कन्नौज में 75 दिनों के आंदोलन के बाद गुरूवार को आशा बहुओं ने हड़ताल खत्म कर दी। दस हजार रुपये वेतन की मांग पूरी होने की खुशी में आशा कार्यकर्ताओं ने धरना स्थल पर ठुमके लगाए और जीत का जश्न मनाया। ग्राम महिला बाल कल्याण एसोसिशन की जिलाध्यक्ष रानी देवी ने प्रदेश अध्यक्ष विजय विद्रोही के निर्देशन में संघर्ष की अगुवाई की। मुख्य मांग मानी जाने पर धरना स्थल पर मौजूद आशाओं की आंखों में खुशी के आंसू थे। किसी ने कहा ये सिर्फ वेतन नहीं, हमारी मेहनत और सम्मान की जीत है। तो किसी ने कहाकि इस आंदोलन ने दिखा दिया कि जब हक की लड़ाई एकजुट होकर लड़ी जाती है, तो जीत तय होती है। जिले भर में आशाओं की हड़ताल के कारण 75 दिन तक कामकाज ठप रहा। इस दौरान गांव-गांव स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रहीं। संगठन की जिलाध्यक्ष रानी देवी ने कहा कि यह संघर्ष आगे भी जारी रहेगा, जब तक आशाओं को पूर्ण सम्मान और स्थायी सुविधाएं नहीं मिल जातीं। अब हड़ताल खत्म हो चुकी है और आशाएं फिर से अपने काम पर लौटेंगी, लेकिन इस जीत की गूंज दूर तक सुनाई देगी। यह सिर्फ वेतन बढ़ोतरी नहीं, बल्कि आत्मसम्मान की जीत है। उन्होंने कहाकि हक मांगने से नहीं, लड़कर लेने से मिलता है। फिलहाल अभी मानदेय की तिथि तय नहीं हुई है यदि दो महीने में वेतन नहीं आया तो अगली बार आंदोलन इससे भी बड़ा होगा। दरअसल मानदेय और राज्य कर्मचारी के दर्जे की मांग को लेकर प्रदेश भर में आशा बहुओं का प्रदर्शन 15 दिसम्बर से चला आ रहा था। सरकार द्वारा मानदेय की मांग पर हामी भरने से आशाओं में खुशी दिखाई दी और उन्होंने धरनास्थल पर ही जश्न मनाया।


