मोतिहारी के सुगौली रेलवे स्टेशन से बरामद 24 किलो चरस के ईंट में बदल जाने के सनसनीखेज मामले में जांच टीम ने बड़ा खुलासा कर दिया है। त्रि-सदस्यीय कमेटी की विस्तृत रिपोर्ट में थानाध्यक्ष, मजिस्ट्रेट सहित छह अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है। रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को सौंप दी गई है और इसके आधार पर आरोप पत्र भी दाखिल कर दिया गया है। अब विभागीय और कानूनी कार्रवाई की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। 5 मार्च 2025 को मिली थी 24 किलो चरस जैसी सामग्री सुगौली रेलवे स्टेशन पर 5 मार्च 2025 को एक लावारिस बैग से लगभग 24 किलोग्राम चरस जैसा पदार्थ बरामद हुआ था। बरामदगी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में हुई और सामग्री को विधिवत सील कर मालखाना भेजा गया। तत्कालीन रेल डीएसपी उमेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे बड़ी उपलब्धि बताया था। 58 दिन बाद कोर्ट में खुला बड़ा राज चौंकाने वाली बात यह रही कि जब्त सामग्री को 2 मई को कोर्ट में प्रस्तुत किया गया। जैसे ही सील खोलकर पैकेट खोला गया, अदालत में मौजूद सभी दंग रह गए। चरस की जगह पैकेट में ईंट जैसी वस्तु रखी हुई थी। कोर्ट में हंगामा मच गया और जज ने तत्काल जांच के आदेश दिए। तीन अधिकारियों की संयुक्त टीम ने की गहन जांच मामले की संवेदनशीलता देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने तत्काल संयुक्त जांच पैनल बनाया, जिसमें रेल एसपी, आरपीएफ कमांडेंट, मोतिहारी के एडीएम शामिल थे। टीम ने तीन सप्ताह तक दस्तावेज, जब्ती सूची, सीलिंग प्रक्रिया, मालखाना रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों के बयान की बारीकी से जांच की। थानाध्यक्ष-मजिस्ट्रेट समेत 6 अधिकारी दोषी जांच रिपोर्ट में छह अधिकारियों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया है। रिपोर्ट में कहा गया कि, जब्ती सामग्री की सुरक्षा में गंभीर लापरवाही हुई। सीलिंग प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन किया गया। मालखाना अभिरक्षा में गड़बड़ी के पर्याप्त साक्ष्य मिले। पूरी प्रक्रिया में अनियमितता और नियमानुसार पालन न करने की पुष्टि हुई। इसी आधार पर छह अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया है। अब बढ़ेगी कानूनी कार्रवाई मामला अब विभागीय कार्रवाई से आगे बढ़कर आपराधिक जांच की दिशा में जा सकता है। यह पूरा घटनाक्रम पुलिस की जब्ती प्रक्रिया और मादक पदार्थों की सुरक्षा प्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है आखिर सील टूटी कैसे? चरस की जगह ईंट किसने रखी? अभिरक्षा के दौरान कौन जिम्मेदार था? जांच रिपोर्ट के आने के साथ ही पुलिस मुख्यालय और जिला प्रशासन इस मामले को प्राथमिकता पर ले चुका है। आगे बड़े झटके के संकेत सूत्रों के अनुसार, दोषी पाए गए अधिकारियों पर निलंबन से लेकर गिरफ्तारी तक की कार्रवाई हो सकती है। सुगौली स्टेशन का यह मामला बिहार पुलिस के लिए पिछले वर्षों की सबसे बड़ी बेनामी जब्ती घोटाला जांच माना जा रहा है। मोतिहारी के सुगौली रेलवे स्टेशन से बरामद 24 किलो चरस के ईंट में बदल जाने के सनसनीखेज मामले में जांच टीम ने बड़ा खुलासा कर दिया है। त्रि-सदस्यीय कमेटी की विस्तृत रिपोर्ट में थानाध्यक्ष, मजिस्ट्रेट सहित छह अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है। रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को सौंप दी गई है और इसके आधार पर आरोप पत्र भी दाखिल कर दिया गया है। अब विभागीय और कानूनी कार्रवाई की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। 5 मार्च 2025 को मिली थी 24 किलो चरस जैसी सामग्री सुगौली रेलवे स्टेशन पर 5 मार्च 2025 को एक लावारिस बैग से लगभग 24 किलोग्राम चरस जैसा पदार्थ बरामद हुआ था। बरामदगी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में हुई और सामग्री को विधिवत सील कर मालखाना भेजा गया। तत्कालीन रेल डीएसपी उमेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे बड़ी उपलब्धि बताया था। 58 दिन बाद कोर्ट में खुला बड़ा राज चौंकाने वाली बात यह रही कि जब्त सामग्री को 2 मई को कोर्ट में प्रस्तुत किया गया। जैसे ही सील खोलकर पैकेट खोला गया, अदालत में मौजूद सभी दंग रह गए। चरस की जगह पैकेट में ईंट जैसी वस्तु रखी हुई थी। कोर्ट में हंगामा मच गया और जज ने तत्काल जांच के आदेश दिए। तीन अधिकारियों की संयुक्त टीम ने की गहन जांच मामले की संवेदनशीलता देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने तत्काल संयुक्त जांच पैनल बनाया, जिसमें रेल एसपी, आरपीएफ कमांडेंट, मोतिहारी के एडीएम शामिल थे। टीम ने तीन सप्ताह तक दस्तावेज, जब्ती सूची, सीलिंग प्रक्रिया, मालखाना रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों के बयान की बारीकी से जांच की। थानाध्यक्ष-मजिस्ट्रेट समेत 6 अधिकारी दोषी जांच रिपोर्ट में छह अधिकारियों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया है। रिपोर्ट में कहा गया कि, जब्ती सामग्री की सुरक्षा में गंभीर लापरवाही हुई। सीलिंग प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन किया गया। मालखाना अभिरक्षा में गड़बड़ी के पर्याप्त साक्ष्य मिले। पूरी प्रक्रिया में अनियमितता और नियमानुसार पालन न करने की पुष्टि हुई। इसी आधार पर छह अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया है। अब बढ़ेगी कानूनी कार्रवाई मामला अब विभागीय कार्रवाई से आगे बढ़कर आपराधिक जांच की दिशा में जा सकता है। यह पूरा घटनाक्रम पुलिस की जब्ती प्रक्रिया और मादक पदार्थों की सुरक्षा प्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है आखिर सील टूटी कैसे? चरस की जगह ईंट किसने रखी? अभिरक्षा के दौरान कौन जिम्मेदार था? जांच रिपोर्ट के आने के साथ ही पुलिस मुख्यालय और जिला प्रशासन इस मामले को प्राथमिकता पर ले चुका है। आगे बड़े झटके के संकेत सूत्रों के अनुसार, दोषी पाए गए अधिकारियों पर निलंबन से लेकर गिरफ्तारी तक की कार्रवाई हो सकती है। सुगौली स्टेशन का यह मामला बिहार पुलिस के लिए पिछले वर्षों की सबसे बड़ी बेनामी जब्ती घोटाला जांच माना जा रहा है।


