जयपुर। भारतीय सेना ने 78वां सेना दिवस गुरुवार को जयपुर के जगतपुरा स्थित महल रोड पर पूरे सैन्य गौरव एवं अनुशासन के साथ मनाया। यह चौथी बार है जब सेना दिवस परेड दिल्ली के बाहर आयोजित हुई और पहली बार किसी असैन्य क्षेत्र में आयोजित की गई। राजस्थान को पहली बार इस ऐतिहासिक आयोजन की मेजबानी का गौरव मिला। इसके बाद एसएमएस स्टेडियम में शौर्य संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
‘जनता का सेना पर अटूट विश्वास’
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत में सेना हमेशा नागरिकों के साथ मिलकर काम करती है और देश के हर क्षेत्र में इसकी मिसाल देखने को मिलती है। जनता का सेना पर अटूट विश्वास ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। सैनिक जनता के परिवार का हिस्सा हैं और जनता जानती है कि वे कभी निराश नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना आज दुनिया के लिए शांति दूत के रूप में उभरी है और वर्ष 2047 तक इसे दुनिया की सबसे सशक्त सेना बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
युवाओं से की अपील
उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय अस्थिरता के दौर से गुजर रही है, ऐसे में सेना का मजबूत, आत्मनिर्भर और अत्याधुनिक होना अत्यंत आवश्यक है। युद्ध के तरीके बदल रहे हैं और आज कुछ भी अप्रत्याशित नहीं है। ऐसे समय में हमारी सेना हमारी प्राथमिक ताकत है।
उन्होंने सेनाओं में महिलाओं की भूमिका बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस दिशा में धीरे-धीरे महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। सेना में आने की इच्छा रखने वाले युवाओं से अपील करते हुए सिंह ने कहा कि यह केवल नौकरी नहीं, बल्कि देश सेवा का सर्वोत्तम अवसर है। यदि युवाओं में देश के प्रति प्रेम और चुनौतियों से जूझने का साहस है, तो सेना उनके लिए सबसे उपयुक्त क्षेत्र है।
शौर्य, साहस और अजेय शक्ति का प्रदर्शन
गौरतलब है कि इससे पहले सुबह थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने परेड का निरीक्षण कर सलामी ली। दक्षिण-पश्चिम कमान के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल हरविंदर सिंह ने भव्य परेड का नेतृत्व किया। सेना दिवस परेड में भारतीय सेना ने अपने शौर्य, साहस और अजेय शक्ति का प्रदर्शन किया।
स्वदेशी सैन्य क्षमता, आधुनिक आयुध और उभरती तकनीक को देखकर विशिष्ट अतिथि से लेकर आमजन तक कोई भी प्रशंसा किए बिना नहीं रह सका। इस वर्ष की थीम ‘भारतीय सेना-शौर्य और बलिदान’ रखी गई। परेड में परमवीर चक्र, अशोक चक्र, महावीर चक्र, कीर्ति चक्र एवं वीर चक्र विजेता विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।
प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र
स्वदेशी ब्रह्मोस मिसाइल, भीष्म एवं अर्जुन टैंक, के-9 वज्र तोप, बीएमपी वाहन, 155 एमएम अमोघ, नामिस (नाग मिसाइल सिस्टम), पिनाका रॉकेट लॉन्चर सिस्टम, शिल्का हथियार प्रणाली, ड्रोन शक्ति, ड्रोन जैमर तकनीक और इलेक्ट्रिक ऑल-टेरेन व्हीकल का प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र रहा। नव गठित भैरव बटालियन सहित भारतीय सेना की सात रेजीमेंट की टुकड़ियों ने मार्च पास्ट किया।
गर्ल्स एनसीसी टुकड़ी का मार्च पास्ट
अभिनव सैन्य प्रणालियों में रोबोटिक म्यूल, स्वाथी वेपन लोकेटिंग राडार, मॉड्यूलर ब्रिजिंग सिस्टम, मल्टी बैरल रॉकेट सिस्टम, वाहन आधारित इन्फेंट्री मोर्टार सिस्टम, ड्रोन जैमर सिस्टम, मोबाइल कम्युनिकेशन नोड एवं अजय केतु ऑल-टेरेन व्हीकल जैसी अत्याधुनिक प्रणालियां प्रदर्शित की गईं।
भारतीय सेना के विभिन्न बैंड्स के साथ-साथ नेपाल आर्मी बैंड की भागीदारी ने भारत-नेपाल के विशेष सैन्य संबंधों को रेखांकित किया। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को रेखांकित करने के लिए गर्ल्स एनसीसी टुकड़ी ने भी मार्च पास्ट किया। परेड से पहले ऑपरेशन ‘सिंदूर’ एवं अन्य अभियानों में अदम्य साहस और वीरता के लिए शूरवीरों सूबेदार मेजर पवन कुमार, हवलदार सुनील कुमार सिंह, लांस नायक दिनेश कुमार, लांस नायक सुभाष कुमार और लांस नायक प्रदीप कुमार को मरणोपरांत ‘सेना मेडल (गैलेंट्री)’ से सम्मानित किया गया।
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