गोपालगंज जिले में दो दिवसीय थावे महोत्सव का शानदार समापन हुआ। ऐतिहासिक थावे मंदिर के समीप आयोजित इस महोत्सव के अंतिम दिन बॉलीवुड और स्थानीय कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को देर रात तक मंत्रमुग्ध कर दिया। महोत्सव के अंतिम दिन का मुख्य आकर्षण इंडियन आइडल फेम पार्श्व गायक पवनदीप राजन, लोक गायिका पूजा सिंह राजपूत और सारेगामापा फेम जय झा रहे। इनकी प्रस्तुतियों ने महोत्सव को चरम पर पहुंचा दिया, जहां भक्ति, लोक और फिल्मी गीतों का अद्भुत संगम देखने को मिला। सदाबहार गीतों की झड़ी लगाकर माहौल को उत्सवमय बना दिया पवनदीप राजन ने अपने हिट गानों और सुरीली आवाज से युवाओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी गायकी का जादू ऐसा चला कि लोग अपनी कुर्सियों पर खड़े होकर थिरकने लगे। उनके साथ अन्य कलाकारों ने भी बॉलीवुड के सदाबहार गीतों की झड़ी लगाकर माहौल को उत्सवमय बना दिया। बॉलीवुड गानों के अलावा, महोत्सव में बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की भी झलक देखने को मिली। स्थानीय कलाकारों ने लोक संगीत और नृत्य के माध्यम से जिले की परंपराओं को जीवंत किया। इनमें विप्रा चौबे का कत्थक नृत्य, निधि कुमारी के देवी गीत, रौनक कुमारी व सूरमैया सुगंधा के भाव नृत्य और रुखसार अहमद का सितार वादन शामिल था, जिन्होंने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ‘मंगल भवन अमंगल हारी’ की प्रस्तुति दी उभरती पार्श्व गायिका रितिका राज ने मंच पर कदम रखते ही माहौल में नई ऊर्जा भर दी। उन्होंने अपने पहले ही गीत ‘सबसे बड़ा तेरा नाम ओ शेरोवाली’ को भक्ति और जोश के साथ प्रस्तुत किया, जिस पर दर्शकों ने हाथ उठाकर तालियां बजाईं और माहौल भक्तिमय हो उठा। इसके बाद उन्होंने ‘मंगल भवन अमंगल हारी’ की प्रस्तुति दी। रितिका राज ने अपने प्रदर्शन में विविधता लाते हुए ‘दिल में जख्म खाते हैं’ को दर्द भरे अंदाज में गाया। इसके उपरांत ‘जियो हो बिहार के लाला’ पर पूरा मैदान गर्व और उत्साह से झूम उठा। उन्होंने ‘लाल चुनरिया’ को चुलबुले अंदाज में पेश किया, जिस पर महिलाएं झूमती नजर आईं। रितिका राज मंच से उतरकर सीधे दर्शकों के बीच पहुंच गई जब सात समुंदर पार में तेरे पीछे आ गई की पुन बनी, तो युवाओं की टोलियां खुद की रोक नहीं सकों और माहौल डांस फ्लोर में बदल गया। हमने घड़कन-धड़कन करके दिल तेरे दिल से जोड़ लिया को उन्होंने रोमांटिक एहसास के साथ गाया, कहीं दम मारो दम में उन्होंने पुरानी यादों को नए जोश के साथ जीवंत कर दिया। कार्यक्रम का सबसे खास पल तब आया, जब लैला मैं लैला गाते हुए रितिका राज मंच से उतरकर सीधे दर्शकों के बीच पहुंच गई। अचानक उनके करीब पहुंचने से दर्शकों में उत्साह की लहर दौड़ गई। कोई उनके साथ गुनगुनाने लगा, तो कोई मोबाइल में उस पल को कैद करने में जुट गया कलाकारों में खासा उत्साह देखा गया मंच पर प्रस्तुति का अवसर मिलने से कलाकारों में खासा उत्साह देखा गया। कार्यक्रम की शुरुआत गोपालगंज के कोषागार पदाधिकारी शशिकांत आर्या की देखरेख में हुई। इसके बाद एक के बाद एक कलाकसी ने अपनी प्रस्तुति से माहौल को सांस्कृतिक रंग में रंग दिया। बरौली की विप्रा चौबे ने कत्थक नृत्य से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। यहीं निधि कुमारी ने ‘हाथ जोड़कर खड़ी हूं द्वार पर तेरी मां भक्ति गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। रौनक कुमारी और सुरमैया सुगंधा ने ‘नमो देवी महादेवी’ पर भाव नृत्य प्रस्तुत किया। हजारों की भीड़ को नियंत्रित किया गया जबकि सोनाली मिश्रा और रीना मिश्रा ने जन्मे हैं राम रघुरैया’ सोहर गीत से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। आराध्या कुमारी ने ‘लीला अपरंपार विंध्यवासिनी मां’ भजन प्रस्तुत की भोजपुरी लोक गायकों ने माटी की खुशबू बिखेरी, जिससे हर उम्र के दर्शक जुड़ाव महसूस कर सके। जिला प्रशासन द्वारा आयोजित इस मेले में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की देखरेख में हजारों की भीड़ को नियंत्रित किया गया। थावे महोत्सव का उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना है, जिसमें यह आयोजन पूरी तरह सफल रहा। समापन समारोह में देर रात तक चली संगीतमय प्रस्तुतियों ने थावे की इस धरती पर एक अमिट छाप छोड़ी। विदाई के वक्त दर्शकों के चेहरों पर अगले साल के महोत्सव का इंतजार साफ झलक रहा था। गोपालगंज जिले में दो दिवसीय थावे महोत्सव का शानदार समापन हुआ। ऐतिहासिक थावे मंदिर के समीप आयोजित इस महोत्सव के अंतिम दिन बॉलीवुड और स्थानीय कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को देर रात तक मंत्रमुग्ध कर दिया। महोत्सव के अंतिम दिन का मुख्य आकर्षण इंडियन आइडल फेम पार्श्व गायक पवनदीप राजन, लोक गायिका पूजा सिंह राजपूत और सारेगामापा फेम जय झा रहे। इनकी प्रस्तुतियों ने महोत्सव को चरम पर पहुंचा दिया, जहां भक्ति, लोक और फिल्मी गीतों का अद्भुत संगम देखने को मिला। सदाबहार गीतों की झड़ी लगाकर माहौल को उत्सवमय बना दिया पवनदीप राजन ने अपने हिट गानों और सुरीली आवाज से युवाओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी गायकी का जादू ऐसा चला कि लोग अपनी कुर्सियों पर खड़े होकर थिरकने लगे। उनके साथ अन्य कलाकारों ने भी बॉलीवुड के सदाबहार गीतों की झड़ी लगाकर माहौल को उत्सवमय बना दिया। बॉलीवुड गानों के अलावा, महोत्सव में बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की भी झलक देखने को मिली। स्थानीय कलाकारों ने लोक संगीत और नृत्य के माध्यम से जिले की परंपराओं को जीवंत किया। इनमें विप्रा चौबे का कत्थक नृत्य, निधि कुमारी के देवी गीत, रौनक कुमारी व सूरमैया सुगंधा के भाव नृत्य और रुखसार अहमद का सितार वादन शामिल था, जिन्होंने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ‘मंगल भवन अमंगल हारी’ की प्रस्तुति दी उभरती पार्श्व गायिका रितिका राज ने मंच पर कदम रखते ही माहौल में नई ऊर्जा भर दी। उन्होंने अपने पहले ही गीत ‘सबसे बड़ा तेरा नाम ओ शेरोवाली’ को भक्ति और जोश के साथ प्रस्तुत किया, जिस पर दर्शकों ने हाथ उठाकर तालियां बजाईं और माहौल भक्तिमय हो उठा। इसके बाद उन्होंने ‘मंगल भवन अमंगल हारी’ की प्रस्तुति दी। रितिका राज ने अपने प्रदर्शन में विविधता लाते हुए ‘दिल में जख्म खाते हैं’ को दर्द भरे अंदाज में गाया। इसके उपरांत ‘जियो हो बिहार के लाला’ पर पूरा मैदान गर्व और उत्साह से झूम उठा। उन्होंने ‘लाल चुनरिया’ को चुलबुले अंदाज में पेश किया, जिस पर महिलाएं झूमती नजर आईं। रितिका राज मंच से उतरकर सीधे दर्शकों के बीच पहुंच गई जब सात समुंदर पार में तेरे पीछे आ गई की पुन बनी, तो युवाओं की टोलियां खुद की रोक नहीं सकों और माहौल डांस फ्लोर में बदल गया। हमने घड़कन-धड़कन करके दिल तेरे दिल से जोड़ लिया को उन्होंने रोमांटिक एहसास के साथ गाया, कहीं दम मारो दम में उन्होंने पुरानी यादों को नए जोश के साथ जीवंत कर दिया। कार्यक्रम का सबसे खास पल तब आया, जब लैला मैं लैला गाते हुए रितिका राज मंच से उतरकर सीधे दर्शकों के बीच पहुंच गई। अचानक उनके करीब पहुंचने से दर्शकों में उत्साह की लहर दौड़ गई। कोई उनके साथ गुनगुनाने लगा, तो कोई मोबाइल में उस पल को कैद करने में जुट गया कलाकारों में खासा उत्साह देखा गया मंच पर प्रस्तुति का अवसर मिलने से कलाकारों में खासा उत्साह देखा गया। कार्यक्रम की शुरुआत गोपालगंज के कोषागार पदाधिकारी शशिकांत आर्या की देखरेख में हुई। इसके बाद एक के बाद एक कलाकसी ने अपनी प्रस्तुति से माहौल को सांस्कृतिक रंग में रंग दिया। बरौली की विप्रा चौबे ने कत्थक नृत्य से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। यहीं निधि कुमारी ने ‘हाथ जोड़कर खड़ी हूं द्वार पर तेरी मां भक्ति गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। रौनक कुमारी और सुरमैया सुगंधा ने ‘नमो देवी महादेवी’ पर भाव नृत्य प्रस्तुत किया। हजारों की भीड़ को नियंत्रित किया गया जबकि सोनाली मिश्रा और रीना मिश्रा ने जन्मे हैं राम रघुरैया’ सोहर गीत से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। आराध्या कुमारी ने ‘लीला अपरंपार विंध्यवासिनी मां’ भजन प्रस्तुत की भोजपुरी लोक गायकों ने माटी की खुशबू बिखेरी, जिससे हर उम्र के दर्शक जुड़ाव महसूस कर सके। जिला प्रशासन द्वारा आयोजित इस मेले में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की देखरेख में हजारों की भीड़ को नियंत्रित किया गया। थावे महोत्सव का उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना है, जिसमें यह आयोजन पूरी तरह सफल रहा। समापन समारोह में देर रात तक चली संगीतमय प्रस्तुतियों ने थावे की इस धरती पर एक अमिट छाप छोड़ी। विदाई के वक्त दर्शकों के चेहरों पर अगले साल के महोत्सव का इंतजार साफ झलक रहा था।


