Argentina on IRGC: मध्य-पूर्व में ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ती तनातनी और संभावित संघर्ष के चलते कई देशों को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ा है। तेल की कीमतों में तेजी और गैस की आपूर्ति में अनिश्चितता ने वैश्विक बाजार को अस्थिर कर दिया है, जिससे कई अर्थव्यवस्थाओं पर गंभीर दबाव पड़ा है। कई देशों ने जंग को तत्काल खत्म करने की मांग की है और कूटनीतिक माध्यम से इस संकट का समाधान खोजने का आह्वान किया है। इसी बीच अर्जेंटीना से बड़ी खबर सामने आई है। अर्जेंटीना ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति कार्यालय ने इस बारे में बयान जारी किया। माना जा रहा कि यह कदम डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा सहयोगी देशों से दबाव डालने के बाद उठाया गया है।
उधर, अर्जेंटीना की तरफ से इस कदम के उठाने का कारण लेबनान स्थित हिजबुल्लाह को IRGC द्वारा समर्थन दिया जाना बताया गया है। अर्जेंटीना हिजबुल्लाह को अपने देश में हुए सबसे घातक बम विस्फोट का जिम्मेदार मानता है, जो 1994 में ब्यूनस आयर्स में एएमआईए यहूदी सामुदायिक केंद्र पर हुआ था। इस हमले में 85 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए थे। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि इस तरह के उपाय से वित्तीय और अन्य परिचालन प्रतिबंध लागू करने की अनुमति मिलती है।
IRGC ईरान का एक विशिष्ट सैन्य बल
ध्यान देने योग्य है कि IRGC एक विशिष्ट सैन्य बल है, जिसका उद्देश्य ईरान में शिया-मुस्लिम धार्मिक शासन की रक्षा करना है और इसका देश में काफी आर्थिक प्रभाव है। अर्जेंटीना से पहले अमेरिका और कुछ अन्य देशों ने भी IRGC और हिजबुल्लाह दोनों को आतंकवादी संगठन घोषित कर चुका है। अर्जेंटीना का यह कदम उसकी नीति को अमेरिका की नीति के करीब लाता है। यह कुछ दिन पहले देखे गए इसी तरह के कदम के अनुरूप है, जब उसने मैक्सिको के जलिस्को न्यू जेनरेशन कार्टेल को आतंकवादी संगठन घोषित किया था।
विश्लेषकों का कहना है कि इस कदम से ईरान-अर्जेंटीना संबंधों में तनाव बढ़ सकता है, जबकि अमेरिका के साथ कूटनीतिक और आर्थिक सहयोग मजबूत होने की संभावना है। साथ ही, यह कार्रवाई अन्य लैटिन अमेरिकी देशों को भी आतंकवाद और संगठित अपराध के खिलाफ कठोर कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकती है।


