है। शादी-ब्याह जैसे खुशियों के मौके भी अब गैस की कमी के कारण चिंता और मजबूरी में बदलते नजर आ रहे हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… शादी समारोह में गैस की किल्लत से चिंता चरपोखरी प्रखंड के बड़हरा गांव में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है। गांव के रहने वाले जितेंद्र सिंह की बेटी की शादी गुरुवार को है और घर में बारात आने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। रिश्तेदारों का आना-जाना शुरू हो गया है, घर में खुशियों का माहौल होना चाहिए था, लेकिन गैस की किल्लत ने इस खुशी के बीच चिंता की लकीरें खींच दी हैं। जितेंद्र सिंह पिछले दो दिनों से लगातार गैस एजेंसी के चक्कर लगा रहे हैं, सुबह से लाइन में लगकर घंटों इंतजार कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सिलेंडर नहीं मिल पाया। बारात आने में अब सिर्फ कुछ ही घंटे बचे हैं। ऐसे में आखिरकार मजबूरी में परिवार और गांव के लोगों ने मिलकर लकड़ी का इंतजाम किया, ताकि कम से कम बेटी की शादी में आने वाले मेहमानों के लिए खाना तैयार किया जा सके। जिस रसोई में गैस के चूल्हे पर आसानी से खाना बनने की उम्मीद थी, वहां अब लकड़ी के धुएं के बीच बड़े-बड़े बर्तनों में भोजन तैयार करने की तैयारी चल रही है। 2000 लोगों के लिए लकड़ी पर बन रहा खाना आयोजनकर्ताओं का कहना है कि कमर्शियल गैस मिलना लगभग नामुमकिन हो गया है, जिसके कारण 1500 से 2000 लोगों के लिए खाना लकड़ी पर बनवाना पड़ रहा है। इससे न सिर्फ मेहनत बढ़ गई है, बल्कि खर्च भी काफी ज्यादा हो रहा है। घरेलू उपभोक्ताओं की परेशानी भी कम नहीं है। लोग सुबह से लाइन में लग रहे हैं, लेकिन सिलेंडर सीमित होने के कारण कई लोगों को बिना गैस लिए ही लौटना पड़ रहा है। गैस की इस किल्लत के बीच बाजार में कोयले और लकड़ी की मांग अचानक बढ़ गई है। हालात ऐसे हैं कि लोग किसी तरह अपने घर की रसोई जलाने और बेटियों की शादी जैसे बड़े आयोजनों को पूरा करने के लिए जुगाड़ में लगे हुए हैं। गैस की कमी ने भोजपुर के कई घरों की खुशियों पर चिंता की छाया डाल दी है। लकड़ियों पर खाना बनाने पर मजबूर दुल्हन के दादा ईश्वर दयाल सिंह ने दैनिक भास्कर से बताया कि आज उनकी पोती की शादी धूमधाम से हो रही है। लेकिन गैस सिलेंडर नहीं मिलने से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। तारीख तय होने के बाद अब शादी करना मजबूरी है। घर में रिश्तेदार आ चुके है। सभी तैयारी कर ली गई। कुछ देर में बारात भी आने वाले है। गैंस नहीं मिलने से लकड़ियों पर खाना बनाने पर मजबूर हो गए है। जहां पहले पांच से छह खाना बनाने वाले कारीगर काम करते थे। आज आठ से दस कारीगर काम कर रहे है। कारीगर बढ़ने से पॉकेट पर भी असर पड़ा कारीगर बढ़ने से पौकेट पर भी असर पड़ रहा है। खाना बनाने में समय भी ज्यादा लग रहा है। वही दुल्हन के दूसरे दादा ने बताया कि चार से पांच गैस के लिए इंतजार किए,लेकिन सिलेंडर नहीं मिला। पहले के युग की तरह शादी में खाना बनाना पड़ रहा है। गैस नहीं मिलने से कारीगरों की संख्या बढ़ गई है। नंबर लगाने के बावजूद भी गैस नहीं मिला है। शादी की तारीख तय होने के बाद इधर एक सप्ताह खाना बनाने को लिए हमलोग काफी चिंतित थे। काफी महक्कत के बाद कारीगर खाना बनाने के लिए राजी हुए। 15 साल बाद लकड़ी पर बना रहे खाना हेड कारीगर रामचंद्र साह ने बताया कि वो 32 सालों से आयोजन में खाना बना रहे है। 15 साल पहले लड़की पर खाना बनाए थे। लेकिन जब से सिलेंडर आया,उस समय किया लकड़ी पर खाना नहीं बनवाया है। आज गांव की ही लड़की की शादी है। इस आयोजन में 1500 से 2000 तक लोग शादी में शामिल होंगे और खाना खाएंगे। पहले तो हमने मना कर दिया था। लेकिन बेटी की बात थी। इसलिए हमलोग लकड़ी इकठ्ठा कर खाना बनाना शुरू कर दिए है। सुबह से काम लगा है। मेहनत के साथ समय भी लग रहा है। इतने लोगों के खाना बनाने के लिए पांच से छह लोग लगते थे। लेकिन लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने के लिए आदमी की संख्या बढ़ाई गई है। इसके साथ परेशानी भी बढ़ी हुई है,कुछ कारीगर सब्जी काटने, समान तैयार करने में लगे है तो कुछ लकड़ी बोझने में जुटे रहते है। लड़की की चिंगारी उड़ने से परेशानी आलू–गोभी की सब्जी बना रहे कारीगर ने बताया कि गर्मी के दिनों में काफी परेशानी होती है। उसकी चिंगारी इधर–उधर उड़ते रहती है। यह ध्यान देना पड़ता है कि कही चिंगारी टेंट के कपड़े में आग ना पकड़ ले। सिलेंडर पर अपने अनुसार से आंच को कम–अधिक कर सकते है। लेकिन लकड़ी के चूल्हे पर यह समस्या ज्यादा हो रही है। सब्जी,मिठाई,पूड़ी समेत अन्य भोजन जलने लगता है। रसोई गैस मिलने में हो रही देरी जगदीशपुर के खपटहां गांव निवासी कासिम अंसारी ने बताया कि सुबह 9 बजे से गैस लेने के लिए लाइन में खड़े है। चार घंटा बीत जाने के बाद भी हमारा नम्बर नहीं आया है। चिलचिलाती हुई धूप में खड़े होने के बावजूद भी हमारा नंबर नहीं आ पा रहा है। गैस वितरण से पहले पर्ची काटी जा रही है और ओटीपी प्रक्रिया पूरी करने के बाद बिल रसीद दी जा रही है। जिसके कारण काफी देर हो रही है। बचरी गांव के अमन कुमार ने बताया कि अहले सुबह से सिलेंडर लेने के लिए लाइन में खड़े है। घर का गैस खत्म होने के कगार पर है। कभी खत्म हो जाएगा,लेकिन यहां इतनी लंबी लाइन है कि नंबर आने का चांस ही नहीं लग रहा है। सुबह से खड़े–खड़े हालत खराब है। ऊपर से इतनी तेज़ धूप में चक्कर आने लगे है। आपस जैसी स्थिति हो गई है। सरकार को आम जनता की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कुछ ठोस कदम उठाना चाहिए। कोयले की बिक्री में हुई डबल बढ़ोतरी जगदीशपुर नगर के कोतवाली गोपाल जी कॉल डिपो के संचालक ने बताया कि लगभग 10 दिन पहले उनके यहां 3 टन कोयला आया था। पहले एक सप्ताह में करीब 400 किलो कोयले की बिक्री होती थी लेकिन अब यह बढ़कर लगभग 800 किलो प्रति सप्ताह हो गई है। पहले दिन भर में चार से पांच ग्राहक कोयला लेने आते थे। लेकिन पिछले एक सप्ताह से ग्राहकों की संख्या ज्यादा बढ़ गई है। होटल रेस्टोरेंट और छोटे-छोटे दुकानों में कोयला ले जाया जा रहा है। कोयल कीमत वर्तमान में सोलह रुपए प्रति किलो है। लेकिन पिछले तीन-चार दिनों से ट्रांसपोर्ट का खर्च थोड़ा बढ़ गया है, जिसके कारण उम्मीदें की कोयले के दाम में बढ़ोतरी हो सकती है। फिलहाल कोयला अभी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है किसी भी ग्राहक को कोई परेशानी नहीं हो रही है। कोयला दुकानदार ने बताया कि पहले होटल रेस्टोरेंट के मालिक गैस का उपयोग करते थे, लेकिन किल्लत हो जाने के बाद कोयले की डिमांड काफी बढ़ गई है। भोजपुर के जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया के निर्देश पर जिले में एलपीजी गैस एजेंसियों की सघन जांच शुरू की जा रही है। जिला प्रशासन को विभिन्न स्रोतों से यह सूचना मिली है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गैस सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है। साथ ही कुछ स्थानों पर गैस की कालाबाजारी, जमाखोरी और अधिक कीमत वसूली की आशंका भी जताई गई है। गैस एजेंसियों की जांच कराने का निर्देश इसी को देखते हुए जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रखंडवार पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति कर गैस एजेंसियों की जांच कराने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि गैस वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अनियमितता या कालाबाजारी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि जांच के दौरान कोई गैस वितरक या व्यक्ति एलपीजी गैस की अवैध बिक्री, भंडारण या जमाखोरी करते पाया जाता है तो उसके खिलाफ Essential Commodities Act, 1955 की धारा 3, 6ए और 7 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी अनुमंडल पदाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में गैस आपूर्ति व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है। “पोती की शादी धूमधाम से हो रही है। लेकिन गैस सिलेंडर नहीं मिलने से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रसोई गैस नहीं मिलने की वजह से 2000 लोगों का खाना अब लकड़ी पर बनवाना पड़ रहा है। 5 की जगह 10 कारीगर लग रहे हैं और पॉकेट पर भी असर पड़ रहा है।” ये कहना है दुल्लहन के दादा ईश्वर दयाल सिंह का। दरअसल, भोजपुर में इन दिनों गैस की किल्लत ने आम लोगों की जिंदगी को मुश्किलों से भर दिया है। हालात ऐसे हो गए हैं कि रसोई से उठने वाली आंच अब लोगों की चिंता का कारण बन गई है। घर की रोटी से लेकर बड़े-बड़े शादी समारोह तक हर जगह गैस की कमी का असर साफ दिखने लगा है। लोग सुबह की पहली किरण के साथ गैस एजेंसियों के बाहर लाइन में लग जा रहे हैं और तेज धूप में घंटों अपने नंबर का इंतजार कर रहे हैं। फिर भी कई बार उम्मीद टूट जाती है और लोगों को खाली हाथ घर लौटना पड़ता है। किसी के घर की रसोई ठंडी पड़ रही है तो कहीं बेटियों की शादी के मौके पर भी चूल्हा जलाना बड़ी चुनौती बन गया है। शादी-ब्याह जैसे खुशियों के मौके भी अब गैस की कमी के कारण चिंता और मजबूरी में बदलते नजर आ रहे हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… शादी समारोह में गैस की किल्लत से चिंता चरपोखरी प्रखंड के बड़हरा गांव में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है। गांव के रहने वाले जितेंद्र सिंह की बेटी की शादी गुरुवार को है और घर में बारात आने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। रिश्तेदारों का आना-जाना शुरू हो गया है, घर में खुशियों का माहौल होना चाहिए था, लेकिन गैस की किल्लत ने इस खुशी के बीच चिंता की लकीरें खींच दी हैं। जितेंद्र सिंह पिछले दो दिनों से लगातार गैस एजेंसी के चक्कर लगा रहे हैं, सुबह से लाइन में लगकर घंटों इंतजार कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सिलेंडर नहीं मिल पाया। बारात आने में अब सिर्फ कुछ ही घंटे बचे हैं। ऐसे में आखिरकार मजबूरी में परिवार और गांव के लोगों ने मिलकर लकड़ी का इंतजाम किया, ताकि कम से कम बेटी की शादी में आने वाले मेहमानों के लिए खाना तैयार किया जा सके। जिस रसोई में गैस के चूल्हे पर आसानी से खाना बनने की उम्मीद थी, वहां अब लकड़ी के धुएं के बीच बड़े-बड़े बर्तनों में भोजन तैयार करने की तैयारी चल रही है। 2000 लोगों के लिए लकड़ी पर बन रहा खाना आयोजनकर्ताओं का कहना है कि कमर्शियल गैस मिलना लगभग नामुमकिन हो गया है, जिसके कारण 1500 से 2000 लोगों के लिए खाना लकड़ी पर बनवाना पड़ रहा है। इससे न सिर्फ मेहनत बढ़ गई है, बल्कि खर्च भी काफी ज्यादा हो रहा है। घरेलू उपभोक्ताओं की परेशानी भी कम नहीं है। लोग सुबह से लाइन में लग रहे हैं, लेकिन सिलेंडर सीमित होने के कारण कई लोगों को बिना गैस लिए ही लौटना पड़ रहा है। गैस की इस किल्लत के बीच बाजार में कोयले और लकड़ी की मांग अचानक बढ़ गई है। हालात ऐसे हैं कि लोग किसी तरह अपने घर की रसोई जलाने और बेटियों की शादी जैसे बड़े आयोजनों को पूरा करने के लिए जुगाड़ में लगे हुए हैं। गैस की कमी ने भोजपुर के कई घरों की खुशियों पर चिंता की छाया डाल दी है। लकड़ियों पर खाना बनाने पर मजबूर दुल्हन के दादा ईश्वर दयाल सिंह ने दैनिक भास्कर से बताया कि आज उनकी पोती की शादी धूमधाम से हो रही है। लेकिन गैस सिलेंडर नहीं मिलने से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। तारीख तय होने के बाद अब शादी करना मजबूरी है। घर में रिश्तेदार आ चुके है। सभी तैयारी कर ली गई। कुछ देर में बारात भी आने वाले है। गैंस नहीं मिलने से लकड़ियों पर खाना बनाने पर मजबूर हो गए है। जहां पहले पांच से छह खाना बनाने वाले कारीगर काम करते थे। आज आठ से दस कारीगर काम कर रहे है। कारीगर बढ़ने से पॉकेट पर भी असर पड़ा कारीगर बढ़ने से पौकेट पर भी असर पड़ रहा है। खाना बनाने में समय भी ज्यादा लग रहा है। वही दुल्हन के दूसरे दादा ने बताया कि चार से पांच गैस के लिए इंतजार किए,लेकिन सिलेंडर नहीं मिला। पहले के युग की तरह शादी में खाना बनाना पड़ रहा है। गैस नहीं मिलने से कारीगरों की संख्या बढ़ गई है। नंबर लगाने के बावजूद भी गैस नहीं मिला है। शादी की तारीख तय होने के बाद इधर एक सप्ताह खाना बनाने को लिए हमलोग काफी चिंतित थे। काफी महक्कत के बाद कारीगर खाना बनाने के लिए राजी हुए। 15 साल बाद लकड़ी पर बना रहे खाना हेड कारीगर रामचंद्र साह ने बताया कि वो 32 सालों से आयोजन में खाना बना रहे है। 15 साल पहले लड़की पर खाना बनाए थे। लेकिन जब से सिलेंडर आया,उस समय किया लकड़ी पर खाना नहीं बनवाया है। आज गांव की ही लड़की की शादी है। इस आयोजन में 1500 से 2000 तक लोग शादी में शामिल होंगे और खाना खाएंगे। पहले तो हमने मना कर दिया था। लेकिन बेटी की बात थी। इसलिए हमलोग लकड़ी इकठ्ठा कर खाना बनाना शुरू कर दिए है। सुबह से काम लगा है। मेहनत के साथ समय भी लग रहा है। इतने लोगों के खाना बनाने के लिए पांच से छह लोग लगते थे। लेकिन लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने के लिए आदमी की संख्या बढ़ाई गई है। इसके साथ परेशानी भी बढ़ी हुई है,कुछ कारीगर सब्जी काटने, समान तैयार करने में लगे है तो कुछ लकड़ी बोझने में जुटे रहते है। लड़की की चिंगारी उड़ने से परेशानी आलू–गोभी की सब्जी बना रहे कारीगर ने बताया कि गर्मी के दिनों में काफी परेशानी होती है। उसकी चिंगारी इधर–उधर उड़ते रहती है। यह ध्यान देना पड़ता है कि कही चिंगारी टेंट के कपड़े में आग ना पकड़ ले। सिलेंडर पर अपने अनुसार से आंच को कम–अधिक कर सकते है। लेकिन लकड़ी के चूल्हे पर यह समस्या ज्यादा हो रही है। सब्जी,मिठाई,पूड़ी समेत अन्य भोजन जलने लगता है। रसोई गैस मिलने में हो रही देरी जगदीशपुर के खपटहां गांव निवासी कासिम अंसारी ने बताया कि सुबह 9 बजे से गैस लेने के लिए लाइन में खड़े है। चार घंटा बीत जाने के बाद भी हमारा नम्बर नहीं आया है। चिलचिलाती हुई धूप में खड़े होने के बावजूद भी हमारा नंबर नहीं आ पा रहा है। गैस वितरण से पहले पर्ची काटी जा रही है और ओटीपी प्रक्रिया पूरी करने के बाद बिल रसीद दी जा रही है। जिसके कारण काफी देर हो रही है। बचरी गांव के अमन कुमार ने बताया कि अहले सुबह से सिलेंडर लेने के लिए लाइन में खड़े है। घर का गैस खत्म होने के कगार पर है। कभी खत्म हो जाएगा,लेकिन यहां इतनी लंबी लाइन है कि नंबर आने का चांस ही नहीं लग रहा है। सुबह से खड़े–खड़े हालत खराब है। ऊपर से इतनी तेज़ धूप में चक्कर आने लगे है। आपस जैसी स्थिति हो गई है। सरकार को आम जनता की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कुछ ठोस कदम उठाना चाहिए। कोयले की बिक्री में हुई डबल बढ़ोतरी जगदीशपुर नगर के कोतवाली गोपाल जी कॉल डिपो के संचालक ने बताया कि लगभग 10 दिन पहले उनके यहां 3 टन कोयला आया था। पहले एक सप्ताह में करीब 400 किलो कोयले की बिक्री होती थी लेकिन अब यह बढ़कर लगभग 800 किलो प्रति सप्ताह हो गई है। पहले दिन भर में चार से पांच ग्राहक कोयला लेने आते थे। लेकिन पिछले एक सप्ताह से ग्राहकों की संख्या ज्यादा बढ़ गई है। होटल रेस्टोरेंट और छोटे-छोटे दुकानों में कोयला ले जाया जा रहा है। कोयल कीमत वर्तमान में सोलह रुपए प्रति किलो है। लेकिन पिछले तीन-चार दिनों से ट्रांसपोर्ट का खर्च थोड़ा बढ़ गया है, जिसके कारण उम्मीदें की कोयले के दाम में बढ़ोतरी हो सकती है। फिलहाल कोयला अभी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है किसी भी ग्राहक को कोई परेशानी नहीं हो रही है। कोयला दुकानदार ने बताया कि पहले होटल रेस्टोरेंट के मालिक गैस का उपयोग करते थे, लेकिन किल्लत हो जाने के बाद कोयले की डिमांड काफी बढ़ गई है। भोजपुर के जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया के निर्देश पर जिले में एलपीजी गैस एजेंसियों की सघन जांच शुरू की जा रही है। जिला प्रशासन को विभिन्न स्रोतों से यह सूचना मिली है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गैस सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है। साथ ही कुछ स्थानों पर गैस की कालाबाजारी, जमाखोरी और अधिक कीमत वसूली की आशंका भी जताई गई है। गैस एजेंसियों की जांच कराने का निर्देश इसी को देखते हुए जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रखंडवार पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति कर गैस एजेंसियों की जांच कराने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि गैस वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अनियमितता या कालाबाजारी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि जांच के दौरान कोई गैस वितरक या व्यक्ति एलपीजी गैस की अवैध बिक्री, भंडारण या जमाखोरी करते पाया जाता है तो उसके खिलाफ Essential Commodities Act, 1955 की धारा 3, 6ए और 7 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी अनुमंडल पदाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में गैस आपूर्ति व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है।  

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