खेलो इंडिया जनजातीय खेलों के पहले आयोजन में लगभग 1300 खिलाड़ी लेंगे भाग

खेलो इंडिया जनजातीय खेलों के पहले आयोजन में लगभग 1300 खिलाड़ी लेंगे भाग

देशभर के लगभग 1300 खिलाड़ी बुधवार से शुरू हो रहे खेलो इंडिया जनजातीय खेलों (ट्राइबल गेम्स) में 106 स्वर्ण पदकों के लिए नौ स्पर्धाओं में दमखम दिखाने के लिए तैयार हैं।
इन खेलों का आयोजन छत्तीसगढ़ के तीन स्थलों (रायपुर, जगदलपुर और सरगुजा) में होगा।
ओडिशा ने 125 खिलाड़ियों के साथ सबसे बड़ा दल भेजा है, जबकि मेजबान छत्तीसगढ़ (121), झारखंड (107) और असम (106) की भी मजबूत भागीदारी रहेगी।
इस प्रतियोगिता में तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, भारोत्तोलन और कुश्ती में पदक दांव पर होंगे, जबकि पारंपरिक खेलों में मल्लखंब और कबड्डी का आयोजन प्रदर्शनी खेल के रूप में होगा।
आयोजन में खिलाड़ियों, कोच और अधिकारियों सहित लगभग 3800 प्रतिभागी शामिल होंगे। यह खेल तीन अप्रैल तक चलेंगे।
जनजातीय समुदाय से आने वाले पूर्व दिग्गज हॉकी खिलाड़ी और हॉकी इंडिया के वर्तमान प्रमुख दिलीप तिर्की ने साई (भारतीय खेल प्राधिकरण) मीडिया से कहा, “मेरे लिए और हम सभी के लिए यह अत्यंत गर्व की बात है कि यह चैंपियनशिप देश में पहली बार शुरू हो रही है। यह जनजाति समुदाय के युवाओं और खिलाड़ियों के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने, खेल जगत में आगे बढ़ने और देश के लिए खेलने का एक शानदार अवसर है।”
उन्होंने कहा, “हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का लक्ष्य भारत को एक खेल राष्ट्र बनाना है। वह चाहते हैं कि सभी युवा खेलों से जुड़ें और कोई न कोई खेल खेलें।”
एथलेटिक्स में सबसे अधिक 34 स्वर्ण पदक होंगे, जबकि तैराकी (24), कुश्ती (18), भारोत्तोलन (16) और तीरंदाजी (10) में भी दहाई संख्या में पदक दांव पर रहेंगे।
हॉकी और फुटबॉल की टीम स्पर्धाएं रायपुर में आयोजित होंगी, एथलेटिक्स का आयोजन जगदलपुर में और कुश्ती सरगुजा में कराई जाएगी।
तिर्की ने कहा, “खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया भी चाहते हैं कि खेलों के माध्यम से हमारे एथलीट, विशेषकर जनजाति समुदाय के एथलीट, बेहतर करियर बना सकें, अपना जीवन बेहतर कर सकें और देश का प्रतिनिधित्व कर सकें। मेरा दृढ़ विश्वास है कि हर आदिवासी बच्चे का एक सपना होता है।”
उन्होंने कहा, “मैं स्वयं एक जनजाति परिवार से आता हूं और खेलों, विशेष रूप से हॉकी के माध्यम से ही मैं आज इस मुकाम तक पहुंचा हूं। मेरा मानना है कि इस टूर्नामेंट में भाग लेने वाले सभी बच्चों का भविष्य उज्ज्वल है। इससे पहले भी कई जनजातीय समुदाय के एथलीट देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और हमारे आदिवासी समाज में आदर्श बन चुके हैं।”
100 और 200 मीटर फर्राटा दौड़ के राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी अनिमेष कुजूर ने भी इस पहल को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा, “देश के कई क्षेत्रों में खेलों की पहुंच सीमित है, ऐसे में यह आयोजन जनजातीय समुदाय के प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का बड़ा अवसर है।”
सभी प्रतिभागी राष्ट्रीय खेल महासंघों द्वारा आयोजित चयन ट्रायल्स के माध्यम से चयनित किए गए हैं और उनके प्रदर्शन पर साई द्वारा नियुक्त कोच नजर रखेंगे। 

देशभर के लगभग 1300 खिलाड़ी बुधवार से शुरू हो रहे खेलो इंडिया जनजातीय खेलों (ट्राइबल गेम्स) में 106 स्वर्ण पदकों के लिए नौ स्पर्धाओं में दमखम दिखाने के लिए तैयार हैं।
इन खेलों का आयोजन छत्तीसगढ़ के तीन स्थलों (रायपुर, जगदलपुर और सरगुजा) में होगा।
ओडिशा ने 125 खिलाड़ियों के साथ सबसे बड़ा दल भेजा है, जबकि मेजबान छत्तीसगढ़ (121), झारखंड (107) और असम (106) की भी मजबूत भागीदारी रहेगी।

इस प्रतियोगिता में तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, भारोत्तोलन और कुश्ती में पदक दांव पर होंगे, जबकि पारंपरिक खेलों में मल्लखंब और कबड्डी का आयोजन प्रदर्शनी खेल के रूप में होगा।
आयोजन में खिलाड़ियों, कोच और अधिकारियों सहित लगभग 3800 प्रतिभागी शामिल होंगे। यह खेल तीन अप्रैल तक चलेंगे।

जनजातीय समुदाय से आने वाले पूर्व दिग्गज हॉकी खिलाड़ी और हॉकी इंडिया के वर्तमान प्रमुख दिलीप तिर्की ने साई (भारतीय खेल प्राधिकरण) मीडिया से कहा, “मेरे लिए और हम सभी के लिए यह अत्यंत गर्व की बात है कि यह चैंपियनशिप देश में पहली बार शुरू हो रही है। यह जनजाति समुदाय के युवाओं और खिलाड़ियों के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने, खेल जगत में आगे बढ़ने और देश के लिए खेलने का एक शानदार अवसर है।”

उन्होंने कहा, “हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का लक्ष्य भारत को एक खेल राष्ट्र बनाना है। वह चाहते हैं कि सभी युवा खेलों से जुड़ें और कोई न कोई खेल खेलें।”
एथलेटिक्स में सबसे अधिक 34 स्वर्ण पदक होंगे, जबकि तैराकी (24), कुश्ती (18), भारोत्तोलन (16) और तीरंदाजी (10) में भी दहाई संख्या में पदक दांव पर रहेंगे।
हॉकी और फुटबॉल की टीम स्पर्धाएं रायपुर में आयोजित होंगी, एथलेटिक्स का आयोजन जगदलपुर में और कुश्ती सरगुजा में कराई जाएगी।

तिर्की ने कहा, “खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया भी चाहते हैं कि खेलों के माध्यम से हमारे एथलीट, विशेषकर जनजाति समुदाय के एथलीट, बेहतर करियर बना सकें, अपना जीवन बेहतर कर सकें और देश का प्रतिनिधित्व कर सकें। मेरा दृढ़ विश्वास है कि हर आदिवासी बच्चे का एक सपना होता है।”
उन्होंने कहा, “मैं स्वयं एक जनजाति परिवार से आता हूं और खेलों, विशेष रूप से हॉकी के माध्यम से ही मैं आज इस मुकाम तक पहुंचा हूं। मेरा मानना है कि इस टूर्नामेंट में भाग लेने वाले सभी बच्चों का भविष्य उज्ज्वल है। इससे पहले भी कई जनजातीय समुदाय के एथलीट देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और हमारे आदिवासी समाज में आदर्श बन चुके हैं।”

100 और 200 मीटर फर्राटा दौड़ के राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी अनिमेष कुजूर ने भी इस पहल को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा, “देश के कई क्षेत्रों में खेलों की पहुंच सीमित है, ऐसे में यह आयोजन जनजातीय समुदाय के प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का बड़ा अवसर है।”
सभी प्रतिभागी राष्ट्रीय खेल महासंघों द्वारा आयोजित चयन ट्रायल्स के माध्यम से चयनित किए गए हैं और उनके प्रदर्शन पर साई द्वारा नियुक्त कोच नजर रखेंगे।

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