ग्वालियर, “जब से नजर मिली पिया से सफर में, अपनी खबर नहीं पाये रे…”। सन 1955 में आई फिल्म ‘सरदार’ का यह लोकप्रिय गीत आशा भोसले की आवाज में कई दशकों तक गूंजता रहा। खास बात यह है कि इस गीत के गीतकार ग्वालियर के उद्धव कुमार कौशल थे, जिन्हें फिल्मी दुनिया में उद्धव कुमार के नाम से जाना गया। उन्होंने दो-ढाई दशक तक फिल्मों में गीत लिखे। इन गीतों में से बहुत से गीतों को आठ दशक तक फिल्मी दुनिया में अपनी आवाज से लोगों के दिल में उतरने वाली गायिका आशा भोसले की आवाज का साथ मिला। आशा जी की आवाज में उद्धव कुमार के फिल्म ‘सरदार’ के इस गीत को संगीत से संगीतकार जगमोहन ने संवारा था। ऐसे ही गीतों की कड़ी में 1953 में आई फिल्म ‘नैना’ का एक और गीत शामिल है। इसके बोल हैं – “मेरी जिंदगी एक ऐसा दीया है, जो बुझे भी नहीं और जले भी नहीं। मिलेंगी किसी की सहारे को बाहें, यही सोचकर चल रही थी मैं राहें। मिला भी जो साथी, तो ऐसा मिला रे, रुके भी नहीं, जो चले भी नहीं।” उनके इस गीत को संगीत से मन्ना डे ने सजाया था। इसी फिल्म में उद्धव जी के एक और गीत को भी आशा जी ने आवाज दी है। इस गीत के बोल हैं – “भूल गई सुध-बुध मन की, तन की, बात सुनी नहीं क्यूं सखियन की। मोहे लागी लगन पिय दर्शन की, जैसे पपीहा एक दिन वन में, बात करे नित बरसन की। मोहे लागी लगन।” इस गीत में आशा जी के साथ अशिमा बनर्जी का स्वर भी था। इस गीत को संगीत से सजाने वाले संगीतकार थे गुलाम मोहम्मद और मन्ना डे। उद्धव जी के कई और गीतों को आशा जी ने अपनी आवाज से सजाया, लेकिन फिलहाल वक्त इतने ही गीत याद आ रहे हैं। सरकार को दान कर दी थी रॉयल्टी उपनगर ग्वालियर के कोटावाला मोहल्ला में रहने वाले उद्धव कुमार कौशल 1950-60 के बीच मायानगरी बंबई (मुंबई) में बतौर गीतकार पहचान बना चुके थे। फिल्मी दुनिया में उनका नाम सिर्फ उद्धव कुमार के नाम से ही जाना गया। उनका एक गैर-फिल्मी गीत “सत्यमेव जयते, सत्यमेव जयते”, जिसे लता मंगेशकर ने 1971 में आजादी की 25वीं सालगिरह पर लाल किले से गाया था, अब भी लोगों के जेहन में गूंजता है। उन्होंने इसकी सारी रॉयल्टी सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा कोष में दान कर दी थी। उद्धव कुमार, ग्वालियर के युवा गायक नवनीत कौशल के बाबा गोपी कुमार कौशल के बड़े भाई थे।


