नालंदा के आर्मी जवान की बीमारी से मौत हो गई। जेसीओ सुमन कुमार सिंह उर्फ पंकज(45) की पोस्टिंग लद्दाख में थी। करीब 1 महीने से बीमार थे और लखनऊ में एडमिट थे। ब्लड कैंसर और पीलिया रोग से पीड़ित थे। अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। शुक्रवार देर रात शहीद का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा। अंतिम विदाई देने उमड़ा जनसैलाब पार्थिव शरीर विशेष वाहन से गांव लाया गया। पूरा इलाका ‘शहीद सुमन कुमार अमर रहे’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों से गुंजायमान हो उठा। अपने लाडले सपूत को अंतिम विदाई देने के लिए आसपास के दर्जनों गांवों से हजारों की संख्या में लोग मोकरमपुर पहुंचे हैं। प्रशासन और सेना के अधिकारियों की मौजूदगी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। बर्फ में दबने से बिगड़ी थी तबीयत जानकारी के मुताबिक मोकरमपुर मिर्चायगंज निवासी सुरेंद्र सिंह के बड़े पुत्र सुमन कुमार सिंह लद्दाख में अपनी ड्यूटी पर तैनात थे। इस दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई। जिसके बाद सेना के बचाव दल ने उन्हें आर्मी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद 27 मार्च को उन्होंने दम तोड़ दिया। सेना से जुड़ा है परिवार शहीद सुमन कुमार सिंह अपने परिवार के स्तंभ थे। दो भाइयों में बड़े थे। उनके छोटे भाई भी देश सेवा के जज्बे से सराबोर हैं और वर्तमान में सीआईएसएफ (CISF) में कार्यरत हैं। शहीद अपने पीछे पत्नी और दो बेटियों को छोड़ गए हैं। उनकी बड़ी बेटी इंटर और छोटी बेटी मैट्रिक की स्टूडेंट है, 2 बेटे भी हैं। पिता की शहादत की खबर सुनकर बच्चों का बुरा हाल है। नालंदा के आर्मी जवान की बीमारी से मौत हो गई। जेसीओ सुमन कुमार सिंह उर्फ पंकज(45) की पोस्टिंग लद्दाख में थी। करीब 1 महीने से बीमार थे और लखनऊ में एडमिट थे। ब्लड कैंसर और पीलिया रोग से पीड़ित थे। अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। शुक्रवार देर रात शहीद का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा। अंतिम विदाई देने उमड़ा जनसैलाब पार्थिव शरीर विशेष वाहन से गांव लाया गया। पूरा इलाका ‘शहीद सुमन कुमार अमर रहे’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों से गुंजायमान हो उठा। अपने लाडले सपूत को अंतिम विदाई देने के लिए आसपास के दर्जनों गांवों से हजारों की संख्या में लोग मोकरमपुर पहुंचे हैं। प्रशासन और सेना के अधिकारियों की मौजूदगी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। बर्फ में दबने से बिगड़ी थी तबीयत जानकारी के मुताबिक मोकरमपुर मिर्चायगंज निवासी सुरेंद्र सिंह के बड़े पुत्र सुमन कुमार सिंह लद्दाख में अपनी ड्यूटी पर तैनात थे। इस दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई। जिसके बाद सेना के बचाव दल ने उन्हें आर्मी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद 27 मार्च को उन्होंने दम तोड़ दिया। सेना से जुड़ा है परिवार शहीद सुमन कुमार सिंह अपने परिवार के स्तंभ थे। दो भाइयों में बड़े थे। उनके छोटे भाई भी देश सेवा के जज्बे से सराबोर हैं और वर्तमान में सीआईएसएफ (CISF) में कार्यरत हैं। शहीद अपने पीछे पत्नी और दो बेटियों को छोड़ गए हैं। उनकी बड़ी बेटी इंटर और छोटी बेटी मैट्रिक की स्टूडेंट है, 2 बेटे भी हैं। पिता की शहादत की खबर सुनकर बच्चों का बुरा हाल है।


