नालंदा जिले में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में पहल की जा रही है। प्रशासन ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में चिह्नित विद्यालयों की व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा शुरू कर दी है। जिलाधिकारी कुंदन कुमार के निर्देश पर जिला शिक्षा पदाधिकारी आनंद विजय ने इन स्कूलों के प्राचार्यों से उपलब्ध संसाधनों और शैक्षणिक व्यवस्थाओं का संपूर्ण ब्योरा मांगा है। जिला प्रशासन ने महत्वाकांक्षी योजना के तहत हर प्रखंड के 5-5 विद्यालयों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में चिह्नित किया है। इन विद्यालयों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने की योजना है, जहां छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ बेहतर सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इसी क्रम में शिक्षा विभाग ने एक विशेष फॉर्मेट तैयार किया है, जिसमें विद्यालयों से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी मांगी गई है। संबंधित स्कूलों के प्राचार्यों को दो दिनों के भीतर यह ब्योरा जिला शिक्षा कार्यालय की वेबसाइट पर अपलोड करना होगा। बुनियादी ढांचे से लेकर शिक्षकों तक का लेखा-जोखा प्रशासन ने विद्यालयों की बारीक जांच के लिए एक व्यापक प्रारूप तैयार किया है। इसमें कक्षावार छात्रों के नामांकन और उपस्थिति, स्कूल ड्रेस में आने वाले विद्यार्थियों की संख्या, पदस्थापित और प्रतिनियुक्त शिक्षकों का विषयवार विवरण तथा कितने शिक्षकों की अतिरिक्त आवश्यकता है। इन सभी बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई है। विद्यालय भवन और उसके रंगरोगन की वर्तमान स्थिति, कैंपस का कुल क्षेत्रफल, बागान और पोषण वाटिका की उपलब्धता, चहारदीवारी और मुख्य दरवाजे की स्थिति, इन सभी पहलुओं पर भी रिपोर्ट मांगी गई है। प्रशासन यह भी जानना चाहता है कि मुख्य दरवाजे के पास विद्यालय के नाम की पेंटिंग है या नहीं। कक्षाओं और अन्य सुविधाओं का पूरा हिसाब वर्ग कक्षों की संख्या, उनकी स्थिति के बारे में जानकारी मांगी गई है। इसके अलावा प्राचार्य कक्ष, पुस्तकालय, आईसीटी लैब, प्रयोगशाला, शिक्षक कॉमन रूम और बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था का विस्तृत ब्योरा भी देना होगा। पेयजल व्यवस्था, खेल सामग्री और वाद्य यंत्रों की उपलब्धता, पुस्तकालय में अलमारी, टेबल, कुर्सी और किताबों की संख्या, कंप्यूटर और दैनिक समाचार पत्रों के उपयोग की जानकारी भी फॉर्मेट में शामिल की गई है। मध्याह्न भोजन और स्मार्ट क्लास की व्यवस्था विद्यालयों में संचालित मध्याह्न भोजन योजना की सुविधाओं की भी विस्तृत जांच होगी। भंडार में चावल रखने की व्यवस्था, प्लेट और दरी की संख्या, रसोईघर की स्थिति, गैस चूल्हे की उपलब्धता और मध्याह्न भोजन पंजी अद्यतन है या नहीं इन सभी बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी चाहिए। स्मार्ट क्लास की कार्यप्रणाली पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। टेलीविजन चालू है या नहीं, बैटरी और इन्वर्टर की उपलब्धता, लाइव क्लासेज की स्थिति और उनमें बच्चों की उपस्थिति का पंजी रखरखाव – इन सभी पहलुओं की जानकारी मांगी गई है। नालंदा जिले में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में पहल की जा रही है। प्रशासन ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में चिह्नित विद्यालयों की व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा शुरू कर दी है। जिलाधिकारी कुंदन कुमार के निर्देश पर जिला शिक्षा पदाधिकारी आनंद विजय ने इन स्कूलों के प्राचार्यों से उपलब्ध संसाधनों और शैक्षणिक व्यवस्थाओं का संपूर्ण ब्योरा मांगा है। जिला प्रशासन ने महत्वाकांक्षी योजना के तहत हर प्रखंड के 5-5 विद्यालयों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में चिह्नित किया है। इन विद्यालयों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने की योजना है, जहां छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ बेहतर सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इसी क्रम में शिक्षा विभाग ने एक विशेष फॉर्मेट तैयार किया है, जिसमें विद्यालयों से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी मांगी गई है। संबंधित स्कूलों के प्राचार्यों को दो दिनों के भीतर यह ब्योरा जिला शिक्षा कार्यालय की वेबसाइट पर अपलोड करना होगा। बुनियादी ढांचे से लेकर शिक्षकों तक का लेखा-जोखा प्रशासन ने विद्यालयों की बारीक जांच के लिए एक व्यापक प्रारूप तैयार किया है। इसमें कक्षावार छात्रों के नामांकन और उपस्थिति, स्कूल ड्रेस में आने वाले विद्यार्थियों की संख्या, पदस्थापित और प्रतिनियुक्त शिक्षकों का विषयवार विवरण तथा कितने शिक्षकों की अतिरिक्त आवश्यकता है। इन सभी बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई है। विद्यालय भवन और उसके रंगरोगन की वर्तमान स्थिति, कैंपस का कुल क्षेत्रफल, बागान और पोषण वाटिका की उपलब्धता, चहारदीवारी और मुख्य दरवाजे की स्थिति, इन सभी पहलुओं पर भी रिपोर्ट मांगी गई है। प्रशासन यह भी जानना चाहता है कि मुख्य दरवाजे के पास विद्यालय के नाम की पेंटिंग है या नहीं। कक्षाओं और अन्य सुविधाओं का पूरा हिसाब वर्ग कक्षों की संख्या, उनकी स्थिति के बारे में जानकारी मांगी गई है। इसके अलावा प्राचार्य कक्ष, पुस्तकालय, आईसीटी लैब, प्रयोगशाला, शिक्षक कॉमन रूम और बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था का विस्तृत ब्योरा भी देना होगा। पेयजल व्यवस्था, खेल सामग्री और वाद्य यंत्रों की उपलब्धता, पुस्तकालय में अलमारी, टेबल, कुर्सी और किताबों की संख्या, कंप्यूटर और दैनिक समाचार पत्रों के उपयोग की जानकारी भी फॉर्मेट में शामिल की गई है। मध्याह्न भोजन और स्मार्ट क्लास की व्यवस्था विद्यालयों में संचालित मध्याह्न भोजन योजना की सुविधाओं की भी विस्तृत जांच होगी। भंडार में चावल रखने की व्यवस्था, प्लेट और दरी की संख्या, रसोईघर की स्थिति, गैस चूल्हे की उपलब्धता और मध्याह्न भोजन पंजी अद्यतन है या नहीं इन सभी बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी चाहिए। स्मार्ट क्लास की कार्यप्रणाली पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। टेलीविजन चालू है या नहीं, बैटरी और इन्वर्टर की उपलब्धता, लाइव क्लासेज की स्थिति और उनमें बच्चों की उपस्थिति का पंजी रखरखाव – इन सभी पहलुओं की जानकारी मांगी गई है।


