विकास भवन में लगी ‘कृत्रिम आग’:अधिकारियों-कर्मचारियों ने सीखा बचाव का तरीका; अलार्म सिस्टम, एक्सटिंग्विशर और रेस्क्यू प्रक्रिया की जांच

विकास भवन में लगी ‘कृत्रिम आग’:अधिकारियों-कर्मचारियों ने सीखा बचाव का तरीका; अलार्म सिस्टम, एक्सटिंग्विशर और रेस्क्यू प्रक्रिया की जांच

विकास भवन परिसर में सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक भवनों में आगजनी जैसी आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए व्यापक फायर ब्रिगेड मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। ड्रिल का उद्देश्य अधिकारियों, कर्मचारियों और आम नागरिकों को आग से बचाव के तरीकों के प्रति जागरूक करना तथा परिसर में लगे फायर सेफ्टी उपकरणों की कार्यक्षमता को परखना रहा। यह मॉक ड्रिल मुख्य विकास अधिकारी अंकिता जैन की अध्यक्षता में संपन्न हुई। उन्होंने स्वयं पूरी प्रक्रिया का निरीक्षण किया और अग्निशमन विभाग के विशेषज्ञों से आपदा प्रबंधन की बारीकियों को समझा। इस दौरान जनपद के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और विकास भवन का समस्त स्टाफ मौजूद रहा। कृत्रिम आग लगाकर किया गया लाइव प्रदर्शन फायर ब्रिगेड टीम ने परिसर में कृत्रिम आग लगाकर वास्तविक परिस्थितियों जैसा प्रदर्शन किया। आग लगने पर अलार्म बजाने की प्रक्रिया का अभ्यास कराया गया। फायर स्टेशन को तुरंत सूचना देने की कार्यप्रणाली समझाई गई। धुएं और आग के बीच फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का डेमो दिया गया। एक्सटिंग्विशर चलाने और पानी की बौछार का कराया अभ्यास ड्रिल के दौरान कार्यालयों में लगे फायर एक्सटिंग्विशर के सही उपयोग की ट्रेनिंग दी गई। साथ ही पानी की बौछारों का प्रभावी इस्तेमाल कैसे किया जाए, यह भी कर्मचारियों को सिखाया गया। इसका उद्देश्य आपातकाल में घबराहट के बजाय त्वरित और सही प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना रहा। ‘सिर्फ उपकरण नहीं, उनका प्रशिक्षण भी जरूरी’ सीडीओ ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकारी भवनों में फाइलों और विद्युत उपकरणों की अधिकता के कारण शॉर्ट सर्किट जैसी घटनाओं का खतरा बना रहता है। उन्होंने जोर दिया कि केवल सुरक्षा उपकरण लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि हर कर्मचारी को उन्हें संचालित करने का प्रशिक्षण होना अनिवार्य है। हर ब्लॉक में अग्नि सुरक्षा मानकों के पालन के निर्देश अधिकारियों को विकास भवन के प्रत्येक ब्लॉक और कक्ष में अग्नि सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। ड्रिल के समापन के बाद परिसर में सुरक्षा ऑडिट की भी समीक्षा की गई।

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